शेरशाह की ‘राजस्व व्यवस्था’ एवं आर्थिक सुधारों का वर्णन कीजिये। [उत्तर सीमा: 250 शब्द] [UKPSC 2016]
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शेरशाह सूरी (1540-1545) ने अपने शासनकाल में एक सुदृढ़ राजस्व व्यवस्था और आर्थिक सुधारों को लागू किया, जो उनके प्रशासन की कुशलता का परिचायक था। उन्होंने ‘कट्टे’ और ‘अमल’ के माध्यम से राजस्व संग्रह प्रणाली को संगठित किया। कट्टे के अंतर्गत कृषि भूमि की पैमाइश की गई, जिससे सही राजस्व निर्धारण संभव हुआ। शेरशाह ने कृषि उत्पादों पर निर्धारित एक स्थिर कर प्रणाली लागू की, जिससे किसानों को राजस्व अदायगी में आसानी हुई।
उन्होंने ‘दीनार’ नामक एक नए सिक्के की स्थापना की, जिससे व्यापार को बढ़ावा मिला। उनके द्वारा बनाए गए सड़कों और चौकियों ने व्यापारिक गतिविधियों को सुगम बनाया। शेरशाह ने बाजारों का संगठन किया और वस्तुओं के मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता लाई, जिससे उपभोक्ताओं को लाभ हुआ।
शेरशाह ने सामाजिक सुरक्षा के लिए भी कदम उठाए। उन्होंने अकाल और आपदा के समय किसानों को कर में छूट देने का प्रावधान किया। इसके अलावा, उन्होंने व्यापारियों के लिए ऋण सुविधाएँ प्रदान कीं, जिससे वाणिज्यिक गतिविधियाँ प्रोत्साहित हुईं।
इन सुधारों ने न केवल राजस्व प्रणाली को सुदृढ़ किया, बल्कि समग्र अर्थव्यवस्था को भी गतिशील बनाया। शेरशाह की राजस्व व्यवस्था और आर्थिक नीतियों ने उनके शासन को प्रभावशाली बनाया और बाद में मुग़ल साम्राज्य की आर्थिक स्थिरता में भी योगदान दिया। उनकी नीतियाँ आज भी प्रशंसा का विषय हैं।