भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) 2023 में आदित्य-एल1 को लॉन्ब करने के लिए पूर्ण रूप से तैयार है। आदित्य- एल1, आदित्य-1 से कैसे अलग है? साथ ही, आदित्य-एल1 के वैज्ञानिक उद्देश्यों का उल्लेख कीजिए। (150 शब्दों में उत्तर दीजिए)
भू-चुंबकीय तूफान (Geomagnetic Storms) सूर्य की सतह पर होने वाली बड़े पैमाने की सौर गतिविधियों के परिणामस्वरूप उत्पन्न होते हैं, जैसे कि सौर तूफान और कोरोनल मास इजेक्शन (CME)। इन तूफानों के पृथ्वी पर प्रौद्योगिकी और अवसंरचना पर संभावित प्रभाव निम्नलिखित हैं: उपग्रहों पर प्रभाव: भू-चुंबकीय तूफान उपग्रRead more
भू-चुंबकीय तूफान (Geomagnetic Storms) सूर्य की सतह पर होने वाली बड़े पैमाने की सौर गतिविधियों के परिणामस्वरूप उत्पन्न होते हैं, जैसे कि सौर तूफान और कोरोनल मास इजेक्शन (CME)। इन तूफानों के पृथ्वी पर प्रौद्योगिकी और अवसंरचना पर संभावित प्रभाव निम्नलिखित हैं:
- उपग्रहों पर प्रभाव: भू-चुंबकीय तूफान उपग्रहों के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे सिग्नल ड्रॉप, संचार विफलता, और नेविगेशन प्रणाली में त्रुटियाँ हो सकती हैं।
- विद्युत ग्रिड: इन तूफानों से भू-चुंबकीय इंडक्शन के कारण विद्युत ग्रिड में अतिरिक्त करंट उत्पन्न हो सकता है, जिससे ट्रांसफार्मर और अन्य इलेक्ट्रिकल उपकरणों को नुकसान पहुंच सकता है।
- विज्ञान और संचार प्रणालियाँ: उच्च आवृत्ति वाली रेडियो तरंगों पर भी असर हो सकता है, जिससे मौसम पूर्वानुमान और हवाई ट्रैफिक नियंत्रण जैसी प्रणालियों में बाधा उत्पन्न हो सकती है।
इन प्रभावों से निपटने के लिए उपग्रह सुरक्षा, विद्युत ग्रिड की मजबूत डिजाइन, और आपातकालीन प्रोटोकॉल लागू किए जाते हैं।
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आदित्य-एल1 और आदित्य-1 में मुख्य अंतर उनकी मिशन प्राथमिकताओं और प्रौद्योगिकी में है। आदित्य-1, 2008 में प्रस्तावित किया गया था, परंतु तकनीकी और समय संबंधी मुद्दों के कारण इसे लॉन्च नहीं किया जा सका। आदित्य-एल1, इसकी उन्नत संस्करण है, जिसे 2023 में लॉन्च करने के लिए तैयार किया गया है। आदित्य-एल1 का मRead more
आदित्य-एल1 और आदित्य-1 में मुख्य अंतर उनकी मिशन प्राथमिकताओं और प्रौद्योगिकी में है। आदित्य-1, 2008 में प्रस्तावित किया गया था, परंतु तकनीकी और समय संबंधी मुद्दों के कारण इसे लॉन्च नहीं किया जा सका। आदित्य-एल1, इसकी उन्नत संस्करण है, जिसे 2023 में लॉन्च करने के लिए तैयार किया गया है।
आदित्य-एल1 का मुख्य उद्देश्य सूर्य की विभिन्न विशेषताओं का अध्ययन करना है। इसके वैज्ञानिक उद्देश्यों में शामिल हैं:
आदित्य-एल1 इन उद्देश्यों को पूरा करने के लिए सूर्य के एक विशेष कक्षा में स्थापित किया जाएगा।
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