न्यायिक सक्रियतावाद की व्याख्या कीजिये तथा भारत में कार्यपालिका एवं न्यायपालिका के पारस्परिक संबंधों पर इसके प्रभाव का मूल्यांकन कीजिये। (125 Words) [UPPSC 2020]
राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग अधिनियम, 2014 पर सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय: समालोचनात्मक परीक्षण राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) अधिनियम, 2014 का उद्देश्य भारत की उच्चतर न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यावसायिक बनाना था। अधिनियम के तहत एक आयोग गठित कियाRead more
राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग अधिनियम, 2014 पर सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय: समालोचनात्मक परीक्षण
राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) अधिनियम, 2014 का उद्देश्य भारत की उच्चतर न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यावसायिक बनाना था। अधिनियम के तहत एक आयोग गठित किया गया जिसमें प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, और विधायी प्रतिनिधि शामिल थे, जो न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए जिम्मेदार थे।
सर्वोच्च न्यायालय ने इस अधिनियम को असंवैधानिक घोषित कर दिया। न्यायालय ने तर्क किया कि NJAC अधिनियम न्यायपालिका की स्वतंत्रता और स्वायत्तता को कमजोर करता है। कोर्ट ने कहा कि आयोग में कार्यपालिका की अधिकतम भागीदारी न्यायपालिका के स्वतंत्र निर्णय लेने की प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर सकती है, जो संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है।
इस निर्णय ने न्यायपालिका की स्वायत्तता की रक्षा की और Collegium प्रणाली को बनाए रखा, जो न्यायाधीशों की नियुक्ति में पारदर्शिता और स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है। हालांकि, इस प्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर विवाद जारी है।
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न्यायिक सक्रियतावाद और भारत में कार्यपालिका एवं न्यायपालिका के पारस्परिक संबंधों पर इसका प्रभाव 1. न्यायिक सक्रियतावाद की व्याख्या: न्यायिक सक्रियतावाद वह न्यायिक दृष्टिकोण है जिसमें न्यायपालिका सामाजिक और संवैधानिक मुद्दों में सक्रिय रूप से हस्तक्षेप करती है। इसका उद्देश्य मूलभूत अधिकारों की रक्षाRead more
न्यायिक सक्रियतावाद और भारत में कार्यपालिका एवं न्यायपालिका के पारस्परिक संबंधों पर इसका प्रभाव
1. न्यायिक सक्रियतावाद की व्याख्या:
न्यायिक सक्रियतावाद वह न्यायिक दृष्टिकोण है जिसमें न्यायपालिका सामाजिक और संवैधानिक मुद्दों में सक्रिय रूप से हस्तक्षेप करती है। इसका उद्देश्य मूलभूत अधिकारों की रक्षा और संविधान की व्याख्या के माध्यम से सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना है।
2. भारत में प्रभाव:
निष्कर्ष:
See lessन्यायिक सक्रियतावाद ने कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच संतुलन को नया रूप दिया है, जिससे न्यायपालिका को सशक्त और सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिला है, और संविधानिक अधिकारों की रक्षा की जा रही है।