प्रश्न का उत्तर अधिकतम 10 शब्दों में दीजिए। यह प्रश्न 02 अंक का है। [MPPSC 2023] केन्द्रीय सतर्कता आयोग का गठन किस समिति की अनुशंसा पर किया गया था?
केन्द्रीय सूचना आयोग के प्रमुख उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही: केन्द्रीय सूचना आयोग (Central Information Commission - CIC) का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक प्राधिकारियों के कामकाज में पारदर्शिता को बढ़ावा देना और जवाबदेही सुनिश्चित करना है जो 2005 के सूचना का अधिकार (Right to Information - RTI) अधिनियमRead more
केन्द्रीय सूचना आयोग के प्रमुख उद्देश्य
- पारदर्शिता और जवाबदेही: केन्द्रीय सूचना आयोग (Central Information Commission – CIC) का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक प्राधिकारियों के कामकाज में पारदर्शिता को बढ़ावा देना और जवाबदेही सुनिश्चित करना है जो 2005 के सूचना का अधिकार (Right to Information – RTI) अधिनियम के तहत होता है।
- RTI अपीलों का निर्णय देना: CIC का जिम्मा है कि आरटीआई अपीलों और शिकायतों पर निर्णय देना, जो केंद्रीय सरकार के विभागों और सार्वजनिक प्राधिकारियों के खिलाफ दी गई जानकारी को अस्वीकार करने या पर्याप्त रूप से प्रदान न करने की स्थिति में फाइल की जाती है।
- RTI जागरूकता को बढ़ावा देना: एक और मुख्य उद्देश्य है RTI अधिनियम के बारे में जागरूकता बढ़ाना और नागरिकों को सार्वजनिक प्राधिकारियों से जानकारी प्राप्त करने के अधिकार का प्रयोग करने में सशक्त करना।
- RTI का कार्यान्वयन मॉनिटर करना: CIC सार्वजनिक प्राधिकारियों द्वारा आरटीआई अधिनियम के कार्यान्वयन की मॉनिटरिंग करता है और इसके प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करता है।
हाल के उदाहरण
- लैंडमार्क निर्णय: CIC ने कई लैंडमार्क निर्णय दिए हैं जिसमें सार्वजनिक हित में जानकारी जारी करने के लिए सरकारी विभाग को निर्देशित किया गया। एक हाल ही में मामले में, CIC ने एक परियोजना के बारे में सार्वजनिक सुरक्षा को प्रभावित करने वाली जानकारी को खुलासा करने के लिए सरकारी विभाग को निर्देशित किया।
- प्रोएक्टिव डिस्क्लोजर को प्रोत्साहित करना: CIC ने सक्रिय रूप से सार्वजनिक प्राधिकारियों द्वारा जानकारी का प्रोएक्टिव डिस्क्लोजर करने की प्रोत्साहना की है जिससे आरटीआई अनुप्रयोगों की संख्या कम हो। यह पारदर्शिता को बढ़ावा देने और आयोग पर दबाव कम करने में मदद करता है।
- बैकलॉग्स का समाधान करना: हाल के समय में, CIC ने पेंडिंग आरटीआई अपीलों और शिकायतों के बैकलॉग का समाधान करने पर ध्यान केंद्रित किया है ताकि मामलों को समय पर निपटाया जा सके और नागरिकों के जानकारी का हक सुनिश्चित किया जा सके।
इन मुख्य उद्देश्यों को पूरा करके, केन्द्रीय सूचना आयोग भारत की शासन प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और सूचना के अधिकार को उचित रूप से उन्नत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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केन्द्रीय सतर्कता आयोग का गठन: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और समिति की अनुशंसा केन्द्रीय सतर्कता आयोग का गठन केन्द्रीय सतर्कता आयोग (Central Vigilance Commission - CVC) भारत सरकार का एक प्रमुख संस्थान है, जिसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं में भ्रष्टाचार की निगरानी और रोकथाम करना है। यह आयोग सरकारी कर्मचारियों औरRead more
केन्द्रीय सतर्कता आयोग का गठन: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और समिति की अनुशंसा
केन्द्रीय सतर्कता आयोग का गठन
केन्द्रीय सतर्कता आयोग (Central Vigilance Commission – CVC) भारत सरकार का एक प्रमुख संस्थान है, जिसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं में भ्रष्टाचार की निगरानी और रोकथाम करना है। यह आयोग सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के कार्यों की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है।
गठन की अनुशंसा
केन्द्रीय सतर्कता आयोग का गठन सत्य नारायण समिति की अनुशंसा पर किया गया था। सत्य नारायण समिति, जिसे 1963 में सत्य नारायण रेddy द्वारा अध्यक्षता में गठित किया गया था, ने भारत में भ्रष्टाचार की समस्या को गंभीरता से लिया और इसके समाधान के लिए ठोस उपाय सुझाए। समिति ने एक स्वतंत्र संस्था की आवश्यकता की बात की जो सरकारी क्षेत्र में भ्रष्टाचार पर निगरानी रख सके और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए प्रभावी उपाय कर सके।
सत्य नारायण समिति की अनुशंसाएँ
वर्तमान स्थिति और उदाहरण
निष्कर्ष
केन्द्रीय सतर्कता आयोग का गठन सत्य नारायण समिति की अनुशंसा पर किया गया था, जिसने सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ एक प्रभावी निगरानी तंत्र स्थापित करने की सिफारिश की थी। आयोग की स्थापना के बाद से, यह भ्रष्टाचार की रोकथाम और सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सत्य नारायण समिति की अनुशंसाएँ आज भी भ्रष्टाचार विरोधी प्रयासों में महत्वपूर्ण मार्गदर्शक सिद्ध होती हैं।
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