किसानों की सहायता के लिए ई-तकनीक के प्रयोग के निहितार्थों को समझाइये । (125 Words) [UPPSC 2023]
ई-तकनीक से कृषि उत्पादन और विपणन में सहायता 1. उत्पादन में सुधार: ई-तकनीक ने कृषि उत्पादन में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं। प्रेसिजन फार्मिंग तकनीकें, जैसे ड्रोन और रिमोट सेंसिंग, मिट्टी की स्थिति, फसल की दशा और कीटों के प्रकोप की वास्तविक समय की जानकारी प्रदान करती हैं। उदाहरण के लिए, ICAR द्वारा ड्रोRead more
ई-तकनीक से कृषि उत्पादन और विपणन में सहायता
1. उत्पादन में सुधार: ई-तकनीक ने कृषि उत्पादन में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं। प्रेसिजन फार्मिंग तकनीकें, जैसे ड्रोन और रिमोट सेंसिंग, मिट्टी की स्थिति, फसल की दशा और कीटों के प्रकोप की वास्तविक समय की जानकारी प्रदान करती हैं। उदाहरण के लिए, ICAR द्वारा ड्रोन का उपयोग फसलों की निगरानी के लिए किया जाता है, जिससे उपज की भविष्यवाणी और संसाधन प्रबंधन में सुधार होता है। मोबाइल ऐप्स जैसे किसान सुविधा मौसम पूर्वानुमान, कृषि सलाह और कीट प्रबंधन की जानकारी उपलब्ध कराते हैं, जिससे किसान बेहतर निर्णय ले सकते हैं।
2. विपणन में सुधार: विपणन में, ई-तकनीक eNAM (इलेक्ट्रॉनिक नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट) जैसे प्लेटफार्म के माध्यम से सीधे बाजार से जोड़ती है। eNAM किसानों को खरीदारों से सीधे जोड़ता है, बिचौलियों को समाप्त करता है और बेहतर मूल्य सुनिश्चित करता है। ऑनलाइन कृषि बाजार, जैसे Ninjacart और BigHaat, किसानों को व्यापक बाजार तक पहुंच प्रदान करते हैं, जिससे उचित मूल्य मिलता है और मंडियों पर निर्भरता कम होती है।
निष्कर्ष: ई-तकनीक कृषि उत्पादन और विपणन को बेहतर जानकारी और बाजार पहुंच प्रदान करके दक्षता और लाभप्रदता में सुधार करती है।
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किसानों की सहायता के लिए ई-तकनीक के निहितार्थ सूचना पहुंच: ई-तकनीक के माध्यम से जलवायु की जानकारी, फसल की सलाह और बाजार की कीमतें किसानों तक तुरंत पहुँचाई जा सकती हैं। उदाहरण के लिए, फसल सलाहकार ऐप्स जैसे Kisan Suvidha ऐप ने किसानों को वास्तविक समय में सलाह प्रदान की है। सामान्य विकास: डिजिटल कृषि पRead more
किसानों की सहायता के लिए ई-तकनीक के निहितार्थ
हालिया उदाहरण: 2024 में, भारतीय सरकार ने ‘कृषि डिजिटल इंडिया’ पहल शुरू की है, जो किसानों को उन्नत ई-तकनीक और डिजिटल उपकरणों की सुविधा प्रदान करती है, जिससे उनकी उत्पादकता और आय में सुधार हो सके।
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