दिल्ली और उसके आसपास यमुना नदी में शीत ऋतु के प्रारंभ में उत्पन्न झाग सुर्खियों में रहा है। इसके पीछे के कारणों की पहचान करते हुए इसके व्यापक प्रभाव पर चर्चा कीजिए। (150 शब्दों में उत्तर दीजिए)
सेलुलोस के प्राकृतिक विघटन की प्रक्रियाएँ **1. सूक्ष्मजीवों द्वारा विघटन: सेलुलोस का पहला चरण सूक्ष्मजीवों जैसे बैक्टीरिया और फंगस द्वारा विघटन होता है। उदाहरण के लिए, सोरलिया जैसे फंगस वनों में सेलुलोस को छोटे-छोटे यौगिकों में तोड़ते हैं। **2. ह्यूमस का निर्माण: सूक्ष्मजीवों द्वारा विघटन के बाद, ह्Read more
सेलुलोस के प्राकृतिक विघटन की प्रक्रियाएँ
**1. सूक्ष्मजीवों द्वारा विघटन:
- सेलुलोस का पहला चरण सूक्ष्मजीवों जैसे बैक्टीरिया और फंगस द्वारा विघटन होता है। उदाहरण के लिए, सोरलिया जैसे फंगस वनों में सेलुलोस को छोटे-छोटे यौगिकों में तोड़ते हैं।
**2. ह्यूमस का निर्माण:
- सूक्ष्मजीवों द्वारा विघटन के बाद, ह्यूमस का निर्माण होता है, जो एक गहरा, जैविक पदार्थ होता है। ह्यूमस की प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) और जल का उत्सर्जन होता है, जो मृदा के स्वास्थ्य में सुधार करता है।
**3. सेलुलोस किण्वन:
- एयरोबिक स्थितियों में, जैसे पारिस्थितिक तंत्र में या रुमिनेंट के पाचन तंत्र में, सेलुलोस किण्वन द्वारा मीथेन (CH4) उत्पन्न होता है। उदाहरण के लिए, गाय के रुमेन में किण्वक सेलुलोस को किण्वित करते हैं और CO2 के साथ मीथेन का उत्पादन करते हैं।
**4. कार्बन संचयन और उत्सर्जन:
- कुछ सेलुलोस-व्युत्पन्न कार्बन पीटलैंड या विक्षेपन परतों में संचयित होता है। बाद में, प्राकृतिक प्रक्रियाओं जैसे मृदा श्वसन और जैविक अपघटन द्वारा CO2 के रूप में उत्सर्जित होता है।
हालिया उदाहरण:
- 2023 में, अमेज़न वर्षावन की मृदा में नमी के स्तर पर अध्ययन ने दिखाया कि कैसे सूक्ष्मजीवों की गतिविधि सेलुलोस विघटन को बढ़ावा देती है और कार्बन चक्र को प्रभावित करती है।
इन प्राकृतिक प्रक्रियाओं के माध्यम से सेलुलोस को कार्बन डाइऑक्साइड, जल और अन्य अंत्य उत्पादों में परिवर्तित किया जाता है, जो वैश्विक कार्बन चक्र और मृदा स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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दिल्ली और आसपास यमुना नदी में शीत ऋतु के प्रारंभ में उत्पन्न झाग मुख्यतः जल प्रदूषण के कारण होता है। इस झाग का मुख्य कारण नदी में अत्यधिक मात्रा में औद्योगिक अपशिष्ट, रसायन, और घरेलू गंदगी का मिलना है। शीत ऋतु में कम तापमान और उच्च आर्द्रता के कारण इन प्रदूषकों के साथ बायोलॉजिकल ऑक्सिजन डिमांड (BOD)Read more
दिल्ली और आसपास यमुना नदी में शीत ऋतु के प्रारंभ में उत्पन्न झाग मुख्यतः जल प्रदूषण के कारण होता है। इस झाग का मुख्य कारण नदी में अत्यधिक मात्रा में औद्योगिक अपशिष्ट, रसायन, और घरेलू गंदगी का मिलना है। शीत ऋतु में कम तापमान और उच्च आर्द्रता के कारण इन प्रदूषकों के साथ बायोलॉजिकल ऑक्सिजन डिमांड (BOD) और कैलोरेस्ट्रेटिव स्ट्रिप्स (COD) के स्तर में वृद्धि होती है, जिससे झाग का निर्माण होता है।
इसके व्यापक प्रभावों में जल की गुणवत्ता में गंभीर गिरावट, जलीय जीवन के लिए खतरा, और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव शामिल हैं। प्रदूषित जल से बीमारियों का खतरा बढ़ता है, और यह स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करता है। इसके समाधान के लिए प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन और नदी संरक्षण उपायों की आवश्यकता है।
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