लोक सेवको की लोकतंत्रीय अभिवृति एवं अधिकारीतंत्रीय अभिवृति में विभेद कीजिये। (125 Words) [UPPSC 2019]
नैतिक शासन व्यवस्था का अर्थ नैतिक शासन व्यवस्था से तात्पर्य ऐसी प्रशासनिक प्रणाली से है जिसमें नैतिकता, ईमानदारी, और सदाचार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। यह प्रणाली प्रशासनिक निर्णयों, नीतियों, और कार्यवाहियों में नैतिक मानकों को सुनिश्चित करती है, ताकि जनता के हित सुरक्षित रहें और सार्वजनिक संRead more
नैतिक शासन व्यवस्था का अर्थ
नैतिक शासन व्यवस्था से तात्पर्य ऐसी प्रशासनिक प्रणाली से है जिसमें नैतिकता, ईमानदारी, और सदाचार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। यह प्रणाली प्रशासनिक निर्णयों, नीतियों, और कार्यवाहियों में नैतिक मानकों को सुनिश्चित करती है, ताकि जनता के हित सुरक्षित रहें और सार्वजनिक संसाधनों का दुरुपयोग न हो।
उदाहरण
- प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN): इस योजना के अंतर्गत, सरकार ने छोटे और सीमांत किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान की। इस योजना का कार्यान्वयन पारदर्शी और नैतिक तरीके से किया गया, जिसमें फायदा वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचाने के लिए वैकल्पिक सत्यापन प्रक्रियाओं** और डिजिटल ट्रैकिंग का उपयोग किया गया।
- ई-नैम (e-NAM): यह राष्ट्रीय कृषि बाजार प्लेटफ़ॉर्म किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त करने में सहायता करता है। इसकी पारदर्शिता और नैतिक मानक सुनिश्चित करते हैं कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले, और बिचौलियों की भूमिका कम हो।
नैतिक शासन व्यवस्था में नैतिकता के पालन से जन विश्वास और प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ावा मिलता है, जिससे एक न्यायपूर्ण और प्रभावी सरकारी व्यवस्था सुनिश्चित होती है।
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लोक सेवकों की लोकतंत्रीय और अधिकारीतंत्रीय अभिवृति में विभेद लोकतंत्रीय अभिवृति: जन भागीदारी: लोकतंत्रीय अभिवृति वाले लोक सेवक जनता के साथ सक्रिय सहभागिता को प्राथमिकता देते हैं, जैसे शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकायों में भागीदारी के माध्यम से। पारदर्शिता और उत्तरदायित्व: ये लोक सेवक पारदर्शिता और उत्Read more
लोक सेवकों की लोकतंत्रीय और अधिकारीतंत्रीय अभिवृति में विभेद
लोकतंत्रीय अभिवृति:
अधिकारीतंत्रीय अभिवृति:
हालिया उदाहरण: प्रधानमंत्री जन धन योजना और स्वच्छ भारत मिशन लोकतंत्रीय दृष्टिकोण को दर्शाते हैं, जिसमें नागरिकों की भागीदारी और पारदर्शिता को बढ़ावा दिया गया है।
निष्कर्ष: लोकतंत्रीय अभिवृति जन सहभागिता, पारदर्शिता, और लचीलेपन पर आधारित होती है, जबकि अधिकारीतंत्रीय अभिवृति औपचारिकता, प्रक्रियागत कठोरता, और ऊर्ध्वाधर निर्णय प्रक्रिया पर केंद्रित होती है।
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