राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं? खाद्य सुरक्षा विधेयक ने भारत में भूख तथा कुपोषण को दूर करने में किस प्रकार सहायता की है ? (250 words) [UPSC 2021]
भारत में खाद्य सुरक्षा की चुनौतियाँ और उनके समाधान चुनौतियाँ: जनसंख्या वृद्धि: तेजी से बढ़ती जनसंख्या खाद्य मांग को बढ़ा रही है। 2030 तक भारत की जनसंख्या 1.5 अरब तक पहुंचने का अनुमान है, जो खाद्य सुरक्षा पर दबाव डालती है। जलवायु परिवर्तन: चरम मौसम घटनाएँ जैसे बाढ़ और सूखा फसल उत्पादन को प्रभावित करतRead more
भारत में खाद्य सुरक्षा की चुनौतियाँ और उनके समाधान
चुनौतियाँ:
- जनसंख्या वृद्धि: तेजी से बढ़ती जनसंख्या खाद्य मांग को बढ़ा रही है। 2030 तक भारत की जनसंख्या 1.5 अरब तक पहुंचने का अनुमान है, जो खाद्य सुरक्षा पर दबाव डालती है।
- जलवायु परिवर्तन: चरम मौसम घटनाएँ जैसे बाढ़ और सूखा फसल उत्पादन को प्रभावित करती हैं। उदाहरण के लिए, 2020 में भारी बारिश और बाढ़ ने कई राज्यों में फसलें नष्ट कर दीं, जिससे खाद्य आपूर्ति प्रभावित हुई।
- कृषि में असमर्थता: पुरानी खेती की तकनीकें और तकनीकी निवेश की कमी कृषि उत्पादन को प्रभावित करती है। कई किसान पारंपरिक तरीकों पर निर्भर हैं, जिससे संसाधनों का प्रभावी उपयोग नहीं हो पाता।
- गरीबी और असमानता: ग्रामीण क्षेत्रों में कई लोग गरीब हैं और उनके पास पर्याप्त खाद्य पदार्थों की पहुंच नहीं है। विश्व बैंक के अनुसार, भारत की लगभग 22% जनसंख्या गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करती है।
समाधान:
- तकनीकी उन्नति: आधुनिक कृषि तकनीकों और जीन संवर्धित फसलों में निवेश से उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, उच्च उपज वाले फसल किस्में उत्पादकता बढ़ा सकती हैं।
- जलवायु-प्रतिरोधी फसलें: जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए जलवायु-प्रतिरोधी फसलों का विकास और प्रचार आवश्यक है। राष्ट्रीय कृषि स्थिरता मिशन जैसी पहल फसल प्रतिरोध में सुधार पर ध्यान केंद्रित करती है।
- इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार: खाद्य भंडारण और परिवहन ढांचे में सुधार से फसल कटाई के बाद की हानि को कम किया जा सकता है। ठंडे भंडारण सुविधाओं और कुशल आपूर्ति श्रृंखलाओं में निवेश महत्वपूर्ण है।
- सामाजिक कल्याण कार्यक्रम: सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) जैसे सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों का विस्तार और सुधार गरीबों के लिए बेहतर खाद्य पहुंच सुनिश्चित कर सकता है। हाल के सुधार पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने पर केंद्रित हैं।
निष्कर्ष: भारत में खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों को हल करने के लिए तकनीकी नवाचार, जलवायु अनुकूलन, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, और प्रभावी सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों की आवश्यकता है। इन उपायों को लागू करके खाद्य सुरक्षा को मजबूत किया जा सकता है और सभी नागरिकों को पर्याप्त और पोषक खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है।
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राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की मुख्य विशेषताएँ 1. कवरेज और अधिकार: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013, का उद्देश्य लगभग 75% ग्रामीण जनसंख्या और 50% शहरी जनसंख्या को खाद्य सुरक्षा प्रदान करना है। अधिनियम पात्र घरों को प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलोग्राम सब्सिडी वाले खाद्य अनाज कीRead more
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की मुख्य विशेषताएँ
1. कवरेज और अधिकार: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013, का उद्देश्य लगभग 75% ग्रामीण जनसंख्या और 50% शहरी जनसंख्या को खाद्य सुरक्षा प्रदान करना है। अधिनियम पात्र घरों को प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलोग्राम सब्सिडी वाले खाद्य अनाज की आपूर्ति करता है, जिसमें चावल ₹3/kg, गेहूं ₹2/kg, और मोटे अनाज ₹1/kg की दर पर उपलब्ध हैं।
2. प्राथमिक और अंत्योदय अन्न योजना: यह अधिनियम दो श्रेणियों के लाभार्थियों को निर्दिष्ट करता है:
3. पोषण सहायता: अधिनियम गर्भवती महिलाओं, दूध पिलाने वाली माताओं और बच्चों को पोषण सहायता प्रदान करने की व्यवस्था करता है। मिड-डे मील योजना और एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) के तहत मुफ्त भोजन और पोषणयुक्त भोजन प्रदान किया जाता है।
4. शिकायत निवारण तंत्र: खाद्य वितरण और अधिकारों से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए राज्य खाद्य आयोग जैसे शिकायत निवारण तंत्र की स्थापना की गई है।
5. कानूनी अधिकार: यह अधिनियम खाद्य अधिकार को एक कानूनी अधिकार बनाता है, जिसे कानूनी ढांचे के माध्यम से लागू किया जा सकता है।
भूख और कुपोषण को दूर करने में खाद्य सुरक्षा विधेयक की सहायता
1. भूख में कमी: NFSA ने भूख को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। NFHS-5 के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि निम्न-आय वाले घरानों के लिए खाद्य सुरक्षा में सुधार हुआ है।
2. पोषण सुधार: मिड-डे मील योजना और ICDS के अंतर्गत पोषणयुक्त भोजन देने से बच्चों और महिलाओं के पोषण में सुधार हुआ है। हाल की रिपोर्टों के अनुसार, कुपोषण दरें कम हुई हैं।
3. खाद्य वितरण में सुधार: NFSA ने खाद्य वितरण तंत्र को सुव्यवस्थित किया है, जिससे अनाज की चोरी और गड़बड़ी कम हुई है। कई राज्यों में आधार आधारित बायोमैट्रिक सिस्टम का उपयोग करके पारदर्शिता सुनिश्चित की गई है।
चुनौतियाँ और सुधार की दिशा: फिर भी, कार्यांवयन की समस्याएँ, अपर्याप्त भंडारण सुविधाएँ, और खाद्य अपव्यय जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं। सरकार इन समस्याओं को बेहतर प्रबंधन प्रथाओं और सुधारित लॉजिस्टिक्स के माध्यम से संबोधित कर रही है।
निष्कर्ष: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 ने भारत में भूख और कुपोषण को दूर करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, लेकिन कार्यांवयन की समस्याओं को दूर करने और अधिनियम की प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं।
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