देश में नवीकरणीय ऊर्जा के स्रोतों के संदर्भ में इनकी वर्तमान स्थिति और प्राप्त किए जाने वाले लक्ष्यों का विवरण दीजिए। प्रकाश उत्सर्जक डायोड (एल० ई० डी०) पर राष्ट्रीय कार्यक्रम के महत्त्व की विवेचना संक्षेप में कीजिए। (200 words) [UPSC ...
भारत का 2030 तक 50% नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य **1. लक्ष्य की संभावना: भारत की प्रतिबद्धता: भारत ने 2030 तक अपनी ऊर्जा आवश्यकता का 50% भाग नवीकरणीय ऊर्जा से प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जो पेरिस समझौते के तहत राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDCs) का हिस्सा है। वर्तमान प्रगति: 2024 की शुरुआत तक,Read more
भारत का 2030 तक 50% नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य
**1. लक्ष्य की संभावना:
- भारत की प्रतिबद्धता: भारत ने 2030 तक अपनी ऊर्जा आवश्यकता का 50% भाग नवीकरणीय ऊर्जा से प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जो पेरिस समझौते के तहत राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDCs) का हिस्सा है।
- वर्तमान प्रगति: 2024 की शुरुआत तक, भारत ने 25% कुल स्थापित ऊर्जा क्षमता को नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त किया है। सौर ऊर्जा की क्षमता मार्च 2023 तक 64.7 GW तक पहुंच चुकी है, और भारत सरकार इस क्षेत्र में लगातार वृद्धि पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
**2. हाल की पहलें:
- अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी: भारत अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) जैसी अंतर्राष्ट्रीय पहलों में भाग ले रहा है, जो नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए संसाधन और प्रौद्योगिकी जुटाने में मदद करता है।
- नीतिगत समर्थन: राष्ट्रीय सौर मिशन और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर जैसी नीतियाँ नवीकरणीय ऊर्जा की एकीकरण और ग्रिड स्थिरता को बढ़ावा देती हैं।
**3. जीवाश्म ईंधनों से सब्सिडी का स्थानांतरण:
- जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करना: जीवाश्म ईंधनों पर दी जाने वाली सब्सिडी को नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं पर पुनर्निवेश करने से नवीकरणीय ऊर्जा की लागत कम होगी और ये अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएँगी। वर्तमान में, जीवाश्म ईंधन की सब्सिडी बाजार कीमतों को विकृत करती है और स्वच्छ ऊर्जा में बदलाव को धीमा करती है।
- निवेश को प्रोत्साहन: सब्सिडी को नवीकरणीय ऊर्जा में स्थानांतरित करने से निजी क्षेत्र के निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और नवीकरणीय प्रौद्योगिकियों की लागत घटेगी। उदाहरण के लिए, भारत सरकार की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना ने सौर मॉड्यूल के लिए घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा है।
- इंफ्रास्ट्रक्चर का समर्थन: सब्सिडी का उपयोग बैटरी स्टोरेज और स्मार्ट ग्रिड्स जैसी आवश्यक अवसंरचना के विकास में किया जा सकता है, जो नवीकरणीय ऊर्जा के अस्थिरता को प्रबंधित करने के लिए आवश्यक हैं।
**4. चुनौतियाँ और समाधान:
- ग्रिड स्थिरता: उच्च नवीकरणीय ऊर्जा हिस्सेदारी को एकीकृत करने के लिए ग्रिड अवसंरचना में सुधार की आवश्यकता है। स्मार्ट ग्रिड्स और ऊर्जा भंडारण समाधानों में निवेश महत्वपूर्ण है।
- नीतिगत और नियामक ढांचा: स्थिर और सहायक नीतियाँ निवेश को आकर्षित करने और लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक हैं। नवीकरणीय ऊर्जा खरीद कर्तव्य (RPO) जैसे नियम सुनिश्चित करते हैं कि उपयोगिताएँ नवीकरणीय ऊर्जा की आवश्यकताओं को पूरा करें।
निष्कर्ष: भारत द्वारा 2030 तक 50% नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य प्राप्त करना संभव है यदि सही नीतियों, प्रौद्योगिकियों, और सब्सिडी की पुनरावृत्ति के माध्यम से समर्पित प्रयास जारी रहें। यह संक्रमण न केवल भारत के जलवायु लक्ष्यों को समर्थन देगा बल्कि सतत आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देगा।
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देश में नवीकरणीय ऊर्जा के स्रोतों की वर्तमान स्थिति और प्राप्त किए जाने वाले लक्ष्य भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है, और इसका उद्देश्य 2030 तक 500 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता प्राप्त करना है। वर्तमान में, भारत की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 176 गीगावॉट है, जिसमें प्रमुखRead more
देश में नवीकरणीय ऊर्जा के स्रोतों की वर्तमान स्थिति और प्राप्त किए जाने वाले लक्ष्य
भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है, और इसका उद्देश्य 2030 तक 500 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता प्राप्त करना है। वर्तमान में, भारत की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 176 गीगावॉट है, जिसमें प्रमुख स्रोत निम्नलिखित हैं:
भारत की सौर ऊर्जा क्षमता लगभग 61 गीगावॉट है। सौर पार्कों और सौर Rooftop परियोजनाओं ने इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। 2023 में, भारत ने 30,000 मेगावॉट की सौर ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य पूरा किया।
भारत की पवन ऊर्जा क्षमता लगभग 42 गीगावॉट है। तमिलनाडु और गुजरात जैसे राज्यों में बड़े पवन ऊर्जा पार्क स्थापित किए गए हैं।
बायोमास और छोटे जलविद्युत परियोजनाएँ मिलाकर लगभग 27 गीगावॉट की क्षमता है।
प्रकाश उत्सर्जक डायोड (LED) पर राष्ट्रीय कार्यक्रम का महत्त्व
प्रकाश उत्सर्जक डायोड (LED) पर राष्ट्रीय कार्यक्रम ने ऊर्जा दक्षता में क्रांति ला दी है। इसके महत्त्व को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:
LED बल्ब पारंपरिक इन्कैंडसेंट बल्बों की तुलना में 80% तक अधिक ऊर्जा बचाते हैं। 2019 में, भारत ने लगभग 36 करोड़ LED बल्ब वितरित किए, जिससे बिजली की बचत में योगदान मिला।
LED बल्ब की लंबी उम्र और कम ऊर्जा खपत से लंबे समय तक लागत में कमी आई है। यह गरीब और ग्रामीण इलाकों में ऊर्जा खर्च को कम करने में मदद करता है।
LEDs की कम ऊर्जा खपत और कम कार्बन उत्सर्जन से पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है, जिससे भारत की जलवायु लक्ष्यों की दिशा में प्रगति हुई है।
निष्कर्ष
नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की प्रगति और LED पर राष्ट्रीय कार्यक्रम दोनों ही ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। ये उपाय भारत को सतत विकास की ओर अग्रसर करने में सहायक हैं।
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