“हम बच्चे को आसानी से माफ कर सकते हैं, जो अंधेरे से डरता है; जीवन की वास्तविक विडंबना तो तब है जब मनुष्य प्रकाश से डरने लगते हैं।” (150 words) [UPSC 2015]
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प्रस्तावना
इस उद्धरण का आशय यह है कि डर एक स्वाभाविक भावना है, लेकिन जब इंसान प्रकाश (ज्ञान, सच्चाई) से डरने लगता है, तो यह गंभीर समस्या बन जाती है।
ज्ञान का महत्व
आज के युग में, सूचना का युग कहा जाता है, जहां ज्ञान की शक्ति अत्यधिक महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए, कोविड-19 के दौरान लोगों ने बहुत से मिथकों और गलतफहमियों का सामना किया। ऐसे में, वैज्ञानिक तथ्यों और ज्ञान को स्वीकार करने में हिचकिचाहट ने संकट को बढ़ा दिया।
सामाजिक चुनौतियाँ
भारत में, कई लोग धार्मिक अंधविश्वास और सामाजिक पूर्वाग्रह के कारण सच्चाई से दूर रहते हैं। हाल के उदाहरणों में, गौ हत्या कानून की चर्चा में कई लोग विज्ञान और तर्क को नजरअंदाज करते हैं।
निष्कर्ष
इस उद्धरण से यह स्पष्ट है कि ज्ञान और सत्य का सामना करने में हिचकिचाहट से मानवता को नुकसान पहुँचता है। इसलिए, हमें प्रकाश से डरने की बजाय, उसे अपनाना चाहिए।