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दिल्ली और उसके आसपास यमुना नदी में शीत ऋतु के प्रारंभ में उत्पन्न झाग सुर्खियों में रहा है। इसके पीछे के कारणों की पहचान करते हुए इसके व्यापक प्रभाव पर चर्चा कीजिए। (150 शब्दों में उत्तर दीजिए)
दिल्ली और उसके आसपास यमुना नदी में शीत ऋतु के प्रारंभ में उत्पन्न झाग मुख्यतः जल प्रदूषण के कारण होता है। यह झाग आमतौर पर उद्योगों से निकलने वाले रसायनों, साबुन और अन्य रासायनिक अपशिष्टों की वजह से बनता है, जो नदी के पानी में घुल जाते हैं। सर्दी के मौसम में, ठंड और कम हवा की गति के कारण झाग का संचयRead more
दिल्ली और उसके आसपास यमुना नदी में शीत ऋतु के प्रारंभ में उत्पन्न झाग मुख्यतः जल प्रदूषण के कारण होता है। यह झाग आमतौर पर उद्योगों से निकलने वाले रसायनों, साबुन और अन्य रासायनिक अपशिष्टों की वजह से बनता है, जो नदी के पानी में घुल जाते हैं। सर्दी के मौसम में, ठंड और कम हवा की गति के कारण झाग का संचय बढ़ जाता है और यह अधिक स्पष्ट हो जाता है।
इसके व्यापक प्रभावों में शामिल हैं:
1. **स्वास्थ्य समस्याएँ**: झाग में मौजूद विषैले रसायन स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं, जिससे त्वचा की समस्याएं और सांस की बीमारियाँ हो सकती हैं।
2. **पारिस्थितिकी तंत्र का नुकसान**: झाग और प्रदूषित जल जलीय जीवन के लिए हानिकारक होते हैं, जिससे मछलियों और अन्य जलजीवों की मौत हो सकती है।
3. **सामाजिक प्रभाव**: झाग के कारण पानी की गुणवत्ता पर सवाल उठता है, जो लोगों के जीवन और पेयजल स्रोतों को प्रभावित करता है।
इस समस्या के समाधान के लिए प्रदूषण नियंत्रण और बेहतर जल प्रबंधन की आवश्यकता है।
See lessयह पूर्वानुमान लगाया गया है कि 2040 की ग्रीष्म ऋतु तक आर्कटिक हिम-मुक्त हो सकता है। महासागरों पर इसके संभावित प्रभावों का उल्लेख कीजिए। साथ ही, चर्चा कीजिए कि भारत इस स्थिति में किस प्रकार प्रभावित होगा। (150 शब्दों में उत्तर दीजिए)
2040 तक आर्कटिक हिम-मुक्त होने के संभावित परिणामों में महासागरों पर भी गहरा प्रभाव हो सकता है। जब आर्कटिक के हिम घटने लगेंगे, तो समुद्र स्तर में वृद्धि होगी और महासागरों के जलवायु परिवर्तन में वृद्धि देखने की संभावना है। इससे जलवायु तंत्र और समुद्री जीवन पर असर पड़ सकता है। भारत इस स्थिति में भी प्रRead more
2040 तक आर्कटिक हिम-मुक्त होने के संभावित परिणामों में महासागरों पर भी गहरा प्रभाव हो सकता है। जब आर्कटिक के हिम घटने लगेंगे, तो समुद्र स्तर में वृद्धि होगी और महासागरों के जलवायु परिवर्तन में वृद्धि देखने की संभावना है। इससे जलवायु तंत्र और समुद्री जीवन पर असर पड़ सकता है।
भारत इस स्थिति में भी प्रभावित हो सकता है। जलवायु परिवर्तन के कारण भारत में मौसम परिवर्तन, बाढ़, सूखा, और चक्रवाती तूफानों में वृद्धि हो सकती है। समुद्र स्तर की वृद्धि से भारत के तटीय क्षेत्रों पर भूमिगत विपदाएं भी बढ़ सकती हैं। इसलिए, सावधानी बरतने और पर्यावरण संरक्षण के लिए कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है।
See lessअत्यधिक और अविवेकपूर्ण रेत खनन की पारिस्थितिक लागत इसके आर्थिक लाभों से कहीं अधिक है। संधारणीय रेत खनन के महत्व के संदर्भ में चर्चा कीजिए।
अत्यधिक और अविवेकपूर्ण रेत खनन आमतौर पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है और समाज को योग्य रीति से विकसित होने से रोकता है। इसके विपरीत, संधारणीय रेत खनन एक समृद्धि और सामाजिक सुरक्षा का स्रोत हो सकता है। पर्यावरण संरक्षण: संधारणीय रेत खनन पर्यावरण के साथ समांजस्यपूर्णता बनाए रखता है। इससे प्राकृतिक संRead more
अत्यधिक और अविवेकपूर्ण रेत खनन आमतौर पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है और समाज को योग्य रीति से विकसित होने से रोकता है। इसके विपरीत, संधारणीय रेत खनन एक समृद्धि और सामाजिक सुरक्षा का स्रोत हो सकता है।
इस प्रकार, संधारणीय रेत खनन एक समृद्धि के स्रोत के रूप में कार्य कर सकता है, जो सामाजिक और आर्थिक लाभों के साथ पर्यावरणीय संरक्षण को भी सुनिश्चित करता है।
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