प्रमुख व्यक्तित्वों में, सरदार वल्लभभाई पटेल का भारत की एकता में योगदान निर्विवाद है। चर्चा कीजिए।(150 शब्दों में उत्तर दीजिए)
महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ ठाकुर (टैगोर) की शिक्षा और राष्ट्रवाद के प्रति सोच में महत्वपूर्ण अंतर था: शिक्षा की दृष्टि: महात्मा गांधी: गांधीजी ने शिक्षा को आत्मनिर्भरता और चरित्र निर्माण के माध्यम के रूप में देखा। उन्होंने "नैतिक शिक्षा" पर जोर दिया और "नाथूराम विद्यालय" जैसे विद्यालयों में स्वदेशीRead more
महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ ठाकुर (टैगोर) की शिक्षा और राष्ट्रवाद के प्रति सोच में महत्वपूर्ण अंतर था:
- शिक्षा की दृष्टि:
- महात्मा गांधी: गांधीजी ने शिक्षा को आत्मनिर्भरता और चरित्र निर्माण के माध्यम के रूप में देखा। उन्होंने “नैतिक शिक्षा” पर जोर दिया और “नाथूराम विद्यालय” जैसे विद्यालयों में स्वदेशी पद्धतियों पर आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित किया। उनकी शिक्षा प्रणाली में ग्रामीण विकास और स्वदेशी तकनीकों का समावेश था।
- रवींद्रनाथ टैगोर: टैगोर ने शिक्षा को “स्वतंत्रता और सृजनात्मकता” का माध्यम माना। उन्होंने “शांति निकेतन” जैसे स्कूलों की स्थापना की, जहाँ वैश्विक दृष्टिकोण, कला, और संस्कृति को प्रमुखता दी गई। उनकी शिक्षा प्रणाली में पारंपरिक भारतीय ज्ञान के साथ पश्चिमी ज्ञान का था।
- राष्ट्रवाद की दृष्टि:
- महात्मा गांधी: गांधीजी ने “सत्याग्रह” और “अहिंसा” के माध्यम से राष्ट्रवादी आंदोलन को प्रोत्साहित किया। उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ जन आंदोलन और स्वराज की ओर ध्यान केंद्रित किया।
- रवींद्रनाथ टैगोर: टैगोर ने “राष्ट्रवाद” को एक “सांस्कृतिक और मानवतावादी दृष्टिकोण” से देखा। उन्होंने सामाजिक और सांस्कृतिक पुनर्निर्माण के माध्यम से स्वतंत्रता का समर्थन किया और अति-राष्ट्रवाद के खिलाफ चेतावनी दी।
इन दृष्टिकोणों ने भारत के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य को विविधतापूर्ण रूप से प्रभावित किया।
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सरदार वल्लभभाई पटेल, जिन्हें "लौह पुरुष" के रूप में जाना जाता है, का भारत की एकता में योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, पटेल ने भारतीय राज्य व्यवस्था को एकजुट करने और विभाजन के दौर में देश की अखंडता बनाए रखने के लिए अभूतपूर्व प्रयास किए। विभाजन और एकीकरण: 1947 में स्वतंत्रताRead more
सरदार वल्लभभाई पटेल, जिन्हें “लौह पुरुष” के रूप में जाना जाता है, का भारत की एकता में योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, पटेल ने भारतीय राज्य व्यवस्था को एकजुट करने और विभाजन के दौर में देश की अखंडता बनाए रखने के लिए अभूतपूर्व प्रयास किए।
विभाजन और एकीकरण: 1947 में स्वतंत्रता के बाद, भारत में 565 स्वतंत्र रियासतें थीं। पटेल ने अपनी राजनीतिक सूझबूझ और कूटनीति का उपयोग कर इन्हें भारतीय संघ में शामिल किया। उन्होंने रियासतों के शासकों से प्रभावी बातचीत की और उन्हें भारतीय संघ में शामिल होने के लिए राजी किया, जिससे एक सशक्त और एकीकृत भारत का निर्माण हुआ।
सैनिक और प्रशासनिक उपाय: पटेल ने भारतीय सेना और प्रशासन का उपयोग करके कई रियासतों को शांतिपूर्वक भारतीय संघ में लाने में मदद की, जैसे जम्मू-कश्मीर और हैदराबाद।
पटेल की नेतृत्व क्षमता और दृढ़ संकल्प ने एक सशक्त और एकीकृत भारत की नींव रखी, और उन्हें भारतीय एकता के वास्तुकार के रूप में मान्यता प्राप्त है।
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