परीक्षण कीजिये कि क्षेत्रवाद राष्ट्रीय एकता को कैसे प्रभावित करता है? (125 Words) [UPPSC 2021]
क्षेत्रवाद और भारत के विकास में बाधाएँ 1. विकास असमानता: क्षेत्रवाद विकास योजनाओं और संसाधनों की असमान वितरण को बढ़ावा देता है। विशेष क्षेत्रों में संसाधनों और सुविधाओं की अनावश्यक प्राथमिकता अन्य क्षेत्रों के विकास को प्रभावित करती है। 2. राजनीतिक तनाव: क्षेत्रीय असंतोष और क्षेत्रीय दल कभी-कभी राजनRead more
क्षेत्रवाद और भारत के विकास में बाधाएँ
1. विकास असमानता: क्षेत्रवाद विकास योजनाओं और संसाधनों की असमान वितरण को बढ़ावा देता है। विशेष क्षेत्रों में संसाधनों और सुविधाओं की अनावश्यक प्राथमिकता अन्य क्षेत्रों के विकास को प्रभावित करती है।
2. राजनीतिक तनाव: क्षेत्रीय असंतोष और क्षेत्रीय दल कभी-कभी राजनीतिक स्थिरता को बाधित करते हैं। यह संघीयता और सामाजिक तानाबाना को कमजोर करता है, जैसे कि नकली राज्यों और राजनीतिक आंदोलन।
3. सामाजिक एकता: क्षेत्रवाद सामाजिक विभाजन को बढ़ावा देता है, जिससे भिन्नताएँ और विरोधाभास उत्पन्न होते हैं। यह राष्ट्रीय सामाजिक एकता और समन्वय को प्रभावित करता है।
4. शासन में समस्या: स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और अनियमितता की समस्या बढ़ती है, जो शासन और प्रशासन की गुणवत्ता को प्रभावित करती है।
निष्कर्ष: क्षेत्रवाद भारत के विकास में विकास असमानता, राजनीतिक तनाव, सामाजिक एकता में कमी और शासन संबंधी समस्याएँ उत्पन्न करता है, जिससे एकीकरण और समग्र विकास में बाधाएँ आती हैं।
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क्षेत्रवाद और राष्ट्रीय एकता पर प्रभाव क्षेत्रवाद अक्सर राष्ट्रीय एकता को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। जब क्षेत्रीय समूह अपने विशेष अधिकार और संसाधनों के लिए संघर्ष करते हैं, तो यह आंतरिक मतभेद और विभाजन को जन्म देता है। उदाहरण के लिए, असम में अलग राज्य की मांग और तेलंगाना आंदोलन ने राज्य और कRead more
क्षेत्रवाद और राष्ट्रीय एकता पर प्रभाव
क्षेत्रवाद अक्सर राष्ट्रीय एकता को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। जब क्षेत्रीय समूह अपने विशेष अधिकार और संसाधनों के लिए संघर्ष करते हैं, तो यह आंतरिक मतभेद और विभाजन को जन्म देता है।
उदाहरण के लिए, असम में अलग राज्य की मांग और तेलंगाना आंदोलन ने राज्य और केंद्र सरकार के बीच तनाव को बढ़ाया, जिससे राष्ट्रीय एकता पर प्रभाव पड़ा।
आर्थिक असमानता और उचित संसाधन वितरण की कमी भी क्षेत्रवाद को प्रोत्साहित करती है।
हालांकि, संविधानिक प्रावधान और समान विकास योजनाएं जैसे राज्य पुनर्गठन आयोग और नैतिकता के प्रसार ने क्षेत्रीय असंतोष को कम करने में मदद की है, फिर भी क्षेत्रवाद की चुनौती बनी रहती है।
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