“विभिन प्रतियोगी क्षेत्रों और साझेदारों के मध्य नीतिगत बिरोधाभासों के परिणामस्वरूप पर्यावरण के संरक्षण तथा उसके निम्नीकरण की रोकथाम’ अपर्याप्त रही है।” सुसंगत उदाहरणों सहित टिप्पणी कीजिए। (150 words) [UPSC 2018]
गति-शक्ति योजना के संयोजकता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार और निजी क्षेत्र के मध्य सतर्क समन्वय अत्यंत आवश्यक है। इस योजना के तहत, सरकार की भूमिका परियोजनाओं के लिए नीतिगत दिशा-निर्देश प्रदान करना, आवश्यक अनुमतियों की प्रक्रिया को सरल बनाना और बुनियादी ढांचे का समन्वय सुनिश्चित करना है। निजीRead more
गति-शक्ति योजना के संयोजकता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार और निजी क्षेत्र के मध्य सतर्क समन्वय अत्यंत आवश्यक है। इस योजना के तहत, सरकार की भूमिका परियोजनाओं के लिए नीतिगत दिशा-निर्देश प्रदान करना, आवश्यक अनुमतियों की प्रक्रिया को सरल बनाना और बुनियादी ढांचे का समन्वय सुनिश्चित करना है।
निजी क्षेत्र निवेश, तकनीकी नवाचार और कार्यान्वयन में विशेषज्ञता प्रदान करता है। इनके बीच सटीक समन्वय से परियोजनाओं का तेजी से निष्पादन होता है, लागत में कमी आती है, और संसाधनों का कुशल उपयोग होता है।
सतर्क समन्वय के माध्यम से सरकारी योजनाओं और निजी पहलों को बेहतर ढंग से समन्वित किया जा सकता है, जिससे अंततः सुगम और प्रभावी संपर्कता का निर्माण होगा। इस प्रकार, दोनों क्षेत्रों की भूमिका एक साथ काम करके ही गति-शक्ति योजना के उद्देश्य को पूरा किया जा सकता है।
See less
नीतिगत विरोधाभासों का पर्यावरण संरक्षण पर प्रभाव 1. उद्योग और पर्यावरण संरक्षण: विभिन्न प्रतियोगी क्षेत्रों के बीच नीतिगत विरोधाभासों के परिणामस्वरूप पर्यावरण संरक्षण में कमी आई है। उदाहरण के तौर पर, भारत में खनन और औद्योगिकीकरण की नीतियां अक्सर पर्यावरण नियमों के साथ टकराती हैं। मणिपुर में खनन परियRead more
नीतिगत विरोधाभासों का पर्यावरण संरक्षण पर प्रभाव
1. उद्योग और पर्यावरण संरक्षण: विभिन्न प्रतियोगी क्षेत्रों के बीच नीतिगत विरोधाभासों के परिणामस्वरूप पर्यावरण संरक्षण में कमी आई है। उदाहरण के तौर पर, भारत में खनन और औद्योगिकीकरण की नीतियां अक्सर पर्यावरण नियमों के साथ टकराती हैं। मणिपुर में खनन परियोजनाओं ने जलवायु परिवर्तन और स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।
2. कृषि और जलवायु परिवर्तन: कृषि नीतियां और जलवायु संरक्षण के बीच असंगति के कारण जलवायु परिवर्तन पर प्रभाव पड़ा है। पंजाब और हरियाणा में अत्यधिक फसल अवशेष जलाना नीतिगत विरोधाभास का परिणाम है, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ा और पर्यावरणीय गुणवत्ता पर असर पड़ा।
3. शहरीकरण और हरित क्षेत्रों: शहरीकरण की नीतियों और हरित क्षेत्रों के संरक्षण के बीच विरोधाभास भी पर्यावरणीय नुकसान का कारण बना है। दिल्ली में मेट्रो परियोजनाओं और हरित पट्टों के बीच की नीति असंगति ने वृक्षारोपण और वायु गुणवत्ता को प्रभावित किया।
ये उदाहरण दर्शाते हैं कि नीतिगत विरोधाभासों के कारण पर्यावरण संरक्षण और उसके निम्नीकरण की दिशा में प्रभावी कदम उठाने में चुनौतियां उत्पन्न होती हैं।
See less