भारत की सांविधानिक व्यवस्था में, संसद एवं उच्चतम न्यायालय के मध्य सर्वोच्चता के संघर्ष के संरचनात्मक एवं परिचालनात्मक पहलुओं का विवेचन कीजिए । (उत्तर सीमा: 100 शब्द, अंक: 10) [RPSC 2023]
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भारत की संवैधानिक व्यवस्था में संसद और उच्चतम न्यायालय के मध्य सर्वोच्चता का संघर्ष मुख्य रूप से विधायिका और न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र से संबंधित है। संसद कानून बनाने का अधिकार रखती है, जबकि उच्चतम न्यायालय संवैधानिक व्याख्या और न्यायिक समीक्षा का कार्य करता है। संसद की विधायिका शक्ति और न्यायालय की न्यायिक समीक्षा शक्ति के बीच संतुलन आवश्यक है। संसद संविधान संशोधन कर सकती है, परंतु न्यायालय इस संशोधन को संविधान की मूल संरचना के सिद्धांत के आधार पर रद्द कर सकता है। यह संघर्ष संरचनात्मक रूप से लोकतंत्र के संतुलन और शक्ति के विभाजन का प्रतीक है।
संरचनात्मक पहलू
परिचालनात्मक पहलू
इस प्रकार, संसद और उच्चतम न्यायालय के बीच सर्वोच्चता का संघर्ष एक महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया है।