सोने के लिए भारतीयों के उन्माद ने हाल के वर्षों में सोने के आयात में प्रोत्कर्ष (उछाल) उत्पन्न कर दिया है और भुगतान संतुलन और रुपए के बाह्य मूल्य पर दबाव डाला है। इसको देखते हुए, स्वर्ण मुद्रीकरण योजना के ...
भुगतान संतुलन (Balance of Payments) एक देश के विदेशी लेन-देन का एक संपूर्ण रिकॉर्ड होता है, जिसमें एक निश्चित अवधि के दौरान विदेशों के साथ सभी वित्तीय लेन-देन की जानकारी शामिल होती है। यह आर्थिक नीतियों की प्रभावशीलता और बाहरी आर्थिक स्थिति का एक महत्वपूर्ण संकेतक होता है। भुगतान संतुलन के प्रमुख घटRead more
भुगतान संतुलन (Balance of Payments) एक देश के विदेशी लेन-देन का एक संपूर्ण रिकॉर्ड होता है, जिसमें एक निश्चित अवधि के दौरान विदेशों के साथ सभी वित्तीय लेन-देन की जानकारी शामिल होती है। यह आर्थिक नीतियों की प्रभावशीलता और बाहरी आर्थिक स्थिति का एक महत्वपूर्ण संकेतक होता है। भुगतान संतुलन के प्रमुख घटक निम्नलिखित हैं:
- वस्तु और सेवाओं का व्यापार (Current Account):
- वस्त्र व्यापार: यह निर्यात और आयात के बीच का अंतर है। यदि निर्यात आयात से अधिक है, तो व्यापार संतुलन सकारात्मक होगा।
- सेवाएं: इसमें सेवाओं के निर्यात और आयात का अंतर शामिल होता है, जैसे पर्यटन, बीमा, और वित्तीय सेवाएं।
- प्रवासी आय: विदेशों में काम करने वाले नागरिकों से प्राप्त श्रम आय और भारत के नागरिकों को विदेशों में भेजी गई आय।
- वेतन हस्तांतरण: विदेशों से प्राप्त या भेजे गए धन का रिकॉर्ड, जैसे उपहार और अन्य व्यक्तिगत लेन-देन।
- वित्तीय खाता (Financial Account):
- सीधा निवेश: विदेशों में निवेशित भारतीय पूंजी और भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशी देशों में निवेश।
- पोर्टफोलियो निवेश: शेयर और बांड जैसी वित्तीय संपत्तियों में निवेश।
- अन्य निवेश: बैंक कर्ज, व्यापार ऋण, और अन्य वित्तीय लेन-देन शामिल हैं।
- आय और पूंजी खाते की संतुलन (Capital Account):
- आय: विदेशों से प्राप्त और भेजी गई पूंजी, जैसे कि संपत्तियों की खरीद और बिक्री।
- सुधार और स्थानांतरण: सरकार द्वारा किए गए अंतर्राष्ट्रीय लेन-देन, जैसे सहायता और अन्य स्थानांतरण।
भुगतान संतुलन का विश्लेषण देशों की वित्तीय स्थिति, मुद्रा स्थिरता और विदेशी पूंजी प्रवाह को समझने में मदद करता है।
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भारतीयों के सोने के उन्माद का प्रभाव और स्वर्ण मुद्रीकरण योजना के गुण भारतीयों का सोने के प्रति उन्माद ने हाल के वर्षों में सोने के आयात में तेजी ला दी है, जिससे भुगतान संतुलन पर दबाव पड़ा है और रुपए के बाह्य मूल्य में गिरावट आई है। उदाहरण के लिए, 2022 में भारत ने लगभग 40 अरब डॉलर का सोना आयात किया,Read more
भारतीयों के सोने के उन्माद का प्रभाव और स्वर्ण मुद्रीकरण योजना के गुण
भारतीयों का सोने के प्रति उन्माद ने हाल के वर्षों में सोने के आयात में तेजी ला दी है, जिससे भुगतान संतुलन पर दबाव पड़ा है और रुपए के बाह्य मूल्य में गिरावट आई है। उदाहरण के लिए, 2022 में भारत ने लगभग 40 अरब डॉलर का सोना आयात किया, जिससे व्यापार घाटा बढ़ा और रुपए पर दबाव बढ़ा।
स्वर्ण मुद्रीकरण योजना के गुण
स्वर्ण मुद्रीकरण योजना (GMS), जो 2015 में शुरू की गई थी, इन समस्याओं का समाधान करने के लिए तैयार की गई है। इसके प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं:
इस प्रकार, स्वर्ण मुद्रीकरण योजना सोने के आयात निर्भरता को कम करने, घरेलू तरलता को बढ़ाने, रुपए की स्थिरता को सुनिश्चित करने और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में सहायक होती है।
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