‘अद्वैतवाद’ के प्रतिपादक कौन थे? [Answer Limit: 20 words] [UKPSC 2016]
स्वाति के सामने इस आपातकालीन स्थिति में निर्णय लेने की चुनौती है। उसके पास सीमित समय और संसाधन हैं, और उसे यह तय करना है कि किस घायल व्यक्ति को प्राथमिक चिकित्सा प्रदान करना चाहिए। परिस्थिति का विश्लेषण: लड़का और लड़की दोनों गंभीर रूप से घायल हैं: दोनों को तात्कालिक चिकित्सा की आवश्यकता है। स्वाति कRead more
स्वाति के सामने इस आपातकालीन स्थिति में निर्णय लेने की चुनौती है। उसके पास सीमित समय और संसाधन हैं, और उसे यह तय करना है कि किस घायल व्यक्ति को प्राथमिक चिकित्सा प्रदान करना चाहिए।
परिस्थिति का विश्लेषण:
- लड़का और लड़की दोनों गंभीर रूप से घायल हैं: दोनों को तात्कालिक चिकित्सा की आवश्यकता है। स्वाति को यह देखना होगा कि कौन सी स्थिति अधिक गंभीर है।
- लड़की की हालत और कठिनाई: स्वाति का अनुमान है कि लड़की की स्थिति ज्यादा गंभीर है और उसे अकेले संभालना कठिन है। यह संकेत करता है कि उसकी चोटें अधिक जानलेवा हो सकती हैं।
- पैरा मेडिकल प्रशिक्षण: स्वाति की पेशेवर पृष्ठभूमि उसे यह निर्णय लेने में सहायता कर सकती है कि प्राथमिक चिकित्सा प्रदान करते समय किसका जीवन अधिक खतरे में है।
निर्णय:
स्वाति को अपनी प्राथमिक चिकित्सा कौशल का उपयोग करते हुए, पहले लड़की की देखभाल करनी चाहिए। यदि उसकी स्थिति अधिक गंभीर है, तो उसे तात्कालिक चिकित्सा दी जानी चाहिए। यदि वह बचती है, तो उसके पास जीवित रहने की संभावना होगी।
आगे की कार्रवाई:
- स्वाति को पहले लड़की को प्राथमिक चिकित्सा देना शुरू करना चाहिए और उसे स्थिर करने के लिए सभी संभव प्रयास करना चाहिए।
- इसके बाद, वह लड़के की ओर भी ध्यान देगी और उसकी मदद करने का प्रयास करेगी।
निष्कर्ष:
स्वाति का निर्णय लड़के और लड़की दोनों के लिए कठिनाई भरा है, लेकिन उसे प्राथमिकता उस व्यक्ति को देनी चाहिए जिसकी हालत सबसे अधिक गंभीर है। यह नैतिक दुविधा उसके पेशेवर मूल्य और मानवता को दर्शाती है।
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'अद्वैतवाद' के प्रतिपादक आदिशंकराचार्य थे, जिन्होंने इस दार्शनिक प्रणाली को विकसित किया और उसे प्रतिष्ठित किया।
‘अद्वैतवाद’ के प्रतिपादक आदिशंकराचार्य थे, जिन्होंने इस दार्शनिक प्रणाली को विकसित किया और उसे प्रतिष्ठित किया।
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