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दलहन की कृषि के लाभों का उल्लेख कीजिए जिसके कारण संयुक्त राष्ट्र के द्वारा वर्ष 2016 को अन्तर्राष्ट्रीय दलहन वर्ष घोषित किया गया था । (150 words) [UPSC 2017]
दलहन की कृषि के लाभ: 2016 का अंतर्राष्ट्रीय दलहन वर्ष पोषण संबंधी लाभ दलहन पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, जैसे कि प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और खनिज। ये पोषण से भरपूर विकल्प प्रदान करते हैं, जो विशेष रूप से विकासशील देशों में कुपोषण को कम करने में सहायक होते हैं। मिट्टी की सेहत दलहन नाइट्रोजन-फिक्सिंगRead more
दलहन की कृषि के लाभ: 2016 का अंतर्राष्ट्रीय दलहन वर्ष
पोषण संबंधी लाभ
दलहन पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, जैसे कि प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और खनिज। ये पोषण से भरपूर विकल्प प्रदान करते हैं, जो विशेष रूप से विकासशील देशों में कुपोषण को कम करने में सहायक होते हैं।
मिट्टी की सेहत
दलहन नाइट्रोजन-फिक्सिंग फसलें होती हैं, जो मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाकर उसकी उर्वरता में सुधार करती हैं। इससे रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम होती है और मिट्टी की सेहत बनी रहती है।
जलवायु अनुकूलता
दलहन कम जल की आवश्यकता वाले पौधे होते हैं और विविध जलवायु परिस्थितियों में उग सकते हैं, जिससे जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूलन में मदद मिलती है।
आर्थिक लाभ
दलहन की खेती कृषक की आय को विविधता प्रदान करती है और एक महत्वपूर्ण निर्यात वस्तु के रूप में लाभकारी होती है। उदाहरण के तौर पर, भारत, जो दलहन का प्रमुख उत्पादक और उपभोक्ता है, दलहन के निर्यात से आर्थिक लाभ प्राप्त करता है।
इन लाभों के कारण, संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2016 को अंतर्राष्ट्रीय दलहन वर्ष घोषित किया, जिससे दलहन की महत्वपूर्ण भूमिका को वैश्विक खाद्य सुरक्षा और सतत कृषि में उजागर किया जा सके।
See less1960 के दशक में शुद्ध खाद्य आयातक से, भारत विश्व में एक शुद्ध खाद्य निर्यातक के रूप में उभरा। कारण दीजिए। (250 words) [UPSC 2023]
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1960 के दशक में शुद्ध खाद्य आयातक से भारत के विश्व में एक शुद्ध खाद्य निर्यातक के रूप में उभरने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
इन कारणों के परिणामस्वरूप, भारत ने खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त की और वैश्विक खाद्य बाजार में एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया।
See lessउत्तर भारत में फसल अवशेष और पराली दहन की प्रथा से उत्पन्न होने वाले वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने हेतु समग्र समाधान विकसित करने की आवश्यकता है। चर्चा कीजिए। (250 शब्दों में उत्तर दीजिए)
उत्तर भारत में फसल अवशेष और पराली दहन की प्रथा वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या उत्पन्न कर रही है, जो स्वास्थ्य और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। इस समस्या का समग्र समाधान विकसित करने के लिए विभिन्न उपायों की आवश्यकता है। पहला, किसानों को पराली के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी है। सरकार कोRead more
उत्तर भारत में फसल अवशेष और पराली दहन की प्रथा वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या उत्पन्न कर रही है, जो स्वास्थ्य और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। इस समस्या का समग्र समाधान विकसित करने के लिए विभिन्न उपायों की आवश्यकता है।
पहला, किसानों को पराली के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी है। सरकार को उन्हें सस्ते और प्रभावी उपकरण जैसे स्ट्रॉ चप्पल और बायो-चेंबर देने चाहिए। साथ ही, कृषि शोध संस्थानों को पराली के पुनर्चक्रण और उपयोग के नए तरीकों पर काम करना चाहिए, जैसे कि इसे बायोफ्यूल या कंपोस्ट में परिवर्तित करना।
दूसरा, प्रभावी निगरानी और नियंत्रण प्रणाली स्थापित करनी होगी। सरकारी संस्थाएं और स्थानीय प्राधिकरण को सुनिश्चित करना चाहिए कि पराली दहन की घटनाएं कम हों और नियमों का पालन हो।
तीसरा, किसानों को आर्थिक प्रोत्साहन प्रदान करने की आवश्यकता है ताकि वे पराली को सही तरीके से प्रबंधित कर सकें। इससे न केवल वायु प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि किसानों की आय भी बढ़ेगी।
अंततः, जनता को जागरूक करना भी महत्वपूर्ण है। वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य पर प्रभावों के बारे में जानकारी प्रदान करने से जनसंघर्ष और समाधान में सहयोग बढ़ेगा। इन उपायों को लागू करके वायु गुणवत्ता में सुधार और पर्यावरण की रक्षा की जा सकती है।
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