मध्य एशिया, जो भारत के लिए एक हित क्षेत्र है, में अनेक बाह्य शक्तियों ने अपने-आप को संस्थापित कर लिया है। इस संदर्भ में, भारत द्वारा अश्गाबात करार, 2018 में शामिल होने के निहितार्थों पर चर्चा कीजिए। (150 words) [UPSC ...
दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र, जिसमें लघु द्वीपीय विकासशील देशों (SIDS) शामिल हैं जैसे मालदीव, सेशेल्स, और मॉरीशस, सुरक्षा और पर्यावरणीय खतरों का सामना कर रहा है। इन द्वीपीय देशों को समुद्री अपराध, जलवायु परिवर्तन, और समुद्री संसाधनों के प्रबंधन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। भारत, एक प्Read more
दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र, जिसमें लघु द्वीपीय विकासशील देशों (SIDS) शामिल हैं जैसे मालदीव, सेशेल्स, और मॉरीशस, सुरक्षा और पर्यावरणीय खतरों का सामना कर रहा है। इन द्वीपीय देशों को समुद्री अपराध, जलवायु परिवर्तन, और समुद्री संसाधनों के प्रबंधन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। भारत, एक प्रमुख क्षेत्रीय शक्ति के रूप में, इन देशों के साथ सुरक्षा और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
भारत की भूमिका:
- सुरक्षा सहयोग: भारत ने दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर में सुरक्षा और समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न पहल की हैं। भारत ने मालदीव और सेशेल्स को समुद्री निगरानी उपकरण और गश्ती जहाज प्रदान किए हैं, जिससे इन द्वीपीय देशों की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ किया गया है। भारतीय नौसेना और तट रक्षक नियमित रूप से क्षेत्रीय सहयोग के लिए संयुक्त अभ्यास और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करते हैं।
- जलवायु परिवर्तन: जलवायु परिवर्तन दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर में द्वीपीय देशों के लिए एक गंभीर चुनौती है। भारत ने इन देशों के लिए जलवायु अनुकूलन और आपदा प्रबंधन में मदद करने के लिए प्रौद्योगिकी और विशेषज्ञता प्रदान की है। उदाहरण के लिए, भारत ने सेशेल्स में एक ‘जलवायु विज्ञान केंद्र’ की स्थापना की है, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का अध्ययन और उन्हें नियंत्रित करने के उपायों पर ध्यान केंद्रित करता है।
- आर्थिक और विकासात्मक सहायता: भारत ने इन द्वीपीय देशों के साथ आर्थिक सहयोग को भी बढ़ावा दिया है। भारत ने विभिन्न विकास परियोजनाओं में मदद की है, जैसे कि बुनियादी ढांचे के विकास और शिक्षा में सुधार। उदाहरण के लिए, भारत ने मालदीव और मॉरीशस में कई विकासात्मक परियोजनाओं की फंडिंग की है, जिससे इन देशों के सामाजिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिला है।
- क्षेत्रीय सहयोग: भारत ने क्षेत्रीय संगठनों, जैसे कि भारतीय महासागर आयोग (IOC) और द्वीपीय समूहों के साथ मिलकर सुरक्षा और विकास पहल पर काम किया है। इन संगठनों के माध्यम से, भारत ने SIDS के साथ बहुपरकारीक सहयोग बढ़ाने की दिशा में कार्य किया है।
इन प्रयासों के माध्यम से, भारत ने दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और विकास में एक प्रमुख भूमिका निभाई है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा मिला है।
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अश्गाबात करार 2018 और भारत के हित अश्गाबात करार 2018: अश्गाबात करार 2018, जिसे ‘ट्रांस-अफगानिस्तान पाइपलाइन’ (TAPI) समझौते के रूप में भी जाना जाता है, एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय समझौता है जिसमें भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, और हाल ही में इस पर हस्ताक्षर किए गए अन्य देशों को शामिलRead more
अश्गाबात करार 2018 और भारत के हित
अश्गाबात करार 2018: अश्गाबात करार 2018, जिसे ‘ट्रांस-अफगानिस्तान पाइपलाइन’ (TAPI) समझौते के रूप में भी जाना जाता है, एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय समझौता है जिसमें भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, और हाल ही में इस पर हस्ताक्षर किए गए अन्य देशों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य तुर्कमेनिस्तान से अफगानिस्तान और पाकिस्तान के माध्यम से भारत तक गैस पाइपलाइन का निर्माण करना है।
भारत के लिए निहितार्थ:
उपसंहार: अश्गाबात करार 2018 भारत के ऊर्जा सुरक्षा, भूराजनीतिक स्थिति, और आर्थिक विकास के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, और यह मध्य एशिया में भारतीय उपस्थिति को बढ़ाने में सहायक होगा।
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