आदि शंकराचार्य ने अपनी महान क्षमता से हिंदू धर्म को पुनः स्थापित किया और उत्कृष्ट स्पष्टीकरण प्रस्तुत करते हुए वैदिक परंपरा को फिर से प्रतिष्ठित किया। चर्चा कीजिए। (150 शब्दों में उत्तर दें)
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आदि शंकराचार्य (788-820 ई.) ने हिंदू धर्म को पुनः स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अद्वैत वेदांत के सिद्धांत को स्पष्ट किया, जो तात्त्विक एकता और मोक्ष की दिशा में मार्गदर्शन करता है। उनके विचारों ने हिंदू धर्म की विविधता को एकसूत्र में पिरोते हुए वैदिक परंपरा को फिर से प्रतिष्ठित किया।
शंकराचार्य ने चार मठों की स्थापना की—श्रीशैला, द्वारका, जगन्नाथपुरी, और बदरीनाथ—जो वेदांत के विभिन्न पहलुओं को प्रसारित करने में सहायक सिद्ध हुए। उन्होंने भारतीय समाज में धार्मिक और दार्शनिक अनुशासन को पुनर्जीवित किया, और विभिन्न दार्शनिक तर्कों के माध्यम से अद्वैत वेदांत के सिद्धांतों को प्रमाणित किया।
उनकी कार्यशैली और लेखन—जैसे कि ब्रह्मसूत्र भाष्यम, उपनिषद भाष्यम, और भगवद गीता भाष्यम—ने वैदिक ज्ञान को संजोने और समझाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस प्रकार, शंकराचार्य ने हिंदू धर्म को एक नई दिशा और स्थायित्व