गोंडवानालैंड के देशों में से एक होने के बावजूद भारत के खनन उद्योग अपने सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी.) में बहुत कम प्रतिशत का योगदान देते हैं। विवेचना कीजिए । (150 words)[UPSC 2021]
लौह खनिज, जो मुख्यतः लौह अयस्क के रूप में पाए जाते हैं, वे खनिज हैं जिनमें लौह की पर्याप्त मात्रा होती है और जिन्हें धातु उत्पादन के लिए प्रयोग किया जाता है। लौह अयस्क मुख्यतः हेमाटाइट (Fe2O3), मैग्नेटाइट (Fe3O4), और लिमोनाइट (FeO(OH)·nH2O) के रूप में पाया जाता है। भारत में लौह अयस्क का वितरण प्रमुखRead more
लौह खनिज, जो मुख्यतः लौह अयस्क के रूप में पाए जाते हैं, वे खनिज हैं जिनमें लौह की पर्याप्त मात्रा होती है और जिन्हें धातु उत्पादन के लिए प्रयोग किया जाता है। लौह अयस्क मुख्यतः हेमाटाइट (Fe2O3), मैग्नेटाइट (Fe3O4), और लिमोनाइट (FeO(OH)·nH2O) के रूप में पाया जाता है।
भारत में लौह अयस्क का वितरण प्रमुख रूप से चार प्रमुख क्षेत्रों में होता है:
- झारखंड-ओडिशा क्षेत्र: यहाँ की लौह अयस्क की खानें जैसे कि दनकुनी, गोपालपुर और कटक प्रमुख हैं। यह क्षेत्र देश के कुल लौह अयस्क उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा प्रदान करता है।
- छत्तीसगढ़: यहाँ भी लौह अयस्क की महत्वपूर्ण खानें हैं जैसे कि बीजापुर और धमतरी।
- कर्नाटक: कर्नाटक में विशेष रूप से बैलारी, खानापुर और हुबली क्षेत्र में लौह अयस्क के बड़े भंडार हैं।
- मध्य प्रदेश: यहाँ के मुख्य लौह अयस्क क्षेत्र छिंदवाड़ा और जबलपुर हैं।
इन क्षेत्रों में लौह अयस्क की उच्च गुणवत्ता और भरपूर मात्रा के कारण भारत लौह अयस्क के उत्पादन में अग्रणी देशों में शामिल है।
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गोंडवानालैंड के देशों में भारत के खनन उद्योग का जी.डी.पी. में कम योगदान खनन संसाधनों की प्रचुरता: भौगोलिक विशेषता: भारत गोंडवानालैंड के प्राचीन भाग में स्थित है, जहाँ खनिज संसाधनों की प्रचुरता है। इसके बावजूद, खनिज जैसे कोयला, लौह अयस्क, और बauxite का जी.डी.पी. में योगदान अपेक्षाकृत कम है। संघर्ष औरRead more
गोंडवानालैंड के देशों में भारत के खनन उद्योग का जी.डी.पी. में कम योगदान
खनन संसाधनों की प्रचुरता:
संघर्ष और अवसंरचना:
आर्थिक और पर्यावरणीय कारण:
इन कारणों से, भारत के खनन उद्योग का जी.डी.पी. में योगदान अपेक्षाकृत कम है, जबकि गोंडवानालैंड में खनिज संसाधनों की प्रचुरता मौजूद है।
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