वर्तमान समय में महात्मा गाँधी के विचारों के महत्व पर प्रकाश डालिए। (150 words) [UPSC 2018]
सरदार वल्लभभाई पटेल, जिन्हें "लौह पुरुष" के रूप में जाना जाता है, का भारत की एकता में योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, पटेल ने भारतीय राज्य व्यवस्था को एकजुट करने और विभाजन के दौर में देश की अखंडता बनाए रखने के लिए अभूतपूर्व प्रयास किए। विभाजन और एकीकरण: 1947 में स्वतंत्रताRead more
सरदार वल्लभभाई पटेल, जिन्हें “लौह पुरुष” के रूप में जाना जाता है, का भारत की एकता में योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, पटेल ने भारतीय राज्य व्यवस्था को एकजुट करने और विभाजन के दौर में देश की अखंडता बनाए रखने के लिए अभूतपूर्व प्रयास किए।
विभाजन और एकीकरण: 1947 में स्वतंत्रता के बाद, भारत में 565 स्वतंत्र रियासतें थीं। पटेल ने अपनी राजनीतिक सूझबूझ और कूटनीति का उपयोग कर इन्हें भारतीय संघ में शामिल किया। उन्होंने रियासतों के शासकों से प्रभावी बातचीत की और उन्हें भारतीय संघ में शामिल होने के लिए राजी किया, जिससे एक सशक्त और एकीकृत भारत का निर्माण हुआ।
सैनिक और प्रशासनिक उपाय: पटेल ने भारतीय सेना और प्रशासन का उपयोग करके कई रियासतों को शांतिपूर्वक भारतीय संघ में लाने में मदद की, जैसे जम्मू-कश्मीर और हैदराबाद।
पटेल की नेतृत्व क्षमता और दृढ़ संकल्प ने एक सशक्त और एकीकृत भारत की नींव रखी, और उन्हें भारतीय एकता के वास्तुकार के रूप में मान्यता प्राप्त है।
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वर्तमान समय में महात्मा गांधी के विचारों के महत्व 1. नैतिक नेतृत्व: महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा (सत्याग्रह) पर जोर आज के राजनीतिक और सामाजिक परिप्रेक्ष्य में अत्यंत महत्वपूर्ण है। 'मी टू' आंदोलन जैसे वैश्विक आंदोलनों में सत्य और न्याय की मांग ने गांधी के सिद्धांतों को पुनर्जीवित किया है। 2. पर्यRead more
वर्तमान समय में महात्मा गांधी के विचारों के महत्व
1. नैतिक नेतृत्व: महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा (सत्याग्रह) पर जोर आज के राजनीतिक और सामाजिक परिप्रेक्ष्य में अत्यंत महत्वपूर्ण है। ‘मी टू’ आंदोलन जैसे वैश्विक आंदोलनों में सत्य और न्याय की मांग ने गांधी के सिद्धांतों को पुनर्जीवित किया है।
2. पर्यावरणीय स्थिरता: गांधी का साधारण जीवन और आत्मनिर्भरता का सिद्धांत वर्तमान पर्यावरणीय समस्याओं के संदर्भ में प्रासंगिक है। स्थानीय खाद्य आंदोलन और जिरो-वेस्ट जीवनशैली जैसी पहल गांधी के स्वदेशी विचारों को दर्शाती हैं।
3. सामाजिक न्याय: गांधी का सामाजिक असमानताओं और भेदभाव के खिलाफ संघर्ष आज के सामाजिक आंदोलनों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। एससी/एसटी अधिकार और लिंग समानता के लिए जारी संघर्ष उनके सिद्धांतों का अनुकरण करते हैं।
4. शिक्षा के माध्यम से सशक्तिकरण: गांधी का समग्र शिक्षा के प्रति दृष्टिकोण आज के शैक्षिक सुधारों में परिलक्षित होता है। हाल के सुधारों में मूल्य आधारित शिक्षा को प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जो गांधी के आदर्शों के साथ मेल खाता है।
सारांश में, गांधी के सिद्धांत आज की नैतिक प्रथाओं, पर्यावरणीय स्थिरता, सामाजिक न्याय और शिक्षा सुधारों में प्रासंगिक हैं।
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