‘आवश्यकता से कम नगदी, अत्यधिक राजनीति ने यूनेस्को को जीवन-रक्षण की स्थिति में पहुँचा दिया है ।’ अमेरिका द्वारा सदस्यता परित्याग करने और सांस्कृतिक संस्था पर ‘इजराइल विरोधी पूर्वाग्रह’ होने का दोषारोपण करने के प्रकाश में इस कथन की विवेचना ...
डब्ल्यू.टी.ओ. के लक्ष्य और दोहा दौर की वार्ताओं पर भारतीय परिप्रेक्ष्य परिचय विश्व व्यापार संगठन (WTO) का उद्देश्य वैश्वीकरण के युग में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को प्रबंधित और प्रोत्साहित करना है। हालांकि, दोहा दौर की वार्ताएँ विकसित और विकासशील देशों के बीच मतभेदों के कारण ठप हो गई हैं। डब्ल्यू.टी.ओ.Read more
डब्ल्यू.टी.ओ. के लक्ष्य और दोहा दौर की वार्ताओं पर भारतीय परिप्रेक्ष्य
परिचय विश्व व्यापार संगठन (WTO) का उद्देश्य वैश्वीकरण के युग में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को प्रबंधित और प्रोत्साहित करना है। हालांकि, दोहा दौर की वार्ताएँ विकसित और विकासशील देशों के बीच मतभेदों के कारण ठप हो गई हैं।
डब्ल्यू.टी.ओ. के लक्ष्य और उद्देश्य
- व्यापार मुक्तिकरण: डब्ल्यू.टी.ओ. का लक्ष्य वैश्विक व्यापार बाधाओं को कम करना और मुक्त व्यापार को बढ़ावा देना है।
- विवाद निवारण: यह संस्था सदस्य देशों के बीच व्यापार विवादों को सुलझाने का मंच प्रदान करती है।
- आर्थिक विकास: समान और निष्पक्ष व्यापार नीतियों को लागू करके वैश्विक आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करती है।
दोहा दौर की वार्ताओं में चुनौतियाँ
- विकसित और विकासशील देशों के बीच मतभेद:
- कृषि सब्सिडी: विकसित देशों द्वारा दी जाने वाली कृषि सब्सिडी पर विकासशील देशों का जोर है। भारत ने बार-बार यह मुद्दा उठाया है कि पश्चिमी देशों की सब्सिडी उनकी कृषि वस्तुओं की कीमत को वैश्विक बाजार में कृत्रिम रूप से कम करती है, जिससे भारतीय किसानों को नुकसान होता है।
- वाणिज्यिक पहुंच: विकासशील देशों के लिए बाजार पहुंच के मुद्दे पर भी विवाद है। भारत ने व्यापारिक पहुंच में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया है, विशेषकर निर्यात क्षेत्र में।
भारतीय परिप्रेक्ष्य
- भारत का दृष्टिकोण: भारत ने दोहा दौर की वार्ताओं में किसानों की सुरक्षा और घरेलू उद्योगों के संरक्षण पर जोर दिया है। भारत का मानना है कि व्यापार नीतियाँ विकासशील देशों के विकास के अनुकूल होनी चाहिए।
- हाल के प्रयास: भारत के कृषि और व्यापार नीतियाँ, जैसे प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और नैशनल एग्रीकल्चर मार्केट (eNAM), घरेलू किसानों की स्थिति को मजबूत करने में मदद कर रही हैं, जिससे वे वैश्विक व्यापार में बेहतर तरीके से प्रतिस्पर्धा कर सकें।
निष्कर्ष डब्ल्यू.टी.ओ. के व्यापक लक्ष्य अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को प्रबंधित और प्रोत्साहित करना है, लेकिन दोहा दौर की वार्ताओं में विकसित और विकासशील देशों के बीच मतभेदों के कारण प्रगति में रुकावट आई है। भारतीय दृष्टिकोण से, कृषि सब्सिडी और बाजार पहुंच जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हैं, और इसके समाधान से वैश्विक व्यापार प्रणाली में समावेशिता और समानता सुनिश्चित की जा सकती है।
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यूनेस्को को 'जीवन-रक्षण की स्थिति' में पहुँचा देने के कारण कई प्रमुख मुद्दे हैं: 1. नगदी की कमी: यूनेस्को को वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उसकी कार्यक्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। अमेरिका जैसे प्रमुख सदस्य देशों द्वारा वित्तीय योगदान में कमी, जैसे कि 2018 में अमेरिका द्वारा सदसRead more
यूनेस्को को ‘जीवन-रक्षण की स्थिति’ में पहुँचा देने के कारण कई प्रमुख मुद्दे हैं:
1. नगदी की कमी:
यूनेस्को को वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उसकी कार्यक्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। अमेरिका जैसे प्रमुख सदस्य देशों द्वारा वित्तीय योगदान में कमी, जैसे कि 2018 में अमेरिका द्वारा सदस्यता परित्याग, ने संगठन की वित्तीय स्थिरता को संकट में डाल दिया है।
2. राजनीतिक विवाद:
यूनेस्को पर ‘इजराइल विरोधी पूर्वाग्रह’ का आरोप, विशेषकर उस समय जब कई प्रस्ताव और निर्णय इजराइल के खिलाफ लिए गए, ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में विवाद पैदा किया है। अमेरिका और अन्य देशों के द्वारा इस पूर्वाग्रह के खिलाफ विरोध ने संगठन की राजनीतिक स्थिति को कमजोर कर दिया है।
3. सांस्कृतिक और शैक्षणिक मिशन पर प्रभाव:
इन समस्याओं के कारण, यूनेस्को अपने सांस्कृतिक और शैक्षणिक मिशनों को प्रभावी ढंग से लागू करने में असमर्थ हो रहा है, जिससे वैश्विक सांस्कृतिक संरक्षण और शिक्षा के प्रयास प्रभावित हो रहे हैं।
इन मुद्दों के समाधान के लिए, यूनेस्को को वित्तीय स्थिरता और राजनीतिक पूर्वाग्रहों को संबोधित करने की आवश्यकता है ताकि वह अपने लक्ष्यों को पूरा कर सके और वैश्विक सांस्कृतिक साझेदारी में योगदान दे सके।
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