आचरण की शुद्धि के लिये बुद्ध द्वारा बताए गए अष्टांगिक मार्ग की व्याख्या कीजिये । (200 Words) [UPPSC 2022]
महात्मा गांधी के अनुसार आदर्श मानवीय नैतिक व्यवहार के आवश्यक सद्गुण 1. सत्य (Satya): गांधीजी ने सत्य को नैतिकता का आधार मानते हुए सत्यवादिता और ईमानदारी को महत्वपूर्ण बताया। उदाहरण: उनके सत्याग्रह आंदोलन में सत्य की शक्ति का उपयोग सामाजिक न्याय के लिए किया गया। 2. अहिंसा (Ahimsa): अहिंसा, अर्थात् हिRead more
महात्मा गांधी के अनुसार आदर्श मानवीय नैतिक व्यवहार के आवश्यक सद्गुण
1. सत्य (Satya): गांधीजी ने सत्य को नैतिकता का आधार मानते हुए सत्यवादिता और ईमानदारी को महत्वपूर्ण बताया। उदाहरण: उनके सत्याग्रह आंदोलन में सत्य की शक्ति का उपयोग सामाजिक न्याय के लिए किया गया।
2. अहिंसा (Ahimsa): अहिंसा, अर्थात् हिंसा से परहेज, गांधीजी के नैतिक सिद्धांतों का केंद्रीय हिस्सा था। उदाहरण: भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई में अहिंसात्मक प्रतिरोध ने व्यापक समर्थन प्राप्त किया।
3. आत्म-निर्भरता (Swaraj): गांधीजी ने व्यक्तिगत आत्म-निर्भरता और स्वावलंबन को नैतिक उत्कृष्टता के तत्व के रूप में देखा। उदाहरण: खादी आंदोलन के माध्यम से स्वदेशी वस्त्रों का प्रचार किया।
4. करुणा (Karuna): दूसरों के प्रति दया और सहानुभूति रखना भी गांधीजी के सिद्धांतों में शामिल था। उदाहरण: उन्होंने अछूतों के उत्थान के लिए विशेष प्रयास किए।
निष्कर्ष: महात्मा गांधी के अनुसार, सत्य, अहिंसा, आत्म-निर्भरता, और करुणा ये सद्गुण आदर्श मानवीय नैतिक व्यवहार के लिए अनिवार्य हैं।
See less
आचरण की शुद्धि के लिए बुद्ध द्वारा बताए गए अष्टांगिक मार्ग की व्याख्या 1. सही समझ (सम्मा-दिट्ठि): परिभाषा: वास्तविकता और चार आर्य सत्य को समझना। उदाहरण: बुद्ध के प्रवचन में चार आर्य सत्य का ज्ञान प्राप्त करना, जैसे कि जीवन में दुख का कारण और उसे समाप्त करने का मार्ग। 2. सही इरादा (सम्मा-संकप्पा): परRead more
आचरण की शुद्धि के लिए बुद्ध द्वारा बताए गए अष्टांगिक मार्ग की व्याख्या
1. सही समझ (सम्मा-दिट्ठि):
2. सही इरादा (सम्मा-संकप्पा):
3. सही भाषण (सम्मा-वाचा):
4. सही क्रिया (सम्मा-कम्मन्ता):
5. सही जीविका (सम्मा-आजीवा):
6. सही प्रयास (सम्मा-वायामा):
7. सही सतर्कता (सम्मा-सति):
8. सही ध्यान (सम्मा-समाधि):
इन आठ तत्वों का अनुसरण करके व्यक्ति आचरण की शुद्धि और मानसिक स्पष्टता प्राप्त कर सकता है, जो अंततः आध्यात्मिक मुक्ति की ओर ले जाता है।
See less