1960 के दशक में शुद्ध खाद्य आयातक से, भारत विश्व में एक शुद्ध खाद्य निर्यातक के रूप में उभरा। कारण दीजिए। (250 words) [UPSC 2023]
दलहन की कृषि के लाभ: 2016 का अंतर्राष्ट्रीय दलहन वर्ष पोषण संबंधी लाभ दलहन पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, जैसे कि प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और खनिज। ये पोषण से भरपूर विकल्प प्रदान करते हैं, जो विशेष रूप से विकासशील देशों में कुपोषण को कम करने में सहायक होते हैं। मिट्टी की सेहत दलहन नाइट्रोजन-फिक्सिंगRead more
दलहन की कृषि के लाभ: 2016 का अंतर्राष्ट्रीय दलहन वर्ष
पोषण संबंधी लाभ
दलहन पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, जैसे कि प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और खनिज। ये पोषण से भरपूर विकल्प प्रदान करते हैं, जो विशेष रूप से विकासशील देशों में कुपोषण को कम करने में सहायक होते हैं।
मिट्टी की सेहत
दलहन नाइट्रोजन-फिक्सिंग फसलें होती हैं, जो मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाकर उसकी उर्वरता में सुधार करती हैं। इससे रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम होती है और मिट्टी की सेहत बनी रहती है।
जलवायु अनुकूलता
दलहन कम जल की आवश्यकता वाले पौधे होते हैं और विविध जलवायु परिस्थितियों में उग सकते हैं, जिससे जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूलन में मदद मिलती है।
आर्थिक लाभ
दलहन की खेती कृषक की आय को विविधता प्रदान करती है और एक महत्वपूर्ण निर्यात वस्तु के रूप में लाभकारी होती है। उदाहरण के तौर पर, भारत, जो दलहन का प्रमुख उत्पादक और उपभोक्ता है, दलहन के निर्यात से आर्थिक लाभ प्राप्त करता है।
इन लाभों के कारण, संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2016 को अंतर्राष्ट्रीय दलहन वर्ष घोषित किया, जिससे दलहन की महत्वपूर्ण भूमिका को वैश्विक खाद्य सुरक्षा और सतत कृषि में उजागर किया जा सके।
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1960 के दशक में शुद्ध खाद्य आयातक से भारत के विश्व में एक शुद्ध खाद्य निर्यातक के रूप में उभरने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
इन कारणों के परिणामस्वरूप, भारत ने खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त की और वैश्विक खाद्य बाजार में एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया।
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