यह पूर्वानुमान लगाया गया है कि 2040 की ग्रीष्म ऋतु तक आर्कटिक हिम-मुक्त हो सकता है। महासागरों पर इसके संभावित प्रभावों का उल्लेख कीजिए। साथ ही, चर्चा कीजिए कि भारत इस स्थिति में किस प्रकार प्रभावित होगा। (150 शब्दों में ...
दिल्ली और आसपास यमुना नदी में शीत ऋतु के प्रारंभ में उत्पन्न झाग मुख्यतः जल प्रदूषण के कारण होता है। इस झाग का मुख्य कारण नदी में अत्यधिक मात्रा में औद्योगिक अपशिष्ट, रसायन, और घरेलू गंदगी का मिलना है। शीत ऋतु में कम तापमान और उच्च आर्द्रता के कारण इन प्रदूषकों के साथ बायोलॉजिकल ऑक्सिजन डिमांड (BOD)Read more
दिल्ली और आसपास यमुना नदी में शीत ऋतु के प्रारंभ में उत्पन्न झाग मुख्यतः जल प्रदूषण के कारण होता है। इस झाग का मुख्य कारण नदी में अत्यधिक मात्रा में औद्योगिक अपशिष्ट, रसायन, और घरेलू गंदगी का मिलना है। शीत ऋतु में कम तापमान और उच्च आर्द्रता के कारण इन प्रदूषकों के साथ बायोलॉजिकल ऑक्सिजन डिमांड (BOD) और कैलोरेस्ट्रेटिव स्ट्रिप्स (COD) के स्तर में वृद्धि होती है, जिससे झाग का निर्माण होता है।
इसके व्यापक प्रभावों में जल की गुणवत्ता में गंभीर गिरावट, जलीय जीवन के लिए खतरा, और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव शामिल हैं। प्रदूषित जल से बीमारियों का खतरा बढ़ता है, और यह स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करता है। इसके समाधान के लिए प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन और नदी संरक्षण उपायों की आवश्यकता है।
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2040 तक आर्कटिक हिम-मुक्त होने के संभावित परिणामों में महासागरों पर भी गहरा प्रभाव हो सकता है। जब आर्कटिक के हिम घटने लगेंगे, तो समुद्र स्तर में वृद्धि होगी और महासागरों के जलवायु परिवर्तन में वृद्धि देखने की संभावना है। इससे जलवायु तंत्र और समुद्री जीवन पर असर पड़ सकता है। भारत इस स्थिति में भी प्रRead more
2040 तक आर्कटिक हिम-मुक्त होने के संभावित परिणामों में महासागरों पर भी गहरा प्रभाव हो सकता है। जब आर्कटिक के हिम घटने लगेंगे, तो समुद्र स्तर में वृद्धि होगी और महासागरों के जलवायु परिवर्तन में वृद्धि देखने की संभावना है। इससे जलवायु तंत्र और समुद्री जीवन पर असर पड़ सकता है।
भारत इस स्थिति में भी प्रभावित हो सकता है। जलवायु परिवर्तन के कारण भारत में मौसम परिवर्तन, बाढ़, सूखा, और चक्रवाती तूफानों में वृद्धि हो सकती है। समुद्र स्तर की वृद्धि से भारत के तटीय क्षेत्रों पर भूमिगत विपदाएं भी बढ़ सकती हैं। इसलिए, सावधानी बरतने और पर्यावरण संरक्षण के लिए कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है।
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