जातीय गठजोड़ धर्मनिरपेक्ष तथा राजनीतिक कारकों से उत्पन्न होते हैं न कि आदिम पहचान से। चर्चा कीजिये । (200 Words) [UPPSC 2022]
धर्मनिरपेक्षता के भारतीय रूप में सहिष्णुता, सम्मिलन, और बहुलता के तत्त्व धर्मनिरपेक्षता का भारतीय रूप: धर्मनिरपेक्षता का भारतीय दृष्टिकोण सहिष्णुता, सम्मिलन, और बहुलता के मूल तत्वों पर आधारित है, जो भारत की विविधता को स्वीकार करने और सभी धार्मिक मान्यताओं को समान मान्यता देने के सिद्धांतों पर जोर देRead more
धर्मनिरपेक्षता के भारतीय रूप में सहिष्णुता, सम्मिलन, और बहुलता के तत्त्व
धर्मनिरपेक्षता का भारतीय रूप:
धर्मनिरपेक्षता का भारतीय दृष्टिकोण सहिष्णुता, सम्मिलन, और बहुलता के मूल तत्वों पर आधारित है, जो भारत की विविधता को स्वीकार करने और सभी धार्मिक मान्यताओं को समान मान्यता देने के सिद्धांतों पर जोर देते हैं।
सहिष्णुता:
- धार्मिक सहिष्णुता: भारत में विभिन्न धर्मों के बीच सहिष्णुता की परंपरा रही है, जो धार्मिक सह-अस्तित्व को बढ़ावा देती है। मंगल पांडे से लेकर महात्मा गांधी तक, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम ने धार्मिक सहिष्णुता को प्रमुखता दी। हाल के वर्षों में, उदारीकरण और सुधार के दौर में भी यह सहिष्णुता जारी रही है, जैसे आयोध्या विवाद में समाधान की प्रक्रिया में विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों के बीच समझौता और संवाद।
- सामाजिक समरसता: भारत में विभिन्न धार्मिक समूहों और जातियों के बीच सामाजिक समरसता बनाए रखने के लिए कई प्रयास किए गए हैं। उदाहरण के लिए, गांधीजी की सविनय अवज्ञा आंदोलन में धार्मिक एकता और समानता को बढ़ावा देने के लिए विशेष ध्यान दिया गया।
सम्मिलन:
- संविधान में सम्मिलन: भारतीय संविधान ने धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत को अपनाया है, जो सभी धर्मों को समान मान्यता देने और राज्य को किसी भी धार्मिक विश्वास में हस्तक्षेप न करने का निर्देश देता है। धर्मनिरपेक्षता की अवधारणा संविधान की धारा 15 और 25 में स्पष्ट रूप से परिभाषित की गई है।
- सांस्कृतिक सम्मिलन: भारत में विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों के सम्मिलन की एक लंबी परंपरा रही है। कृष्ण जन्माष्टमी और ईद जैसे त्योहारों को विभिन्न धार्मिक समूह एक साथ मनाते हैं, जो सांस्कृतिक सम्मिलन को दर्शाता है।
बहुलता:
- धार्मिक बहुलता: भारत में विभिन्न धर्मों की बहुलता है, जिसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख, और ईसाई जैसे धर्म शामिल हैं। यह बहुलता भारतीय समाज की विविधता और सह-अस्तित्व को दर्शाती है।
- संस्कृतिक विविधता: भारतीय समाज में भाषाओं, जातियों, और संप्रदायों की बहुलता देखने को मिलती है। नार्थ-ईस्ट भारत के राज्य जैसे मणिपुर और मिज़ोरम विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक समूहों का घर हैं, जो भारतीय बहुलता को दर्शाते हैं।
निष्कर्ष:
धर्मनिरपेक्षता का भारतीय रूप सहिष्णुता, सम्मिलन, और बहुलता के सिद्धांतों पर आधारित है। ये तत्त्व भारतीय समाज की विविधता और एकता को बनाए रखने में सहायक हैं और धर्मनिरपेक्षता की अवधारणा को गहराई प्रदान करते हैं।
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जातीय गठजोड़: धर्मनिरपेक्ष तथा राजनीतिक कारकों से उत्पन्न प्रारंभ भारतीय राजनीति में जातीय गठजोड़ का सिद्धान्त है। कुछ लोगों का मानना है कि जातीय पहचान आदिम तथा अपरिवर्तनशील है, जबकि अन्य लोग मानते हैं कि जातीय गठजोड़ धर्मनिरपेक्ष तथा राजनीतिक कारकों से उत्पन्न होते हैं। इस चर्चा में हम देखेंगे कि जRead more
जातीय गठजोड़: धर्मनिरपेक्ष तथा राजनीतिक कारकों से उत्पन्न
प्रारंभ
भारतीय राजनीति में जातीय गठजोड़ का सिद्धान्त है। कुछ लोगों का मानना है कि जातीय पहचान आदिम तथा अपरिवर्तनशील है, जबकि अन्य लोग मानते हैं कि जातीय गठजोड़ धर्मनिरपेक्ष तथा राजनीतिक कारकों से उत्पन्न होते हैं। इस चर्चा में हम देखेंगे कि जातीय गठजोड़ धर्मनिरपेक्ष तथा राजनीतिक कारकों से उत्पन्न होते हैं, न कि आदिम पहचान से।
धर्मनिरपेक्ष तथा राजनीतिक कारक
आरक्षण तथा प्रतिनिधित्व: ब्रिटिश साम्राज्य की अवधि में जातियों के लिए आरक्षण तथा प्रतिनिधित्व की नीति ने जातिय आधारित राजनीति में प्रमुख भूमिका निभाई। यह नीति ने जातिय आधारित दलों और गठजोड़ों की स्थापना में सहायता की, जिनकी política पावर और लाभ प्राप्त करने में अधिक रुचि थी न कि आदिम पहचान से।
recent example
2019 लोक सभा चुनावों में कई राज्यों में जातीय गठजोड़ों की स्थापना देखी गई। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी ने समाजवादी पार्टी तथा राष्ट्रीय लोक दल के साथ गठजोड़ा बनाया। बिहार में राष्ट्रीय जनता दल ने कांग्रेस तथा अन्य दलों के साथ गठजोड़ा बनाया।
समाप्ति
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