वर्धित राष्ट्रीय संपत्ति के लाभों का न्यायोचित वितरण नहीं हो सका है । इसने “बहुमत के नुकसान पर केवल छोटी अल्पसंख्या के लिए ही आधुनिकता और वैभव के एन्क्लेव” बनाए हैं। इसका औचित्य सिद्ध कीजिए। (150 words) [UPSC 2017]
लोक निधियों के अल्प उपयोग एवं दुरुपयोग के कारण और निहितार्थ **1. अल्प उपयोग और दुरुपयोग के कारण a. प्रशासनिक अक्षमता: जटिल प्रशासनिक प्रक्रियाएँ और लालफीताशाही अक्सर निधियों के वितरण और परियोजनाओं के कार्यान्वयन में विलंब का कारण बनती हैं। उदाहरण के लिए, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (NREGS)Read more
लोक निधियों के अल्प उपयोग एवं दुरुपयोग के कारण और निहितार्थ
**1. अल्प उपयोग और दुरुपयोग के कारण
a. प्रशासनिक अक्षमता:
जटिल प्रशासनिक प्रक्रियाएँ और लालफीताशाही अक्सर निधियों के वितरण और परियोजनाओं के कार्यान्वयन में विलंब का कारण बनती हैं। उदाहरण के लिए, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (NREGS) के तहत परियोजनाओं में अक्सर देरी होती है।
b. भ्रष्टाचार और गलत प्रबंधन:
भ्रष्टाचार और जवाबदेही की कमी से निधियाँ गबन या गलत तरीके से इस्तेमाल हो सकती हैं। PM CARES फंड के संदर्भ में, निधियों के प्रबंधन में पारदर्शिता की कमी के आरोप लगे हैं।
c. अपर्याप्त योजना और निगरानी:
अपर्याप्त योजना और निगरानी की कमी से संसाधनों का असमर्थन हो सकता है। स्मार्ट सिटी परियोजनाएँ भी समय पर न पूरी होने और लागत में वृद्धि की आलोचना का सामना कर चुकी हैं।
**2. निहितार्थ
a. विकास की रुकावट:
अल्प उपयोग और दुरुपयोग से विकास परियोजनाओं की प्रगति में रुकावट आती है, जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) में धीमी प्रगति।
b. सार्वजनिक विश्वास का ह्रास:
लोक निधियों के दुरुपयोग से सरकारी संस्थाओं में विश्वास घटता है, जिससे कल्याणकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर असर पड़ता है।
c. आर्थिक अक्षमता:
संसाधनों के असमर्थन से आर्थिक अक्षमता और विकास लक्ष्यों की पूर्ति में बाधा उत्पन्न होती है।
इन समस्याओं का समाधान उचित प्रशासनिक प्रक्रियाओं, भ्रष्टाचार विरोधी उपायों और प्रभावी निगरानी तंत्र के माध्यम से किया जा सकता है।
See less
वर्धित राष्ट्रीय संपत्ति और इसका असमान वितरण वर्धित राष्ट्रीय संपत्ति ने न्यायोचित वितरण के बजाय “छोटी अल्पसंख्या के लिए आधुनिकता और वैभव के एन्क्लेव” निर्मित किए हैं, जिसका औचित्य कुछ प्रमुख बिंदुओं से सिद्ध किया जा सकता है। धन का संकेन्द्रण: देश की अर्थव्यवस्था में वृद्धि के बावजूद, संपत्ति का अधिRead more
वर्धित राष्ट्रीय संपत्ति और इसका असमान वितरण
वर्धित राष्ट्रीय संपत्ति ने न्यायोचित वितरण के बजाय “छोटी अल्पसंख्या के लिए आधुनिकता और वैभव के एन्क्लेव” निर्मित किए हैं, जिसका औचित्य कुछ प्रमुख बिंदुओं से सिद्ध किया जा सकता है।
धन का संकेन्द्रण: देश की अर्थव्यवस्था में वृद्धि के बावजूद, संपत्ति का अधिकांश भाग अल्पसंख्यक वर्ग के हाथों में सिमटकर रह गया है। उदाहरण के लिए, भारत में उच्च-तकनीकी क्षेत्रों जैसे बंगलुरू और गुड़गांव में अत्यधिक समृद्धि देखी जाती है, जबकि ग्रामीण इलाकों में गरीबी और अविकसितता बनी रहती है।
आधुनिकता के एन्क्लेव: मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स या दिल्ली के कनॉट प्लेस जैसे क्षेत्र आधुनिक सुविधाओं और वैभव का प्रतीक हैं, लेकिन ये क्षेत्र विकसित नहीं और अविकसित इलाकों से घिरे हुए हैं। इन क्षेत्रों के चारों ओर आय असमानता और आधारभूत सेवाओं की कमी देखी जाती है।
बहुमत पर प्रभाव: अधिकांश जनसंख्या, विशेषकर ग्रामीण और वंचित समुदाय, आर्थिक विकास से बहुत कम लाभान्वित होते हैं। उदाहरण के लिए, ग्रामीण भारत में स्वास्थ्य और शिक्षा की कमी बनी रहती है, जो संपत्ति के असमान वितरण को दर्शाता है।
इस प्रकार, वर्धित राष्ट्रीय संपत्ति ने छोटी अल्पसंख्या के लिए आधुनिकता और वैभव के एन्क्लेव बनाए हैं, जबकि बहुमत को इससे न्यूनतम लाभ प्राप्त हुआ है।
See less