उत्तर लेखन के लिए रोडमैप परिचय भारत-चीन संबंधों का संक्षिप्त परिचय। सहयोग, प्रतिस्पर्धा और टकराव की परिभाषा। ऐतिहासिक संदर्भ 1950 में राजनयिक संबंधों की स्थापना। पंचशील समझौते का महत्व। सहयोग के क्षेत्र आर्थिक संबंध: व्यापार के आंकड़े और आर्थिक जुड़ाव। संस्कृतिक समन्वय: सांस्कृतिक आदान-प्रदान और शैक्षणिक सहयोग। बहुपक्षीय सहयोग: BRICS, ...
मॉडल उत्तर प्रस्तावना भारत का संविधान एक संघीय ढांचे पर आधारित है, जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का वितरण किया गया है। अनुच्छेद 355 और 356 इस ढांचे के महत्वपूर्ण पहलू हैं, जो शासन की स्थिरता सुनिश्चित करने के साथ-साथ संघीयता की रक्षा में भी सहायक हैं। अनुच्छेद 355 और 356 का विवरण अनुच्छेदRead more
मॉडल उत्तर
प्रस्तावना
भारत का संविधान एक संघीय ढांचे पर आधारित है, जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का वितरण किया गया है। अनुच्छेद 355 और 356 इस ढांचे के महत्वपूर्ण पहलू हैं, जो शासन की स्थिरता सुनिश्चित करने के साथ-साथ संघीयता की रक्षा में भी सहायक हैं।
अनुच्छेद 355 और 356 का विवरण
अनुच्छेद 355 के अनुसार, संघ सरकार की जिम्मेदारी है कि वह प्रत्येक राज्य को बाहरी आक्रमण और आंतरिक अशांति से बचाए। वहीं, अनुच्छेद 356 राष्ट्रपति शासन का प्रावधान करता है, जो राष्ट्रपति को राज्य प्रशासन संभालने की अनुमति देता है जब राज्य सरकार संविधान के अनुसार कार्य नहीं करती।
अनुच्छेदों के निहितार्थ
इन अनुच्छेदों के माध्यम से केंद्र सरकार को राज्य प्रशासन में हस्तक्षेप करने की शक्ति मिलती है, जिससे राजनीतिक स्थिरता बनी रह सकती है। हालाँकि, इससे केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव भी उत्पन्न हो सकता है।
दुरुपयोग की चिंताएँ
राष्ट्रपति शासन का दुरुपयोग राजनीतिक कारणों से विपक्षी सरकारों को बर्खास्त करने के लिए किया गया है। जैसे, 1966-1977 के बीच 48 बार राष्ट्रपति शासन लगाया गया। ‘संवैधानिक मशीनरी की विफलता’ की अस्पष्ट परिभाषा भी केंद्र के दुरुपयोग को बढ़ावा देती है।
दुरुपयोग को रोकने के उपाय
दुरुपयोग को रोकने के लिए:
- संवैधानिक संशोधन: अनुच्छेद 356 में स्पष्टता लाना आवश्यक है।
- न्यायिक समीक्षा: न्यायपालिका को मजबूत करना और राष्ट्रपति शासन की सिफारिशों की न्यायिक समीक्षा होनी चाहिए।
- स्थानीय शासन को सुदृढ़ करना: विकेंद्रीकरण को बढ़ावा देकर केंद्र पर निर्भरता को कम किया जा सकता है।
आगे की राह
संविधान के अनुच्छेद 355 और 356 का उद्देश्य संघीयता को बनाए रखते हुए शासन की स्थिरता सुनिश्चित करना है। डॉ. बी.आर. अंबेडकर की आशा थी कि राष्ट्रपति शासन एक ‘मृत पत्र’ बनेगा, इसका प्रयोग केवल असाधारण स्थितियों में होना चाहिए। एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाकर ही हम संघीय संतुलन और स्थिरता को सुनिश्चित कर सकते हैं।
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भारत-चीन संबंधों में सहयोग, प्रतिस्पर्धा और टकराव की त्रैतीयक गतिशीलता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। एक ओर, दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग बढ़ा है, जहां 2022 में द्विपक्षीय व्यापार लगभग 125 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। दूसरी ओर, सीमा विवाद, खासकर लद्दाख में 2020 के गतिरोध के कारण टकराव की स्थिति भी बनी रही है। भारत-चीन के रिश्तों में सुरक्षा और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का पहलू भी महत्वपूर्ण है, जैसे कि दोनों देशों का सैन्य विकास और क्षेत्रीय प्रभाव का संघर्ष।
See lessभविष्य में, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में सुधार के लिए सहयोग के अवसर हो सकते हैं। लेकिन सीमा विवाद, क्षेत्रीय प्रभुत्व की लड़ाई और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रतिस्पर्धा, जैसे UNSC में भारत का स्थायी सदस्यता मुद्दा, मुख्य चुनौतियां हैं।
इसलिए, भारत-चीन संबंधों में संतुलन बनाए रखना एक जटिल कार्य है, जिसमें सहयोग और प्रतिस्पर्धा दोनों को ध्यान में रखना आवश्यक है।