एक समावेशी, निम्न-उत्सर्जन वाली और जलवायु अनुकूल विकास एजेंडा को अपनाने से भारत के घरेलू सार्वजनिक व्यय की प्रभावशीलता में काफी वृद्धि होगी। भारत में जलवायु परिवर्तन अनुकूल बजटिंग के संदर्भ में चर्चा कीजिए। (250 शब्दों में उत्तर दीजिए)
महिला सशक्तिकरण के लिए जेंडर बजटिंग की आवश्यकताएँ और स्थिति जेंडर बजटिंग की आवश्यकताएँ: समान अवसर: महिलाओं और लड़कियों को समान अवसर प्रदान करने के लिए जेंडर बजटिंग अनिवार्य है। यह सुनिश्चित करता है कि सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों में लिंग समानता को प्राथमिकता दी जाए। महिला केंद्रित योजनाएँ: जेंडर बRead more
महिला सशक्तिकरण के लिए जेंडर बजटिंग की आवश्यकताएँ और स्थिति
जेंडर बजटिंग की आवश्यकताएँ:
- समान अवसर: महिलाओं और लड़कियों को समान अवसर प्रदान करने के लिए जेंडर बजटिंग अनिवार्य है। यह सुनिश्चित करता है कि सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों में लिंग समानता को प्राथमिकता दी जाए।
- महिला केंद्रित योजनाएँ: जेंडर बजटिंग के माध्यम से महिला केंद्रित योजनाओं जैसे सुकन्या समृद्धि योजना और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना को उचित फंडिंग मिलती है, जो महिलाओं और बच्चों की स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार करती है।
- न्याय और सुरक्षा: जेंडर बजटिंग महिलाओं के खिलाफ हिंसा और यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए विशेष योजनाओं को समर्थन देती है। उदाहरणस्वरूप, नारी शक्ति वर्धन योजना और महिला हेल्पलाइन जैसी योजनाएँ इसी दिशा में काम करती हैं।
वर्तमान स्थिति:
- विशेष बजट आवंटन: भारत सरकार ने 2018-19 के बजट में महिलाओं के लिए विशेष बजट आवंटन किया, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए अतिरिक्त फंडिंग शामिल है।
- समान लिंग भेदभाव: हालांकि जेंडर बजटिंग का महत्व बढ़ा है, लेकिन लिंग भेदभाव और असंवेदनशीलता की समस्याएँ अभी भी बनी हुई हैं। कई राज्यों में जेंडर बजटिंग की संवेदनशीलता की कमी है।
- समीक्षा और निगरानी: जेंडर बजटिंग की समीक्षा और निगरानी को लेकर कई सुधार किए जा रहे हैं। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और राज्य सरकारें नियमित रूप से योजनाओं की प्रभावशीलता का आकलन कर रही हैं।
निष्कर्ष:
जेंडर बजटिंग भारत में महिला सशक्तिकरण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो लिंग समानता को बढ़ावा देता है और महिलाओं की स्थिति में सुधार करता है। हालाँकि, कार्यान्वयन और निगरानी में सुधार की आवश्यकता है, ताकि इसका प्रभावी ढंग से कार्यान्वयन किया जा सके।
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भारत में जलवायु परिवर्तन अनुकूल बजटिंग (Climate-Resilient Budgeting) को अपनाने से घरेलू सार्वजनिक व्यय की प्रभावशीलता में महत्वपूर्ण सुधार हो सकता है। इस संदर्भ में भारत ने कई महत्वपूर्ण पहल की हैं:
इन पहलुओं के माध्यम से भारत ने एक समावेशी, निम्न-उत्सर्जन वाली और जलवायु अनुकूल विकास एजेंडा को अपनाने में सफलता प्राप्त की है, जिससे सार्वजनिक व्यय की प्रभावशीलता और जलवायु परिवर्तन के प्रति देश की संवेदनशीलता में वृद्धि हुई है।
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