जलविद्युत दुनिया भर में निम्न कार्बन उत्सर्जन वाली ऊर्जा आपूर्ति का एक प्रमुख स्रोत है, लेकिन भारत के कुल इलेक्ट्रिसिटी मिक्स में इसकी हिस्सेदारी बहुत कम बनी हुई है। चर्चा कीजिए। (150 शब्दों में उत्तर दें)
महासागरीय संसाधनों का मूल्यांकन: विश्व संसाधन संकट से निपटने के उपाय **1. खनिज संसाधन महासागर खनिज संसाधनों से भरपूर हैं, जैसे पोलिमेटलिक नोड्यूल्स और हाइड्रोथर्मल वेंट्स। हाल ही में, अंतर्राष्ट्रीय समुद्री प्राधिकरण (ISA) ने क्लेरियन-क्लिपरटन जोन में गहरे समुद्री खनन के लिए लाइसेंस जारी किए हैं, जोRead more
महासागरीय संसाधनों का मूल्यांकन: विश्व संसाधन संकट से निपटने के उपाय
**1. खनिज संसाधन
महासागर खनिज संसाधनों से भरपूर हैं, जैसे पोलिमेटलिक नोड्यूल्स और हाइड्रोथर्मल वेंट्स। हाल ही में, अंतर्राष्ट्रीय समुद्री प्राधिकरण (ISA) ने क्लेरियन-क्लिपरटन जोन में गहरे समुद्री खनन के लिए लाइसेंस जारी किए हैं, जो कोबाल्ट और निकल से भरपूर है। हालांकि, समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता पर इसके नकारात्मक प्रभाव चिंता का विषय हैं।
**2. ऊर्जा संसाधन
महासागरों में तेल, प्राकृतिक गैस, और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत जैसे ज्वारीय, लहर और महासागर तापीय ऊर्जा उपलब्ध हैं। स्कॉटलैंड के तट पर फ्लोटिंग विंड फार्म्स और फ्रांस तथा दक्षिण कोरिया में ज्वारीय ऊर्जा परियोजनाएं इसके उदाहरण हैं। फिर भी, इन तकनीकों की उच्च लागत और पर्यावरणीय प्रभाव प्रमुख समस्याएँ हैं।
**3. जैविक संसाधन
मैरिन बायोडायवर्सिटी खाद्य और औषधीय संसाधन प्रदान करती है। हाल ही में, गहरे समुद्र की कोरल्स से प्राप्त एंटी-कैंसर दवाइयां वैज्ञानिक अनुसंधान का उदाहरण हैं। लेकिन, अत्यधिक मछली पकड़ना और आवासीय क्षति इन संसाधनों के संरक्षण को चुनौती देती है।
**4. नमकीन जल से ताजे पानी का निर्माण
नमकीन जल से ताजे पानी के निर्माण के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग जल संकट को दूर कर सकता है। इज़राइल और सऊदी अरब में हाल ही में स्थापित जलवर्धन संयंत्र इसकी सफलता को दर्शाते हैं। लेकिन, उच्च ऊर्जा खपत और ब्राइन के निपटान का पर्यावरणीय प्रभाव चिंताजनक है।
इस प्रकार, महासागरीय संसाधनों की संभावनाओं के बावजूद, इनके उपयोग और संरक्षण में संतुलन बनाए रखना दीर्घकालिक स्थिरता के लिए आवश्यक है।
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जलविद्युत ऊर्जा, कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, लेकिन भारत के कुल इलेक्ट्रिसिटी मिक्स में इसकी हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम है। भारत की कुल बिजली उत्पादन क्षमता में जलविद्युत की हिस्सेदारी लगभग 12% है, जबकि अन्य नवीकरणीय स्रोत जैसे कि सौर और पवन ऊर्जा की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रRead more
जलविद्युत ऊर्जा, कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, लेकिन भारत के कुल इलेक्ट्रिसिटी मिक्स में इसकी हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम है। भारत की कुल बिजली उत्पादन क्षमता में जलविद्युत की हिस्सेदारी लगभग 12% है, जबकि अन्य नवीकरणीय स्रोत जैसे कि सौर और पवन ऊर्जा की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है।
इसकी एक प्रमुख वजह है जलविद्युत परियोजनाओं की उच्च लागत और लंबा निर्माण समय। इसके अलावा, कई क्षेत्रों में नदी प्रवाह की अस्थिरता और पर्यावरणीय चिंताओं के कारण परियोजनाओं की शुरुआत में रुकावटें आती हैं।
वहीं, पर्यावरणीय प्रभाव और स्थानीय समुदायों पर असर के चलते विरोध भी होता है। भारत सरकार ने जलविद्युत को प्रमुख नवीकरणीय स्रोत के रूप में मान्यता दी है, लेकिन इसके विकास में सुधार की आवश्यकता है ताकि यह ऊर्जा मिक्स में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके।
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