“भारतीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग विकसित देशों की गति के साथ नहीं बढ़ा है।” इसकी व्याख्या कीजिये। (125 Words) [UPPSC 2020]
परिभाषा: आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन (SCM) उन सभी गतिविधियों की योजना और नियंत्रण है जो कच्चे माल से लेकर अंतिम उत्पाद तक के सभी चरणों को शामिल करती हैं। इसमें स्रोत (procurement), उत्पादन, लॉजिस्टिक्स, और वितरण शामिल हैं। महत्व भारत में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के संदर्भ में: कुशल संसाधन प्रबंधन: SCM कRead more
परिभाषा: आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन (SCM) उन सभी गतिविधियों की योजना और नियंत्रण है जो कच्चे माल से लेकर अंतिम उत्पाद तक के सभी चरणों को शामिल करती हैं। इसमें स्रोत (procurement), उत्पादन, लॉजिस्टिक्स, और वितरण शामिल हैं।
महत्व भारत में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के संदर्भ में:
- कुशल संसाधन प्रबंधन: SCM के माध्यम से कच्चे माल और संसाधनों का प्रबंधन बेहतर होता है, जिससे फूड वेस्टेज कम होता है और संग्रहण लागत घटती है।
- गुणवत्ता नियंत्रण: SCM सुनिश्चित करता है कि खाद्य उत्पाद गुणवत्ता मानकों के अनुसार हों, जैसे कि आंतर्राष्ट्रीय खाद्य मानक।
- मार्केट रिस्पांस: SCM के साथ, उद्योग बाजार की मांग और उपभोक्ता प्राथमिकताओं के अनुसार तेजी से प्रतिक्रिया कर सकता है, जिससे समय पर वितरण सुनिश्चित होता है।
- लागत में कमी: SCM की अच्छी योजना और कार्यान्वयन से उत्पादन और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आती है, जो प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्रदान करती है।
इस प्रकार, SCM खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में कुशल प्रबंधन, गुणवत्ता सुधार, और लागत में कमी के लिए महत्वपूर्ण है।
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भारतीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की वृद्धि में रुकावटें 1. अवसंरचना की कमी: कूलिंग और कोल्ड चेन के कमजोर संरचना के कारण, भारतीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग पारंपरिक तरीके पर निर्भर रहता है। इसका उदाहरण है, संगठित फूड प्रोसेसिंग पार्कों की कमी। 2. निवेश की कमी: निजी निवेश और अनुसंधान एवं विकास में कमी है,Read more
भारतीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की वृद्धि में रुकावटें
1. अवसंरचना की कमी: कूलिंग और कोल्ड चेन के कमजोर संरचना के कारण, भारतीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग पारंपरिक तरीके पर निर्भर रहता है। इसका उदाहरण है, संगठित फूड प्रोसेसिंग पार्कों की कमी।
2. निवेश की कमी: निजी निवेश और अनुसंधान एवं विकास में कमी है, जो उद्योग के आधुनिकीकरण और विस्तार में बाधक है।
3. नियामक चुनौतियाँ: जटिल नियामक ढाँचा और लंबी प्रक्रिया व्यापार में लचीलापन की कमी और प्रभावशीलता की कमी का कारण बनती है।
हालिया उदाहरण: हाल ही में प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (PMKSY) जैसे सरकारी प्रयास खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को संवृद्धि देने की दिशा में प्रयासरत हैं। इसके बावजूद, अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत को पीछे रहना पड़ रहा है।
सारांश: भारतीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की वृद्धि में संरचनात्मक, निवेश सम्बंधी, और नियामक चुनौतियाँ प्रमुख बाधाएँ हैं।
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