‘अनुच्छेद 32 भारत के संविधान की आत्मा है।’ संक्षेप में व्याख्या कीजिये। (125 Words) [UPPSC 2020]
भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 की परिधि में अधिकार 1. जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार: अनुच्छेद 21 के तहत, हर व्यक्ति को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है। यह अधिकार कानूनी प्रक्रिया के अनुसार सुरक्षित है। 2. स्वास्थ्य और स्वच्छता: Right to Health: सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में 'फRead more
भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 की परिधि में अधिकार
1. जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार:
- अनुच्छेद 21 के तहत, हर व्यक्ति को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है। यह अधिकार कानूनी प्रक्रिया के अनुसार सुरक्षित है।
2. स्वास्थ्य और स्वच्छता:
- Right to Health: सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में ‘फिरोज़ शाह बनाम यूनियन ऑफ इंडिया’ मामले में स्वास्थ्य का अधिकार को जीवन के अधिकार का हिस्सा मानते हुए सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच सुनिश्चित करने की आवश्यकता को बल दिया।
3. शिक्षा का अधिकार:
- Right to Education: 2002 में 86वें संविधान संशोधन के तहत, अनुच्छेद 21 में शिक्षा का अधिकार जोड़ा गया, जो 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा सुनिश्चित करता है।
4. स्वच्छता का अधिकार:
- Right to Clean Environment: 1996 में ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन बनाम भारत सरकार’ मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने स्वच्छ पर्यावरण को जीवन के अधिकार के अंतर्गत माना।
5. जीविका का अधिकार:
- Right to Livelihood: 1978 में ‘के.के. साही बनाम राज्य’ में, कोर्ट ने जीविका का अधिकार को अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मान्यता दी, जिससे गरीब और वंचित वर्गों को जीवन जीने के लिए आवश्यक संसाधन प्राप्त करने का अधिकार मिला।
निष्कर्ष
अनुच्छेद 21 भारतीय संविधान के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की व्यापक सुरक्षा प्रदान करता है, जिसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता, और जीविका जैसे अधिकार शामिल हैं। ये अधिकार सुप्रीम कोर्ट द्वारा विभिन्न निर्णयों के माध्यम से विस्तारित और मजबूत किए गए हैं।
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भारतीय संविधान के अनुच्छेद 72 और 161 के तहत राष्ट्रपति और राज्यपाल को क्षमादान का अधिकार प्राप्त है, लेकिन दोनों के अधिकार में अंतर है। राष्ट्रपति का अधिकार (अनुच्छेद 72): राष्ट्रपति को मृत्यु दंड, उम्रकैद या किसी अन्य दंड को कम करने, स्थगित करने, या माफ करने का अधिकार है। यह अधिकार विशेष रूप से केंRead more
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 72 और 161 के तहत राष्ट्रपति और राज्यपाल को क्षमादान का अधिकार प्राप्त है, लेकिन दोनों के अधिकार में अंतर है।
इस प्रकार, राष्ट्रपति का क्षमादान का अधिकार केंद्रीय मामलों तक सीमित है, जबकि राज्यपाल का अधिकार केवल राज्य स्तरीय मामलों तक ही सीमित रहता है।
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