“बहुधार्मिक व बहुजातीय समाज के रूप में भारत की विविध प्रकृति, पड़ोस में दिख रहे अतिवाद के संधात के प्रति निरापद नहीं है।” ऐसे बातावरण के प्रतिकार के लिए अपनाए जाने वाली रणनीतियों के साथ विवेचना कीजिए। (200 words) [UPSC ...
आंतरिक सुरक्षा के प्रति खतरे के रूप में भ्रष्टाचार 1. प्रशासनिक अक्षमता: भ्रष्टाचार कानून प्रवर्तन एजेंसियों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है। इससे सुरक्षा बलों और सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता कम होती है, जिससे आंतरिक सुरक्षा में कमी आती है। 2. संस्थानिक क्षति: भ्रष्टाचारRead more
आंतरिक सुरक्षा के प्रति खतरे के रूप में भ्रष्टाचार
1. प्रशासनिक अक्षमता: भ्रष्टाचार कानून प्रवर्तन एजेंसियों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है। इससे सुरक्षा बलों और सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता कम होती है, जिससे आंतरिक सुरक्षा में कमी आती है।
2. संस्थानिक क्षति: भ्रष्टाचार संस्थानों की विश्वसनीयता और अधिकारी की ईमानदारी को कमजोर करता है। इससे मामलों की रिपोर्टिंग और जांच में बाधाएँ उत्पन्न होती हैं।
3. आतंकवाद और अपराध: भ्रष्टाचार आतंकवादी और आपराधिक समूहों को वित्तीय और प्रशासनिक समर्थन प्रदान करता है। यह संविधानिक और कानूनी ढांचे को कमजोर करता है।
उदाहरण: आतंकवादी वित्तपोषण के मामलों में भ्रष्टाचार की भूमिका, जैसे पैसे की तस्करी और वेतन घोटाले, जो आतंकवादी गतिविधियों को प्रोत्साहित करते हैं।
निष्कर्ष: भ्रष्टाचार आंतरिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है, क्योंकि यह प्रशासनिक अक्षमता, संस्थानिक क्षति और आतंकवाद को बढ़ावा देने का काम करता है। इससे निपटने के लिए कठोर नीतियाँ और सुधारात्मक उपाय आवश्यक हैं।
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परिचय: भारत की बहुधार्मिक और बहुजातीय प्रकृति उसे पड़ोसी देशों में दिखाई दे रहे अतिवाद के प्रभावों से बचा नहीं सकती। अतिवाद की यह प्रवृत्ति भारत के सामाजिक ताने-बाने और आंतरिक सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है। इस वातावरण के प्रतिकार के लिए कुछ प्रभावी रणनीतियाँ अपनाई जा सकती हैं। भारत पर अतिवाद का प्रRead more
परिचय: भारत की बहुधार्मिक और बहुजातीय प्रकृति उसे पड़ोसी देशों में दिखाई दे रहे अतिवाद के प्रभावों से बचा नहीं सकती। अतिवाद की यह प्रवृत्ति भारत के सामाजिक ताने-बाने और आंतरिक सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है। इस वातावरण के प्रतिकार के लिए कुछ प्रभावी रणनीतियाँ अपनाई जा सकती हैं।
भारत पर अतिवाद का प्रभाव:
अतिवाद के प्रतिकार के लिए रणनीतियाँ:
हाल के उदाहरण:
निष्कर्ष: भारत की विविध प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, पड़ोसी देशों में अतिवाद के प्रभावों को कम करने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। सुरक्षा उपाय, सामाजिक एकता, शिक्षा, कानूनी ढांचे, और सामुदायिक भागीदारी जैसे रणनीतियाँ भारत को इस चुनौती का सामना करने में सक्षम बना सकती हैं।
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