बिहार में चंपारण सत्याग्रह (1917) के कारणों एवं परिणामों का वर्णन कीजिये। [63वीं बीपीएससी मुख्य परीक्षा 2017]
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चंपारण सत्याग्रह (1917), भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण घटना थी, जो महात्मा गांधी के नेतृत्व में बिहार के चंपारण जिले में हुआ। यह सत्याग्रह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में गांधी जी की पहली बड़ी भूमिका थी और इसने देशवासियों को अहिंसक विरोध की शक्ति से परिचित कराया।
चंपारण सत्याग्रह के कारण:
चंपारण सत्याग्रह के परिणाम:
निष्कर्ष:
चंपारण सत्याग्रह ने भारतीय किसानों को उनके अधिकारों के लिए लड़ने का साहस दिया और महात्मा गांधी को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण नेता बना दिया। यह सत्याग्रह गांधी जी के सत्याग्रह और अहिंसा के सिद्धांतों की सफलता का प्रतीक बन गया, जिसने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की दिशा बदल दी।
चंपारण सत्याग्रह (1917): कारण और परिणाम
चंपारण सत्याग्रह महात्मा गांधी द्वारा बिहार के चंपारण जिले में 1917 में आयोजित एक महत्वपूर्ण आंदोलन था, जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ। इस सत्याग्रह के माध्यम से गांधीजी ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ अहिंसा और सत्य के मार्ग पर चलते हुए किसानों के अधिकारों की रक्षा की।
1. चंपारण सत्याग्रह के कारण
चंपारण सत्याग्रह के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण थे, जो मुख्य रूप से स्थानीय किसानों की दुर्दशा से जुड़े थे:
– नील की खेती का शोषण
चंपारण में ब्रिटिश जमींदारों द्वारा नील की खेती पर ज़ोर दिया जाता था। किसानों से यह क़ानूनी रूप से अनुबंधित था कि उन्हें अपनी भूमि का एक निश्चित हिस्सा नील की खेती के लिए देना होगा। इस प्रक्रिया में किसानों से ज़बरदस्ती काम लिया जाता था और उन्हें अत्यधिक शोषण का सामना करना पड़ता था।
– कानूनी और प्रशासनिक उत्पीड़न
ब्रिटिश प्रशासन और जमींदारों द्वारा किसानों से भारी कर वसूल किया जाता था। इसके अलावा, किसानों को अपनी भूमि पर मालिकाना अधिकार की सुरक्षा नहीं थी और उन्हें अक्सर सरकारी अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न का सामना करना पड़ता था।
– गांधीजी का आगमन और सत्याग्रह का विचार
महात्मा गांधी ने चंपारण के किसानों की दुर्दशा को सुना और उन्होंने इसे हल करने के लिए सत्याग्रह की रणनीति अपनाई। गांधीजी का यह विश्वास था कि सत्य और अहिंसा के रास्ते से ही किसी भी संघर्ष को शांतिपूर्वक सुलझाया जा सकता है।
2. चंपारण सत्याग्रह का आयोजन और प्रक्रिया
गांधीजी ने चंपारण के किसानों की समस्याओं का समाधान खोजने के लिए एक अभियान शुरू किया। उन्होंने किसानों को संगठित किया और ब्रिटिश शासन के खिलाफ अपनी आवाज़ उठाने के लिए सत्याग्रह का मार्ग अपनाया।
– गांधीजी का नेतृत्व
गांधीजी ने चंपारण में पहुँचने के बाद सत्याग्रह की शुरुआत की। उन्होंने स्थानीय प्रशासन से समझौता करने से पहले किसानों के साथ मिलकर एक समिति बनाई और उनकी समस्याओं का समाधान किया। गांधीजी की मेहनत और उनकी बातों ने किसानों को प्रेरित किया और उन्हें अधिकारों के लिए संघर्ष करने की ताकत दी।
– संघर्ष और विरोध
गांधीजी के नेतृत्व में किसानों ने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन किया। चंपारण सत्याग्रह के दौरान, गांधीजी और उनके सहयोगियों ने प्रशासन के खिलाफ कई बार विरोध प्रदर्शन किए और किसानों के अधिकारों की रक्षा की।
3. चंपारण सत्याग्रह के परिणाम
चंपारण सत्याग्रह के परिणामस्वरूप न केवल बिहार में बल्कि पूरे देश में किसानों के अधिकारों को लेकर जागरूकता फैली। इस सत्याग्रह के कुछ प्रमुख परिणाम निम्नलिखित थे:
– किसान अधिकारों की रक्षा
चंपारण सत्याग्रह ने किसानों के शोषण को कम करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए। ब्रिटिश सरकार ने किसानों से नील की खेती की जबरदस्ती बंद की और इसके परिणामस्वरूप किसानों को राहत मिली।
– गांधीजी का राष्ट्रीय नेता के रूप में उदय
इस सत्याग्रह के बाद महात्मा गांधी की पहचान एक प्रभावी और लोकप्रिय नेता के रूप में स्थापित हुई। गांधीजी का अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांत को भारतीय राजनीति में एक नया मोड़ मिला।
– ब्रिटिश शासन की प्रतिक्रिया
ब्रिटिश सरकार को मजबूर होकर चंपारण में एक जांच समिति बनानी पड़ी, जिसके परिणामस्वरूप किसानों के शोषण के खिलाफ कुछ सुधार किए गए। हालांकि, यह आंदोलन एक छोटा सा कदम था, लेकिन इससे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा मिली।
– सामाजिक और आर्थिक सुधार
चंपारण सत्याग्रह के बाद संथाल, मुगलों और अन्य किसानों को प्रशासनिक और सामाजिक सुधारों का लाभ हुआ। इसके बाद किसानों को उनकी ज़मीन पर अधिकार मिलना शुरू हुआ और उनके शोषण की प्रक्रिया में कुछ कमी आई।
4. निष्कर्ष
चंपारण सत्याग्रह ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा दी। महात्मा गांधी ने अहिंसा और सत्याग्रह के माध्यम से ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष किया और किसानों के अधिकारों की रक्षा की। इस आंदोलन ने न केवल बिहार, बल्कि पूरे भारत में ब्रिटिश शासन के खिलाफ जन जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस आंदोलन के परिणामस्वरूप चंपारण के किसानों को राहत मिली और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में गांधीजी का प्रभाव और भी प्रबल हुआ।