भारत अलवणजल (फैश वाटर) संसाधनों से सुसंपन्न है। समालोचनापूर्वक परीक्षण कीजिये कि क्या कारण है कि भारत इसके बावजूद जलाभाव से ग्रसित है। (200 words) [UPSC 2015]
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भारत में अलवणजल संसाधनों की प्रचुरता और जलाभाव: समालोचनात्मक परीक्षण
अलवणजल संसाधनों की प्रचुरता
भारत अलवणजल (फ्रेश वॉटर) संसाधनों में समृद्ध है, जिसमें प्रमुख नदियाँ जैसे गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र, और दक्खिन की नदियाँ शामिल हैं। देश की कुल जलवायु और भूगोल के कारण यहाँ जल संसाधनों की कोई कमी नहीं है।
जलाभाव के कारण
जलवायु परिवर्तन के कारण असमान वर्षा पैटर्न, बाढ़, और सूखा जैसी समस्याएँ बढ़ी हैं। उदाहरण के लिए, 2022 में बिहार और उत्तर प्रदेश में भारी वर्षा और बाढ़ ने जल संसाधनों की असमानता को उजागर किया।
जल प्रबंधन की कमी और अधिक पानी का व्यय के कारण जल संसाधनों का समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है। जलाशयों और पानी संग्रहीत योजनाओं की कमी भी एक प्रमुख कारण है। पानी की चोरी और अप्रभावी नल जल आपूर्ति प्रणाली समस्याओं को और बढ़ाते हैं।
जनसंख्या वृद्धि और अत्यधिक जल उपयोग के कारण उपलब्ध जल संसाधनों पर भारी दबाव पड़ता है। शहरीकरण और विकास परियोजनाएँ जल संसाधनों की कमी को और बढ़ाती हैं। पानी की मांग और आपूर्ति के बीच असंतुलन एक प्रमुख मुद्दा है।
जल प्रदूषण भी एक गंभीर समस्या है। नदियों में औद्योगिक और घरेलू अपशिष्ट के कारण जल की गुणवत्ता प्रभावित होती है। उदाहरण के लिए, गंगा नदी का प्रदूषण जल की उपलब्धता को और कम करता है।
निष्कर्ष
भले ही भारत में अलवणजल संसाधनों की प्रचुरता है, लेकिन जलाभाव की समस्या कई जटिल कारणों से उत्पन्न हो रही है। इसके समाधान के लिए समन्वित जल प्रबंधन, जल पुनर्चक्रण, सतत विकास योजनाएँ और सामाजिक जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है। जल संसाधनों का समुचित उपयोग और संरक्षण ही इस समस्या का समाधान है।