विगत कुछ दशकों में राज्य सभा एक ‘उपयोगहीन स्टैपनी टायर’ से सर्वाधिक उपयोगी सहायक अंग में रूपांतरित हुआ है। उन कारकों तथा क्षेत्रों को आलोकित कीजिये जहाँ यह रूपांतरण दृष्टिगत हो सकता है। (250 words) [UPSC 2020]
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विगत कुछ दशकों में राज्य सभा ने ‘उपयोगहीन स्टैपनी टायर’ से एक महत्वपूर्ण सहायक अंग के रूप में रूपांतरित होने की प्रक्रिया को पार किया है। इस रूपांतरण को निम्नलिखित कारकों और क्षेत्रों में देखा जा सकता है:
1. विधायिका की कार्यप्रणाली में योगदान:
राज्य सभा ने विधायिका की कार्यप्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, विशेषकर समीक्षा और सुझाव देने में। यह सदन विधेयकों की समीक्षा करता है, उन्हें संशोधित करता है, और अपने सुझाव प्रस्तुत करता है, जो कि लोकसभा द्वारा पास किए गए विधेयकों की गुणवत्ता में सुधार लाता है। उदाहरणस्वरूप, कई महत्वपूर्ण विधेयक जैसे कि राजस्व, वित्तीय सुधार, और समाजिक कल्याण के विधेयकों पर राज्य सभा की संस्तुति और सुझाव महत्वपूर्ण रहे हैं।
2. विशेषज्ञता और विविधता:
राज्य सभा में विशेषज्ञों, अनुभवी व्यक्तियों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों का प्रतिनिधित्व होता है। इस कारण, सदन में पेश किए गए मुद्दों पर गहराई से विचार-विमर्श होता है और विभिन्न दृष्टिकोण सामने आते हैं। यह विशेष रूप से उन मामलों में महत्वपूर्ण होता है जहाँ तकनीकी या विशिष्ट ज्ञान की आवश्यकता होती है।
3. संघीय संतुलन:
राज्य सभा ने संघीय ढांचे में संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह राज्यों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का माध्यम है और केंद्रीय नीतियों पर राज्यों के दृष्टिकोण को समाहित करता है। उदाहरण के लिए, राज्यों की विशेष समस्याओं और आवश्यकताओं पर चर्चा कर उन्हें केंद्र सरकार के ध्यान में लाया जाता है।
4. विवादों का समाधान:
राज्य सभा ने विवादित मुद्दों पर मध्यस्थता और समाधान प्रदान करने में भी योगदान दिया है। कई बार यह सदन विधायिका में उत्पन्न होने वाले विवादों को सुलझाने का काम करता है और संतुलित दृष्टिकोण प्रदान करता है।
5. संवैधानिक संशोधन:
राज्य सभा ने संवैधानिक संशोधनों पर विचार और मंजूरी प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह प्रक्रिया संविधान में आवश्यक बदलाव और सुधार को लागू करने में सहायक रही है।
इन कारकों और क्षेत्रों के माध्यम से, राज्य सभा ने अपनी भूमिका और प्रभावशीलता को मजबूत किया है, जिससे यह एक ‘उपयोगहीन स्टैपनी टायर’ से एक महत्वपूर्ण सहायक अंग में परिवर्तित हो गया है।
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