उत्तर लेखन का रोडमैप 1. परिचय सी.बी.आई. की भूमिका और महत्व को संक्षेप में प्रस्तुत करें। सामान्य सहमति की परिभाषा और इसके महत्व पर ध्यान दें। 2. सहमति वापस लेने का संदर्भ यह बताएं कि किन राज्यों ने सामान्य सहमति वापस ली और इसके कारण ...
Model Answer Introduction The withdrawal of general consent to the Central Bureau of Investigation (CBI) by certain state governments in India poses significant challenges to the spirit of cooperative federalism. Background on CBI and General Consent The CBI, established under the Delhi Special PoliRead more
Model Answer
Introduction
The withdrawal of general consent to the Central Bureau of Investigation (CBI) by certain state governments in India poses significant challenges to the spirit of cooperative federalism.
Background on CBI and General Consent
The CBI, established under the Delhi Special Police Establishment Act, 1946, is India’s premier investigative agency, tasked with tackling corruption and high-profile crimes. Traditionally, states have granted general consent to the CBI, allowing it to operate seamlessly within their jurisdictions. However, in recent years, several states have revoked this consent, citing concerns over the CBI’s alleged misuse for political vendetta.
Challenges to Cooperative Federalism
- Jurisdictional Overlap: The Constitution designates ‘Police’ and ‘Public Order’ as state subjects, granting states exclusive authority over these matters. The CBI’s operations, as a central agency, often conflict with state police functions, leading to jurisdictional disputes and undermining the federal structure.
- Impact on Investigations: The withdrawal of consent has resulted in significant delays in investigations. For instance, the CBI has been unable to probe over ₹21,000 crores worth of bank fraud cases due to pending requests for consent from various states. This not only hampers the agency’s effectiveness but also erodes public trust in the federal system.
- Political Tensions: The politicization of the CBI has exacerbated tensions between state and central governments, particularly when different political parties govern at these levels. This has led to accusations of the CBI being used as a tool for political gain, further straining cooperative federalism.
Conclusion
The ongoing withdrawal of general consent by states highlights a critical challenge to cooperative federalism in India. It is essential to address these issues through reforms that enhance the CBI’s independence while respecting state autonomy. Ensuring that the CBI operates free from political interference is vital for maintaining the integrity of federal governance in India.
See less
मॉडल उत्तर परिचय केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सी.बी.आई.) भारत की प्रमुख जांच एजेंसी है, जो भ्रष्टाचार और उच्च-स्तरीय अपराधों की जांच करती है। इसकी कार्यवाही के लिए राज्य सरकारों से सामान्य सहमति आवश्यक होती है। हाल ही में, नौ राज्यों ने सी.बी.आई. से यह सहमति वापस ले ली है, जिसका मुख्य कारण राजनीतिक हितोRead more
मॉडल उत्तर
परिचय
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सी.बी.आई.) भारत की प्रमुख जांच एजेंसी है, जो भ्रष्टाचार और उच्च-स्तरीय अपराधों की जांच करती है। इसकी कार्यवाही के लिए राज्य सरकारों से सामान्य सहमति आवश्यक होती है। हाल ही में, नौ राज्यों ने सी.बी.आई. से यह सहमति वापस ले ली है, जिसका मुख्य कारण राजनीतिक हितों के लिए सी.बी.आई. का उपयोग बताया गया है।
सहकारी संघवाद पर चुनौती
संविधान की सातवीं अनुसूची में ‘पुलिस’ और ‘लोक व्यवस्था’ राज्य विषय हैं, जिससे राज्यों को इन पर कानून बनाने का विशेषाधिकार प्राप्त है। सी.बी.आई. का केंद्रीय एजेंसी के रूप में कार्य करना इस अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन करता है और संघीय तनाव को बढ़ाता है।
सी.बी.आई. को पिछले तीन वर्षों में पांच राज्यों से सहमति न मिलने के कारण ₹21,000 करोड़ से अधिक के बैंक धोखाधड़ी मामलों की जांच शुरू करने में असमर्थता का सामना करना पड़ा है। इससे न केवल न्याय प्रक्रिया में देरी होती है, बल्कि जनता का विश्वास भी घटता है।
सी.बी.आई. पर राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों ने केंद्र-राज्य संबंधों को तनावग्रस्त किया है। उच्चतम न्यायालय के एक न्यायाधीश ने सी.बी.आई. को “पिंजरे का तोता” कहा था, जो राजनीतिक स्वार्थों के लिए काम करती है।
निष्कर्ष
राज्य सरकारों द्वारा सी.बी.आई. से सामान्य सहमति वापस लेना सहकारी संघवाद की भावना को कमजोर करता है। इसे ठीक करने के लिए आवश्यक है कि सी.बी.आई. की स्वतंत्रता को सुनिश्चित किया जाए और इसे राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रखा जाए। ऐसा करने से ही भारत में सहकारी संघवाद की भावना को पुनर्स्थापित किया जा सकेगा।
See less