सस्यन तंत्र में धान और गेहूँ की गिरती हुई उपज के लिए क्या-क्या मुख्य कारण हैं ? तंत्र में फसलों की उपज के स्थिरीकरण में, सस्य विविधीकरण किस प्रकार मददगार होता है ? (250 words) [UPSC 2017]
विशेष फसलों पर जोर और सस्पन पैटनों में परिवर्तन 1. विशेष फसलों पर जोर: सरकार की नीतियाँ: हाल के वर्षों में, सरकार ने विशेष फसलों जैसे धान और गेंहू पर जोर देने के साथ-साथ मोटे अनाज (मिलट्स) जैसे बाजरा, रागी, और कोदो की ओर भी ध्यान केंद्रित किया है। यह बदलाव सार्वजनिक वितरण प्रणाली और फसल विविधता के सRead more
विशेष फसलों पर जोर और सस्पन पैटनों में परिवर्तन
1. विशेष फसलों पर जोर:
- सरकार की नीतियाँ: हाल के वर्षों में, सरकार ने विशेष फसलों जैसे धान और गेंहू पर जोर देने के साथ-साथ मोटे अनाज (मिलट्स) जैसे बाजरा, रागी, और कोदो की ओर भी ध्यान केंद्रित किया है। यह बदलाव सार्वजनिक वितरण प्रणाली और फसल विविधता के संरक्षण के लिए किया गया है।
- कृषि सब्सिडी और प्रोत्साहन: धान और गेंहू की ज़्यादा उपज के कारण, इन फसलों के लिए सब्सिडी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि की गई। लेकिन, यह नीतियाँ अन्य फसलों, विशेषकर मोटे अनाजों, की अनदेखी कर देती थीं।
2. मोटे अनाजों (मिलट्स) का महत्व:
- स्वास्थ्य लाभ: मिलट्स जैसे बाजरा और रागी में उच्च प्रोटीन, फाइबर, और मिनरल्स होते हैं। ये फसलें कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली होती हैं और मधुमेह और हृदय रोगों के खतरे को कम करती हैं।
- जलवायु अनुकूलता: मिलट्स कम पानी की आवश्यकता होती है और सूखा सहनशील होते हैं, जो जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। भारत के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में ये फसलें अधिक उपयुक्त हैं।
3. हालिया पहलें:
- राष्ट्रीय मिलट्स मिशन: भारत सरकार ने राष्ट्रीय मिलट्स मिशन की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य मिलट्स के उत्पादन और उपभोग को बढ़ावा देना है। इस मिशन के तहत तकनीकी सहायता, वित्तीय प्रोत्साहन, और शिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
- प्रेरक योजनाएँ: फसलों की विविधता को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकारें भी विशेष योजनाएँ चला रही हैं, जैसे मोटे अनाज विकास कार्यक्रम, जो किसानों को मिलट्स की खेती के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
4. सस्पन पैटनों में बदलाव:
- फसल विविधता: सरकार और नीति-निर्माताओं के प्रयास से, किसान अब अधिक मिलट्स की खेती कर रहे हैं, जिससे फसल विविधता में वृद्धि हो रही है। यह बदलाव आर्थिक स्थिरता और जलवायु अनुकूलता में सुधार ला रहा है।
- विपणन और उपभोग: मिलट्स की बढ़ती लोकप्रियता और स्वास्थ्य लाभों के कारण, इनकी मांग और उपभोग बढ़ रहा है, जिससे इनके उत्पादन को प्रोत्साहन मिल रहा है।
5. निष्कर्ष: विशेष फसलों पर जोर ने सस्पन पैटनों में परिवर्तन लाया है। सरकार की नीतियों के तहत मोटे अनाजों के उत्पादन और उपभोग को बढ़ावा देने के प्रयास ने न केवल किसानों के लिए फसल विविधता बढ़ाई है, बल्कि स्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्थिरता में भी योगदान दिया है। यह बदलाव भारत के कृषि क्षेत्र की सततता और विकास के लिए सकारात्मक संकेत है।
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धान और गेहूँ की गिरती हुई उपज के मुख्य कारण और सस्य विविधीकरण का योगदान
**1. धान और गेहूँ की गिरती हुई उपज के मुख्य कारण:
**1. मृदा अवसाद:
**2. जल संकट:
**3. जलवायु परिवर्तन:
**4. कीट और रोगों का दबाव:
**5. सिंगल फसल पद्धति:
**2. सस्य विविधीकरण का उपज स्थिरीकरण में योगदान:
**1. मृदा स्वास्थ्य में सुधार:
**2. जल उपयोग की दक्षता:
**3. कीट और रोग प्रबंधन:
**4. जलवायु परिवर्तन के प्रति सहनशीलता:
**5. आर्थिक लाभ:
हालिया उदाहरण:
निष्कर्ष:
- धान और गेहूँ की गिरती हुई उपज के प्रमुख कारणों में मृदा अवसाद, जल संकट, जलवायु परिवर्तन, कीट और रोग दबाव, और सिंगल फसल पद्धति शामिल हैं। सस्य विविधीकरण मृदा स्वास्थ्य सुधार, जल उपयोग की दक्षता, कीट और रोग प्रबंधन, जलवायु सहनशीलता, और आर्थिक लाभ प्रदान करता है। इन उपायों को अपनाकर उपज को स्थिर किया जा सकता है और कृषि प्रणाली को सशक्त किया जा सकता है।
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