भारत में “एक राष्ट्र एक चुनाव” की अवधारणा की अपनी संभावनाएं एवं सीमाएं है, परीक्षण कीजिये। (200 Words) [UPPSC 2022]
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of the People Act, 1951) के तहत भ्रष्ट आचरण के दोषी व्यक्तियों को अयोग्य ठहराने का प्रावधान लोकतंत्र को स्वच्छ और पारदर्शी बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया है। हालांकि, वर्तमान में इस प्रक्रिया में कई जटिलताएँ और कानूनी बाधाएँ हैं, जो इसे प्रभावी ढंग से लागूRead more
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of the People Act, 1951) के तहत भ्रष्ट आचरण के दोषी व्यक्तियों को अयोग्य ठहराने का प्रावधान लोकतंत्र को स्वच्छ और पारदर्शी बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया है। हालांकि, वर्तमान में इस प्रक्रिया में कई जटिलताएँ और कानूनी बाधाएँ हैं, जो इसे प्रभावी ढंग से लागू करने में रुकावट पैदा करती हैं।
पहली समस्या यह है कि दोष सिद्ध होने में लंबा समय लग सकता है, जिससे दोषी व्यक्ति चुनाव लड़ सकते हैं और सार्वजनिक पद पर बने रह सकते हैं। दूसरी समस्या यह है कि कानून की जटिलताओं के कारण दोषी ठहराए गए व्यक्ति कानूनी अपीलों के माध्यम से अपनी अयोग्यता को चुनौती देकर इसे टाल सकते हैं।
इसलिए, इस प्रक्रिया के सरलीकरण की आवश्यकता है ताकि भ्रष्ट आचरण में संलिप्त व्यक्ति शीघ्रता से अयोग्य घोषित किए जा सकें। इसके लिए, समयबद्ध सुनवाई, त्वरित न्यायिक प्रक्रिया, और भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त प्रावधानों की आवश्यकता है। इससे न केवल लोकतंत्र की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि जनता का विश्वास भी बढ़ेगा।
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भारत में "एक राष्ट्र एक चुनाव" की अवधारणा की संभावनाएँ और सीमाएँ संभावनाएँ: वित्तीय लाभ: एक साथ चुनाव कराने से सरकार और जनता दोनों पर वित्तीय बोझ कम होगा। उदाहरण के लिए, 2024 लोकसभा चुनाव के लिए अनुमानित लागत ₹50,000 करोड़ के आस-पास है, जबकि एक साथ चुनाव से इन खर्चों में कमी आ सकती है। प्रशासनिक सुवRead more
भारत में “एक राष्ट्र एक चुनाव” की अवधारणा की संभावनाएँ और सीमाएँ
संभावनाएँ:
सीमाएँ:
निष्कर्ष: “एक राष्ट्र एक चुनाव” की अवधारणा वित्तीय और प्रशासनिक दृष्टिकोण से लाभकारी हो सकती है, लेकिन संविधानिक, कानूनी, और लॉजिस्टिक चुनौतियाँ इसे लागू करने में बाधा डालती हैं। सही ढंग से कार्यान्वित करने के लिए व्यापक विचार-विमर्श और योजना की आवश्यकता होगी।
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