भारत में 19वीं शताब्दी में प्रचलित सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन में समाज सुधारकों के योगदान का संक्षिप्त विवरण दीजिए।(उत्तर 200 शब्दों में दें)
स्थायी बंदोबस्त प्रणाली (Permanent Settlement) की शुरुआत को प्रेरित करने वाले कारण निम्नलिखित थे: स्थिर राजस्व प्रणाली की आवश्यकता: ईस्ट इंडिया कंपनी को एक स्थिर और पूर्वानुमानित राजस्व प्रणाली की आवश्यकता थी ताकि वह प्रशासनिक और सैन्य खर्चों को स्थिर रूप से पूरा कर सके। स्थायित्व और स्थिरता: भूमि रRead more
स्थायी बंदोबस्त प्रणाली (Permanent Settlement) की शुरुआत को प्रेरित करने वाले कारण निम्नलिखित थे:
- स्थिर राजस्व प्रणाली की आवश्यकता: ईस्ट इंडिया कंपनी को एक स्थिर और पूर्वानुमानित राजस्व प्रणाली की आवश्यकता थी ताकि वह प्रशासनिक और सैन्य खर्चों को स्थिर रूप से पूरा कर सके।
- स्थायित्व और स्थिरता: भूमि राजस्व के स्थायी निर्धारण से बंटवारे और अस्थिरता की समस्या को दूर करने की कोशिश की गई।
- भूमि स्वामित्व के अधिकार: ज़मींदारों को भूमि पर स्थायी मालिकाना अधिकार देने से उनकी पूंजी निवेश की प्रोत्साहना थी, जिससे कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिल सके।
- कृषि उत्पादकता में वृद्धि: ज़मींदारों को राजस्व के स्थायी निर्धारण से अधिक स्वतंत्रता और प्रोत्साहन मिला, जिससे कृषि उत्पादकता बढ़ाने की कोशिश की गई।
परिणाम:
- सामाजिक असंतोष: स्थायी बंदोबस्त ने ज़मींदारों को भूमि पर पूरी शक्ति दी, जिससे किसानों पर अत्यधिक करों और शोषण का बोझ बढ़ गया, और कृषि श्रमिकों की स्थिति खराब हो गई।
- कृषि में गिरावट: ज़मींदारों ने भूमि के दीर्घकालिक अधिकारों का लाभ उठाकर अधिकतम लाभ की कोशिश की, जिसके कारण भूमि की उत्पादकता और फसल की गुणवत्ता में कमी आई।
- राजस्व में स्थिरता: कंपनी को एक स्थिर राजस्व की प्राप्ति हुई, जिससे प्रशासनिक खर्चे पूर्ण करने में सहायता मिली।
- भूमि सुधारों की कमी: स्थायी बंदोबस्त प्रणाली ने भूमि सुधारों की गुंजाइश को सीमित कर दिया, जिससे कृषि और ग्रामीण समाज में संरचनात्मक सुधारों की कमी रही।
इन कारणों और परिणामों ने स्थायी बंदोबस्त प्रणाली की प्रभावशीलता और दीर्घकालिक स्थिरता पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला।
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19वीं शताब्दी भारत में सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन में समाज सुधारकों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस समय के समाज सुधारकों ने विभिन्न क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर काम किया। राजा राममोहन राय: उन्होंने समाज में सुधार के लिए स्वदेशी शिक्षा, विदेशी वस्त्र त्याग, विधवा पुनर्विवाह आदि के मुद्दों परRead more
19वीं शताब्दी भारत में सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन में समाज सुधारकों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस समय के समाज सुधारकों ने विभिन्न क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर काम किया।
इन समाज सुधारकों के प्रयासों से भारतीय समाज में कई सामाजिक कुरीतियाँ समाप्त हुईं और नई सोच और अद्यतन मूल्यों की दिशा में गम्भीर प्रयास किए गए।
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