संयुक्त राष्ट्र आर्थिक व सामाजिक परिषद् (इकोसॉक) के प्रमुख प्रकार्य क्या हैं? इसके साथ संलग्न विभिन्न प्रकार्यात्मक आयोगों को स्पष्ट कीजिए। (150 words) [UPSC 2017]
डब्ल्यू.टी.ओ. के लक्ष्य और दोहा दौर की वार्ताओं पर भारतीय परिप्रेक्ष्य परिचय विश्व व्यापार संगठन (WTO) का उद्देश्य वैश्वीकरण के युग में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को प्रबंधित और प्रोत्साहित करना है। हालांकि, दोहा दौर की वार्ताएँ विकसित और विकासशील देशों के बीच मतभेदों के कारण ठप हो गई हैं। डब्ल्यू.टी.ओ.Read more
डब्ल्यू.टी.ओ. के लक्ष्य और दोहा दौर की वार्ताओं पर भारतीय परिप्रेक्ष्य
परिचय विश्व व्यापार संगठन (WTO) का उद्देश्य वैश्वीकरण के युग में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को प्रबंधित और प्रोत्साहित करना है। हालांकि, दोहा दौर की वार्ताएँ विकसित और विकासशील देशों के बीच मतभेदों के कारण ठप हो गई हैं।
डब्ल्यू.टी.ओ. के लक्ष्य और उद्देश्य
- व्यापार मुक्तिकरण: डब्ल्यू.टी.ओ. का लक्ष्य वैश्विक व्यापार बाधाओं को कम करना और मुक्त व्यापार को बढ़ावा देना है।
- विवाद निवारण: यह संस्था सदस्य देशों के बीच व्यापार विवादों को सुलझाने का मंच प्रदान करती है।
- आर्थिक विकास: समान और निष्पक्ष व्यापार नीतियों को लागू करके वैश्विक आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करती है।
दोहा दौर की वार्ताओं में चुनौतियाँ
- विकसित और विकासशील देशों के बीच मतभेद:
- कृषि सब्सिडी: विकसित देशों द्वारा दी जाने वाली कृषि सब्सिडी पर विकासशील देशों का जोर है। भारत ने बार-बार यह मुद्दा उठाया है कि पश्चिमी देशों की सब्सिडी उनकी कृषि वस्तुओं की कीमत को वैश्विक बाजार में कृत्रिम रूप से कम करती है, जिससे भारतीय किसानों को नुकसान होता है।
- वाणिज्यिक पहुंच: विकासशील देशों के लिए बाजार पहुंच के मुद्दे पर भी विवाद है। भारत ने व्यापारिक पहुंच में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया है, विशेषकर निर्यात क्षेत्र में।
भारतीय परिप्रेक्ष्य
- भारत का दृष्टिकोण: भारत ने दोहा दौर की वार्ताओं में किसानों की सुरक्षा और घरेलू उद्योगों के संरक्षण पर जोर दिया है। भारत का मानना है कि व्यापार नीतियाँ विकासशील देशों के विकास के अनुकूल होनी चाहिए।
- हाल के प्रयास: भारत के कृषि और व्यापार नीतियाँ, जैसे प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और नैशनल एग्रीकल्चर मार्केट (eNAM), घरेलू किसानों की स्थिति को मजबूत करने में मदद कर रही हैं, जिससे वे वैश्विक व्यापार में बेहतर तरीके से प्रतिस्पर्धा कर सकें।
निष्कर्ष डब्ल्यू.टी.ओ. के व्यापक लक्ष्य अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को प्रबंधित और प्रोत्साहित करना है, लेकिन दोहा दौर की वार्ताओं में विकसित और विकासशील देशों के बीच मतभेदों के कारण प्रगति में रुकावट आई है। भारतीय दृष्टिकोण से, कृषि सब्सिडी और बाजार पहुंच जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हैं, और इसके समाधान से वैश्विक व्यापार प्रणाली में समावेशिता और समानता सुनिश्चित की जा सकती है।
See less
संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद् (इकोसॉक) संयुक्त राष्ट्र की एक प्रमुख संस्था है, जो आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, और मानवीय मुद्दों पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कार्य करती है। इसके प्रमुख प्रकार्य निम्नलिखित हैं: अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक और सामाजिक मामलों पर चर्चा: वैश्विक आर्थRead more
संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद् (इकोसॉक) संयुक्त राष्ट्र की एक प्रमुख संस्था है, जो आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, और मानवीय मुद्दों पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कार्य करती है। इसके प्रमुख प्रकार्य निम्नलिखित हैं:
अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक और सामाजिक मामलों पर चर्चा: वैश्विक आर्थिक और सामाजिक मुद्दों पर चर्चाओं का आयोजन और समन्वयन।
नीतियों और अनुशंसाओं का निर्माण: सदस्य देशों के लिए नीतिगत दिशा-निर्देश और अनुशंसाएँ विकसित करना।
संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों का समन्वयन: विभिन्न एजेंसियों के कार्यों का समन्वयन और निगरानी।
सतत विकास लक्ष्यों का समर्थन: 2030 एजेंडा के तहत सतत विकास लक्ष्यों की प्रगति की समीक्षा और समर्थन।
इकोसॉक के साथ संलग्न प्रमुख प्रकार्यात्मक आयोग:
आर्थिक आयोग: क्षेत्रीय स्तर पर आर्थिक मुद्दों का विश्लेषण, जैसे एशिया और प्रशांत के लिए आर्थिक और सामाजिक आयोग (ESCAP)।
See lessसामाजिक आयोग: सामाजिक नीतियों और मानकों की निगरानी, जैसे सामाजिक विकास आयोग (CSD)।
आबादी और विकास आयोग: जनसंख्या संबंधी नीतियों पर अनुसंधान और सिफारिशें।
नारकोटिक ड्रग्स पर आयोग: अंतर्राष्ट्रीय ड्रग नीति और नियंत्रण।
ये आयोग इकोसॉक की व्यापक नीति निर्माण और अनुशंसा प्रक्रिया में सहायक होते हैं।