क्या लैंगिक असमानता, गरीबी और कुपोषण के दुश्चक्र को महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को सूक्ष्म वित्त (माइक्रोफाइनेन्स) प्रदान करके तोड़ा जा सकता है? सोदाहरण स्पष्ट कीजिए। (150 words) [UPSC 2021]
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हाँ, लैंगिक असमानता, गरीबी और कुपोषण के दुश्चक्र को महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को सूक्ष्म वित्त (माइक्रोफाइनेंस) प्रदान करके तोड़ा जा सकता है।
उदाहरण और प्रभाव:
स्वयं सहायता समूह (SHG) और सूक्ष्म वित्त: भारतीय राज्यों जैसे तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में SHGs को सूक्ष्म वित्त देने से महिलाओं ने छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू किए, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ।
उदाहरण: “सेल्वा” (Tamil Nadu) और “महिला बैंक” (Andhra Pradesh) जैसी योजनाओं के तहत, महिलाओं को ऋण और वित्तीय सेवाएं मिलीं, जिससे उन्होंने स्वरोजगार और कुटीर उद्योगों में भागीदारी की। इसने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार किया, बल्कि सामाजिक मान्यता और आत्म-निर्भरता भी बढ़ाई।
गरीबी और कुपोषण पर प्रभाव: आर्थिक सशक्तिकरण से महिलाओं के परिवारों की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई, जिससे बेहतर पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ी।
इस प्रकार, सूक्ष्म वित्त SHGs के माध्यम से लैंगिक असमानता, गरीबी और कुपोषण के दुश्चक्र को तोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।