राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं? खाद्य सुरक्षा विधेयक ने भारत में भूख तथा कुपोषण को दूर करने में किस प्रकार सहायता की है ? (250 words) [UPSC 2021]
भारत में बंदरगाह संबंधी अवसंरचना के विकास को बाधित करने वाले मुद्दे: अवसंरचना की कमी: पुराने और असंगठित बंदरगाहों में पर्याप्त बुनियादी ढांचे की कमी है, जिससे संचालन और त्वरित लदान प्रक्रिया प्रभावित होती है। लॉजिस्टिक और परिवहन समस्याएँ: बंदरगाहों से अंतर्देशीय क्षेत्रों तक सामग्री का परिवहन अप्रभाRead more
भारत में बंदरगाह संबंधी अवसंरचना के विकास को बाधित करने वाले मुद्दे:
- अवसंरचना की कमी: पुराने और असंगठित बंदरगाहों में पर्याप्त बुनियादी ढांचे की कमी है, जिससे संचालन और त्वरित लदान प्रक्रिया प्रभावित होती है।
- लॉजिस्टिक और परिवहन समस्याएँ: बंदरगाहों से अंतर्देशीय क्षेत्रों तक सामग्री का परिवहन अप्रभावी और धीमा होता है, जिससे संपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होती है।
- प्रशासनिक और कानूनी बाधाएँ: जटिल नियम और अनुमति प्रक्रियाएँ कार्यक्षमता में बाधक बनती हैं।
- निधि की कमी: बंदरगाहों के आधुनिकीकरण और विस्तार के लिए पर्याप्त निवेश का अभाव होता है।
सरकार द्वारा किए गए हालिया उपाय:
- सागरमाला परियोजना: यह परियोजना बंदरगाहों के आधुनिकीकरण, कनेक्टिविटी में सुधार और लॉजिस्टिक को कुशल बनाने के लिए एक व्यापक पहल है। इसके तहत नई बंदरगाह सुविधाओं का निर्माण और मौजूदा सुविधाओं का उन्नयन किया जा रहा है।
- प्रधानमंत्री ग्रीन पोर्ट्स स्कीम: इस योजना के तहत पर्यावरणीय मानकों को लागू करके बंदरगाहों को हरित और टिकाऊ बनाया जा रहा है।
- डिजिटल प्लेटफार्म: Port Community Systems (PCS) और e-SANCHIT जैसे डिजिटल समाधान से प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और दक्षता में सुधार हुआ है।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP): बंदरगाहों के विकास के लिए सार्वजनिक-निजी साझेदारी के माध्यम से निवेश और प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान बढ़ाया गया है।
इन उपायों से भारत के बंदरगाहों की अवसंरचना में सुधार और संपूर्ण लॉजिस्टिक नेटवर्क की दक्षता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो रही है।
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राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की मुख्य विशेषताएँ 1. कवरेज और अधिकार: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013, का उद्देश्य लगभग 75% ग्रामीण जनसंख्या और 50% शहरी जनसंख्या को खाद्य सुरक्षा प्रदान करना है। अधिनियम पात्र घरों को प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलोग्राम सब्सिडी वाले खाद्य अनाज कीRead more
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की मुख्य विशेषताएँ
1. कवरेज और अधिकार: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013, का उद्देश्य लगभग 75% ग्रामीण जनसंख्या और 50% शहरी जनसंख्या को खाद्य सुरक्षा प्रदान करना है। अधिनियम पात्र घरों को प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलोग्राम सब्सिडी वाले खाद्य अनाज की आपूर्ति करता है, जिसमें चावल ₹3/kg, गेहूं ₹2/kg, और मोटे अनाज ₹1/kg की दर पर उपलब्ध हैं।
2. प्राथमिक और अंत्योदय अन्न योजना: यह अधिनियम दो श्रेणियों के लाभार्थियों को निर्दिष्ट करता है:
3. पोषण सहायता: अधिनियम गर्भवती महिलाओं, दूध पिलाने वाली माताओं और बच्चों को पोषण सहायता प्रदान करने की व्यवस्था करता है। मिड-डे मील योजना और एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) के तहत मुफ्त भोजन और पोषणयुक्त भोजन प्रदान किया जाता है।
4. शिकायत निवारण तंत्र: खाद्य वितरण और अधिकारों से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए राज्य खाद्य आयोग जैसे शिकायत निवारण तंत्र की स्थापना की गई है।
5. कानूनी अधिकार: यह अधिनियम खाद्य अधिकार को एक कानूनी अधिकार बनाता है, जिसे कानूनी ढांचे के माध्यम से लागू किया जा सकता है।
भूख और कुपोषण को दूर करने में खाद्य सुरक्षा विधेयक की सहायता
1. भूख में कमी: NFSA ने भूख को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। NFHS-5 के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि निम्न-आय वाले घरानों के लिए खाद्य सुरक्षा में सुधार हुआ है।
2. पोषण सुधार: मिड-डे मील योजना और ICDS के अंतर्गत पोषणयुक्त भोजन देने से बच्चों और महिलाओं के पोषण में सुधार हुआ है। हाल की रिपोर्टों के अनुसार, कुपोषण दरें कम हुई हैं।
3. खाद्य वितरण में सुधार: NFSA ने खाद्य वितरण तंत्र को सुव्यवस्थित किया है, जिससे अनाज की चोरी और गड़बड़ी कम हुई है। कई राज्यों में आधार आधारित बायोमैट्रिक सिस्टम का उपयोग करके पारदर्शिता सुनिश्चित की गई है।
चुनौतियाँ और सुधार की दिशा: फिर भी, कार्यांवयन की समस्याएँ, अपर्याप्त भंडारण सुविधाएँ, और खाद्य अपव्यय जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं। सरकार इन समस्याओं को बेहतर प्रबंधन प्रथाओं और सुधारित लॉजिस्टिक्स के माध्यम से संबोधित कर रही है।
निष्कर्ष: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 ने भारत में भूख और कुपोषण को दूर करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, लेकिन कार्यांवयन की समस्याओं को दूर करने और अधिनियम की प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं।
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