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भ्रष्टाचार की पारिभाषिक जटिलता: विवेचना परिचय भ्रष्टाचार एक जटिल और बहुपरकारी समस्या है, जिसकी पारिभाषिक जटिलता विभिन्न संदर्भों और प्रकारों के आधार पर उत्पन्न होती है। इस जटिलता को समझना आवश्यक है ताकि प्रभावी रूप से भ्रष्टाचार का निवारण किया जा सके। 1. परिभाषाओं की विविधता संदर्भानुसार भिन्नता: भ्Read more
भ्रष्टाचार की पारिभाषिक जटिलता: विवेचना
परिचय
भ्रष्टाचार एक जटिल और बहुपरकारी समस्या है, जिसकी पारिभाषिक जटिलता विभिन्न संदर्भों और प्रकारों के आधार पर उत्पन्न होती है। इस जटिलता को समझना आवश्यक है ताकि प्रभावी रूप से भ्रष्टाचार का निवारण किया जा सके।
1. परिभाषाओं की विविधता
- संदर्भानुसार भिन्नता: भ्रष्टाचार की परिभाषाएँ विभिन्न देशों और संस्कृतियों में भिन्न हो सकती हैं, जो स्थानीय मानदंडों और कानूनी ढांचों को दर्शाती हैं।
- हाल का उदाहरण: संयुक्त राष्ट्र भ्रष्टाचार विरोधी कन्वेंशन (UNCAC) भ्रष्टाचार की एक व्यापक परिभाषा प्रदान करता है, लेकिन सदस्य देशों में इसके लागू करने के तरीके में भिन्नता देखी जाती है। उदाहरण के लिए, भारत और चीन में भ्रष्टाचार के खिलाफ कानूनी ढांचे और उनके कार्यान्वयन में अंतर है।
2. भ्रष्टाचार के विभिन्न रूप
- विविध प्रकटियाँ: भ्रष्टाचार विभिन्न रूपों में प्रकट होता है, जैसे कि रिश्वतखोरी, धन की हेराफेरी, रिश्तेदारी और पक्षपात, और धोखाधड़ी। प्रत्येक रूप की विशिष्ट विशेषताएँ और प्रभाव होते हैं।
- हाल का उदाहरण: दिल्ली में रिश्वतखोरी का मामला (2024) जिसमें ठेकेदारों को रिश्वत देने के लिए मजबूर किया गया, और उत्तर प्रदेश में NRHM धन की हेराफेरी (2024) ने भ्रष्टाचार के विभिन्न रूपों की जटिलता को उजागर किया।
3. कानूनी और नैतिक दृष्टिकोण
- कानूनी परिभाषाएँ बनाम नैतिक दृष्टिकोण: भ्रष्टाचार को कानूनी दृष्टिकोण से परिभाषित किया जाता है, लेकिन नैतिक दृष्टिकोण भी महत्वपूर्ण होता है। कानूनी रूप से भ्रष्टाचार मान्यता प्राप्त गतिविधियाँ नैतिक दृष्टिकोण से भिन्न हो सकती हैं।
- हाल का उदाहरण: पानामा पेपर्स लीक (2016) ने दिखाया कि जबकि कुछ गतिविधियाँ कानूनी रूप से वैध थीं, वे नैतिक रूप से संदिग्ध थीं, जो कानूनी और नैतिक मानकों के बीच अंतर को दर्शाता है।
4. वैश्वीकरण का प्रभाव
- अंतर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार: वैश्वीकरण ने भ्रष्टाचार को नए आयाम दिए हैं, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय रिश्वतखोरी और धन शोधन शामिल हैं। इन गतिविधियों की जटिलता पारंपरिक परिभाषाओं और लागू करने की प्रक्रियाओं को चुनौती देती है।
- हाल का उदाहरण: 1MDB घोटाला (2015) ने दिखाया कि कैसे भ्रष्टाचार के जटिल वित्तीय लेन-देन और विभिन्न देशों में फैले हुए मुद्दे पारंपरिक परिभाषाओं को चुनौती देते हैं।
5. समय के साथ परिवर्तन
- परिभाषाओं का विकास: भ्रष्टाचार की परिभाषाएँ समय के साथ बदलती रहती हैं, क्योंकि सामाजिक मानदंड और कानूनी ढांचे में परिवर्तन होते हैं। जो पहले स्वीकार्य था, वह अब भ्रष्टाचार के रूप में मान्यता प्राप्त हो सकता है।
- हाल का उदाहरण: #MeToo आंदोलन ने यौन उत्पीड़न और शोषण को भ्रष्टाचार के रूप में मान्यता दी, जिसे पहले भ्रष्टाचार की परिभाषा में शामिल नहीं किया गया था, लेकिन अब इसे अधिक मान्यता प्राप्त है।
निष्कर्ष
भ्रष्टाचार की पारिभाषिक जटिलता विभिन्न सांस्कृतिक और कानूनी संदर्भों, विभिन्न रूपों, कानूनी और नैतिक दृष्टिकोण, वैश्वीकरण के प्रभाव और समय के साथ परिभाषाओं के विकास से उत्पन्न होती है। हाल के उदाहरण इन जटिलताओं को स्पष्ट करते हैं और भ्रष्टाचार के प्रभावी निवारण के लिए व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।
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