भारत में बाढ़ों को सिंचाई के और सभी मौसम में अन्तर्देशीय नौसंचालन के एक धारणीय स्रोत में किस प्रकार परिवर्तित किया जा सकता है? (250 words) [UPSC 2017]
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1960 के दशक में शुद्ध खाद्य आयातक से भारत के विश्व में एक शुद्ध खाद्य निर्यातक के रूप में उभरने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
- हरित क्रांति: 1960 के दशक के अंत में, हरित क्रांति के अंतर्गत नई कृषि तकनीकों और उच्च उपज वाली किस्मों का परिचय हुआ। इससे भारत ने खाद्य उत्पादन में तेजी से वृद्धि की। विशेष रूप से, गेहूं और चावल की फसल में सुधार हुआ, जिससे खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हुई और अधिशेष उत्पादन हुआ।
- सिंचाई परियोजनाएँ: बड़े पैमाने पर सिंचाई परियोजनाओं का कार्यान्वयन, जैसे कि नहरों और जलाशयों का निर्माण, ने कृषि उत्पादन को बढ़ाया। इससे भूमि की अधिकतम उपयोगिता और वर्षा के आधार पर निर्भरता कम हुई, जिससे स्थिर और बढ़ी हुई फसलें सुनिश्चित हुईं।
- कृषि अनुसंधान और प्रौद्योगिकी: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और अन्य संस्थानों द्वारा कृषि अनुसंधान और विकास ने नई तकनीकों, उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग को बढ़ावा दिया। इससे उत्पादकता में सुधार हुआ और उत्पादन की लागत कम हुई।
- सरकारी नीतियाँ: भारतीय सरकार ने कृषि क्षेत्र में समर्थन मूल्य योजनाओं, सब्सिडी और क्रेडिट सुविधाओं के माध्यम से किसानों को प्रोत्साहित किया। इन नीतियों ने उत्पादन बढ़ाने में मदद की और किसानों को लाभकारी कीमतों पर फसल बेचने के लिए प्रेरित किया।
- उत्पादन की विविधता: भारत ने केवल खाद्यान्नों का उत्पादन नहीं बढ़ाया, बल्कि अन्य फसलों जैसे कि दालें, तेल बीज, और ताजे फल भी उगाए, जो निर्यात के लिए उपलब्ध थे।
- वैश्विक बाजार में प्रवेश: भारत ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों और वैश्विक बाजार में अपनी उपस्थिति को बढ़ावा दिया। इसके परिणामस्वरूप, भारत ने खाद्य उत्पादों के निर्यात में वृद्धि की और एक शुद्ध खाद्य निर्यातक के रूप में उभरा।
इन कारणों के परिणामस्वरूप, भारत ने खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त की और वैश्विक खाद्य बाजार में एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया।
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भारत में बाढ़ों को सिंचाई और सभी मौसम में अन्तर्देशीय नौसंचालन के एक धारणीय स्रोत में परिवर्तित करने के उपाय 1. बाढ़ जल संचयन और संग्रहण: बाढ़ों के पानी को सिंचाई के लिए उपयोगी संसाधन में बदलने के लिए जल संचयन और संग्रहण ढांचों में निवेश करना आवश्यक है। चेक डैम और पेरकोलेशन टैंक जैसे ढांचे बाढ़ के पRead more
भारत में बाढ़ों को सिंचाई और सभी मौसम में अन्तर्देशीय नौसंचालन के एक धारणीय स्रोत में परिवर्तित करने के उपाय
1. बाढ़ जल संचयन और संग्रहण:
बाढ़ों के पानी को सिंचाई के लिए उपयोगी संसाधन में बदलने के लिए जल संचयन और संग्रहण ढांचों में निवेश करना आवश्यक है। चेक डैम और पेरकोलेशन टैंक जैसे ढांचे बाढ़ के पानी को संग्रहीत कर सकते हैं और इसे भूमिगत जल पुनर्भरण के रूप में उपयोग कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में छोटे चेक डैम का उपयोग बाढ़ के पानी को संग्रहित करने के लिए किया जाता है, जिससे सिंचाई के लिए जल उपलब्धता में सुधार हुआ है।
2. बाढ़ नियंत्रण जलाशयों का निर्माण:
बाढ़ नियंत्रण जलाशयों और आर्टिफिशियल लेक्स का निर्माण बाढ़ के पानी को भविष्य में उपयोग के लिए संग्रहीत कर सकता है। नर्मदा डैम (गुजरात) इसका एक उदाहरण है, जो बाढ़ के पानी को संग्रहीत करके पूरे वर्ष सिंचाई के लिए एक स्थिर जल स्रोत प्रदान करता है।
3. बाढ़ क्षेत्रों का कृषि में उपयोग:
बाढ़ क्षेत्रों, जो पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, को कृषि योजनाओं में शामिल किया जा सकता है। इन क्षेत्रों में बाढ़-प्रतिरोधी फसलों और खेती की तकनीकों का उपयोग कर बाढ़ के पानी के पोषक तत्वों को कृषि उत्पादकता में बदला जा सकता है। उदाहरण के तौर पर, ब्रह्मपुत्र घाटी (असम) में बाढ़ के पानी से फसलों की उत्पादकता बढ़ी है।
4. अन्तर्देशीय नौसंचालन के लिए बाढ़ जल का उपयोग:
बाढ़ के पानी का अन्तर्देशीय नौसंचालन के लिए उपयोग में लाने के लिए नदी चैनलों और जलमार्गों का विकास किया जा सकता है। बाढ़ क्षेत्रों और नदी चैनलों को गहरा और बनाए रखा जा सकता है ताकि बाढ़ और बाद में नौसंचालन संभव हो सके। राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (गंगा) और राष्ट्रीय जलमार्ग-2 (ब्रह्मपुत्र) इसका उदाहरण हैं।
5. स्मार्ट बाढ़ प्रबंधन प्रणाली:
स्मार्ट बाढ़ प्रबंधन प्रणाली का उपयोग बाढ़ पूर्वानुमान और प्रबंधन के लिए किया जा सकता है। सैटेलाइट तकनीक और जीआईएस (भूगोलिक सूचना प्रणाली) बाढ़ घटनाओं की भविष्यवाणी करने और बाढ़ के पानी के उपयोग की योजना बनाने में सहायक हो सकते हैं।
6. सरकारी योजनाएँ और नीतियाँ:
राष्ट्रीय मिशन फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर (NMSA) और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) जैसी सरकारी योजनाएँ बाढ़ के पानी का उपयोग प्रभावी ढंग से करने के लिए अवसंरचना और प्रथाओं के विकास का समर्थन करती हैं।
निष्कर्ष:
See lessभारत में बाढ़ों को सिंचाई और अन्तर्देशीय नौसंचालन के लिए धारणीय संसाधन में बदलने के लिए प्रभावी योजना और अवसंरचना विकास की आवश्यकता है। बाढ़ जल संचयन, जलाशय निर्माण, बाढ़ क्षेत्रों का कृषि में उपयोग, और नौसंचालन परियोजनाओं में निवेश बाढ़ के पानी को लाभकारी बनाने में सहायक हो सकते हैं।