हाल के वर्षों में सहकारी परिसंघवाद की संकल्पना पर अधिकाधिक बल दिया जाता रहा है। विद्यमान संरचना में असुविधाओं और सहकारी परिसंघवाद किस सीमा तक इन असुविधाओं का हल निकाल लेगा, इस पर प्रकाश डालिए। (200 words) [UPSC 2015]
संघीय सरकारों द्वारा अनुच्छेद 356 के उपयोग की कम आवृत्ति: विधिक और राजनीतिक कारक 1. "विधिक कारक": "सुप्रीम कोर्ट की नीतिगत सीमाएँ": 1990 के दशक के मध्य से सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 356 के प्रयोग पर सख्त निगरानी रखी है। "S.R. Bommai v. Union of India (1994)" के निर्णय में, कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 35Read more
संघीय सरकारों द्वारा अनुच्छेद 356 के उपयोग की कम आवृत्ति: विधिक और राजनीतिक कारक
1. “विधिक कारक”:
- “सुप्रीम कोर्ट की नीतिगत सीमाएँ”: 1990 के दशक के मध्य से सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 356 के प्रयोग पर सख्त निगरानी रखी है। “S.R. Bommai v. Union of India (1994)” के निर्णय में, कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 356 का उपयोग केवल अत्यावश्यक परिस्थितियों में किया जा सकता है और इसका प्रयोग राजनीतिक उद्देश्य से नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी निर्धारित किया कि राज्य सरकार को निलंबित करने से पहले राष्ट्रपति को संसद में विश्वास मत प्रस्ताव पेश करना होगा।
- “राज्यपाल की भूमिका और रिपोर्टिंग”: राज्यपाल की रिपोर्ट पर अनुच्छेद 356 के लागू होने की प्रक्रिया में भी कानूनी अनुशासन आया है। राज्यपाल की रिपोर्ट की सच्चाई की जांच के लिए एक प्रणाली विकसित की गई है, जिससे अनुच्छेद 356 का उपयोग सीमित हुआ है।
2. “राजनीतिक कारक”:
- “सर्वदलीय सहमति की आवश्यकता”: 1990 के दशक में, केंद्रीय और राज्य स्तर पर राजनीतिक स्थिरता की आवश्यकता महसूस की गई। विभिन्न राजनीतिक दलों ने राज्य सरकारों को निलंबित करने की प्रक्रिया को पारदर्शी और न्यायपूर्ण बनाने की ओर ध्यान दिया। इसके परिणामस्वरूप, अनुच्छेद 356 का उपयोग सीमित हुआ।
- “राजनीतिक अस्थिरता से बचाव”: राजनीतिक अस्थिरता और चुनावी राजनीति से बचने के लिए, केंद्र सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 356 के प्रयोग को सावधानीपूर्वक और कम आवृत्ति के साथ अपनाया। राजनीतिक दलों ने यह महसूस किया कि बार-बार अनुच्छेद 356 का उपयोग संघीय सौहार्द और राज्य केंद्र संबंधों को प्रभावित कर सकता है।
- “संवैधानिक सुधार और लोक दबाव”: संवैधानिक सुधारों और जनमत के दबाव ने अनुच्छेद 356 के उपयोग को नियंत्रित किया। सार्वजनिक और राजनीतिक दबाव के चलते, सरकारों ने अनुच्छेद 356 का उपयोग न के बराबर किया और इसे अंतिम विकल्प के रूप में रखा।
निष्कर्ष:
संघीय सरकारों द्वारा अनुच्छेद 356 के उपयोग की आवृत्ति में कमी के पीछे विधिक और राजनीतिक दोनों ही कारक हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों ने इस प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और न्यायपूर्ण बनाने में योगदान किया, जबकि राजनीतिक कारकों ने संघीय संबंधों को स्थिर रखने की दिशा में कदम उठाए।
See less
सहकारी परिसंघवाद, जिसमें संघीय और राज्य सरकारों के बीच सहयोग को महत्व दिया जाता है, वर्तमान संरचना की कुछ प्रमुख असुविधाओं को संबोधित करता है। असुविधाएँ: अधिकरण की विखंडनता: शक्तियों का विभाजन विभिन्न स्तरों पर अस्थिरता और प्रभावशीलता की कमी को जन्म दे सकता है, जिससे नीतियों के कार्यान्वयन में कठिनाRead more
सहकारी परिसंघवाद, जिसमें संघीय और राज्य सरकारों के बीच सहयोग को महत्व दिया जाता है, वर्तमान संरचना की कुछ प्रमुख असुविधाओं को संबोधित करता है।
असुविधाएँ:
अधिकरण की विखंडनता: शक्तियों का विभाजन विभिन्न स्तरों पर अस्थिरता और प्रभावशीलता की कमी को जन्म दे सकता है, जिससे नीतियों के कार्यान्वयन में कठिनाइयाँ आती हैं।
समन्वय की समस्याएँ: संघीय और राज्य एजेंसियों के बीच असंगठित प्रयास, राष्ट्रीय मुद्दों का प्रभावी समाधान करने में देरी और असंगति पैदा कर सकते हैं।
संसाधन असमानता: राज्यों के बीच असमान संसाधन वितरण, क्षेत्रीय असमानताओं को बढ़ावा दे सकता है, जिससे सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
स्वार्थों का टकराव: विभिन्न स्तरों की सरकारों के बीच प्राथमिकताओं में टकराव, प्रभावी शासन को बाधित कर सकता है।
सहकारी परिसंघवाद के समाधान:
सुधारित समन्वय: यह संघीय और राज्य सरकारों के बीच संयुक्त पहलों और समझौतों को बढ़ावा देता है, जिससे राष्ट्रीय मुद्दों जैसे कि स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचा, और शिक्षा पर समन्वित प्रयास किए जा सकते हैं।
See lessसंसाधन साझेदारी: सहयोग की भावना से संसाधनों और विशेषज्ञता का साझा उपयोग संभव होता है, असमानता को कम करता है और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करता है।
एकीकृत रणनीति: यह नीति निर्माण में राज्य और संघीय उद्देश्यों को जोड़ता है, जिससे नीतिगत टकराव कम होते हैं और नीति की समग्रता में सुधार होता है।
लचीला शासन: यह राज्यों को संघीय कार्यक्रमों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलित करने की अनुमति देता है, जिससे शासन की प्रतिक्रिया और प्रभावशीलता में सुधार होता है।
इस प्रकार, सहकारी परिसंघवाद संरचनात्मक असुविधाओं को कम कर, बेहतर समन्वय, संसाधन समानता और नीति में सामंजस्य को बढ़ावा देता है।