अतिसूक्ष्म प्रौद्योगिकी (नैनोटेक्नोलॉजी) 21वीं शताब्दी की प्रमुख प्रौद्योगिकियों में से एक क्यों है? अतिसूक्ष्म विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर भारत सरकार के मिशन की प्रमुख विशेषताओं तथा देश के विकास के प्रक्रम में इसके प्रयोग के क्षेत्र का वर्णन कीजिए। (200 ...
भारत की अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी में उपलब्धियाँ 1. प्रमुख उपलब्धियाँ: सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र: भारत ने आंध्र प्रदेश में स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC) से अनेक सफल उपग्रह प्रक्षेपण किए हैं। चंद्रयान-1 (2008): भारत का पहला चंद्रमा मिशन, जिसने चंद्रमा की सतह पर पानी के संकेतों की खोज कीRead more
भारत की अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी में उपलब्धियाँ
1. प्रमुख उपलब्धियाँ:
- सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र: भारत ने आंध्र प्रदेश में स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC) से अनेक सफल उपग्रह प्रक्षेपण किए हैं।
- चंद्रयान-1 (2008): भारत का पहला चंद्रमा मिशन, जिसने चंद्रमा की सतह पर पानी के संकेतों की खोज की।
- मंगलयान (2013): भारत का पहला मंगल ग्रह मिशन, जो मंगल ग्रह की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित हुआ और विश्व के पहले प्रयास के रूप में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
- गगनयान (प्रस्तावित): भारतीय मानव अंतरिक्ष यात्रा मिशन, जो भविष्य में अंतरिक्ष में मानव को भेजेगा।
2. सामाजिक-आर्थिक विकास में सहायक:
- संचार और सूचना प्रौद्योगिकी: भारत के जीसैट उपग्रहों ने दूरसंचार और डिजिटल शिक्षा को सुदृढ़ किया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी सूचना और संचार तक पहुँच बढ़ी है।
- मौसम पूर्वानुमान: मेटसैट उपग्रहों के माध्यम से बेहतर मौसम पूर्वानुमान संभव हुआ है, जो कृषि और विपत्ति प्रबंधन में सहायक है।
- संसाधन प्रबंधन: रिसोर्स सैट उपग्रहों से प्राकृतिक संसाधनों की निगरानी और प्रबंधन में सहायता मिली है, जैसे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों की निगरानी।
इन उपलब्धियों ने भारत को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक प्रमुख शक्ति बनाया और सामाजिक-आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
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अतिसूक्ष्म प्रौद्योगिकी (नैनोटेक्नोलॉजी) का महत्व 1. 21वीं शताब्दी की प्रमुख प्रौद्योगिकी: अतिसूक्ष्म प्रौद्योगिकी, जिसमें 1 से 100 नैनोमीटर के बीच के आयामों पर सामग्री और उपकरणों की निर्मिति होती है, वास्तव में क्रांतिकारी है। इसके कारण, नैनोटेक्नोलॉजी में निम्नलिखित विशेषताएँ हैं: सटीकता और दक्षताRead more
अतिसूक्ष्म प्रौद्योगिकी (नैनोटेक्नोलॉजी) का महत्व
1. 21वीं शताब्दी की प्रमुख प्रौद्योगिकी:
अतिसूक्ष्म प्रौद्योगिकी, जिसमें 1 से 100 नैनोमीटर के बीच के आयामों पर सामग्री और उपकरणों की निर्मिति होती है, वास्तव में क्रांतिकारी है। इसके कारण, नैनोटेक्नोलॉजी में निम्नलिखित विशेषताएँ हैं:
2. भारत सरकार के मिशन की प्रमुख विशेषताएँ:
3. विकास में अनुप्रयोग:
इस प्रकार, नैनोटेक्नोलॉजी ने भारत के विकास को प्रौद्योगिकी और नवाचार के माध्यम से संजीवनी दी है।
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