प्रश्न का उत्तर अधिकतम 200 शब्दों में दीजिए। यह प्रश्न 11 अंक का है। [MPPSC 2023] हिमालय के अपवाह तन्त्र की विवेचना कीजिये।
नदियों को आपस में जोड़ना: सूखा, बाढ़ और जल-परिवहन समस्याओं का समाधान? परिचय नदियों को आपस में जोड़ना (River Linking) एक महत्वाकांक्षी योजना है जिसका उद्देश्य भारत की जल-संवृद्धि और प्रबंधन को बेहतर बनाना है। यह योजना सूखा, बाढ़ और जल-परिवहन की समस्याओं को संबोधित करने के लिए प्रस्तावित की गई है। हालRead more
नदियों को आपस में जोड़ना: सूखा, बाढ़ और जल-परिवहन समस्याओं का समाधान?
परिचय
नदियों को आपस में जोड़ना (River Linking) एक महत्वाकांक्षी योजना है जिसका उद्देश्य भारत की जल-संवृद्धि और प्रबंधन को बेहतर बनाना है। यह योजना सूखा, बाढ़ और जल-परिवहन की समस्याओं को संबोधित करने के लिए प्रस्तावित की गई है। हालांकि, इसके लाभ और समस्याएं दोनों ही महत्वपूर्ण हैं और इनका आलोचनात्मक परीक्षण आवश्यक है।
लाभ
- सूखा का समाधान: नदियों को जोड़ने से पानी की आपूर्ति को बेहतर ढंग से प्रबंधित किया जा सकता है, जिससे सूखा प्रभावित क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ाई जा सकती है। उदाहरण के लिए, गंगा-यमुना लिंक परियोजना से गंगा और यमुना के जल संसाधनों का साझा उपयोग संभव हो सकता है।
- बाढ़ नियंत्रण: जब नदियों को जोड़ने से अतिरिक्त जल अन्य क्षेत्रों में प्रवाहित किया जा सकता है, तो इससे बाढ़ की स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है। पद्मा और यमुना लिंक के प्रस्तावित जोड़ने से बाढ़ के खतरे को कम करने की संभावना है।
- जल-परिवहन में सुधार: नदियों को जोड़ने से जल-मार्गों का विस्तार और सुधार किया जा सकता है, जो वाणिज्यिक परिवहन को बढ़ावा देगा। राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (Ganga) को बेहतर बनाने की योजनाएं इसके उदाहरण हैं।
आलोचना
- पर्यावरणीय प्रभाव: नदियों को जोड़ने से पारिस्थितिक तंत्र में व्यापक बदलाव आ सकते हैं। उदाहरण के लिए, कावेरी-गंगा लिंक परियोजना के खिलाफ कई पर्यावरणीय संगठनों ने आपत्ति जताई है, क्योंकि इससे नदी के प्रवाह और आसपास की वनस्पति पर प्रभाव पड़ सकता है।
- सामाजिक और राजनीतिक विवाद: नदियों को जोड़ने के कार्य से राज्यों के बीच जल वितरण विवाद पैदा हो सकते हैं। कृष्णा-गोदावरी लिंक परियोजना पर आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच विवाद इसका उदाहरण है।
- आर्थिक लागत: इस परियोजना की लागत अत्यधिक हो सकती है और इसे लागू करने में बहुत अधिक वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है। नर्मदा परियोजना के तहत भी इसी तरह की समस्याएं देखी गई हैं, जहां उच्च लागत और देरी की समस्याओं का सामना किया गया।
निष्कर्ष
नदियों को आपस में जोड़ना एक दीर्घकालिक समाधान हो सकता है जो सूखा, बाढ़ और जल-परिवहन की समस्याओं को संबोधित कर सकता है। हालांकि, इसके पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक प्रभावों का समग्र आकलन करना और संतुलित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। उचित नियोजन और कार्यान्वयन के माध्यम से ही इसके लाभों को अधिकतम किया जा सकता है।
See less
हिमालय के अपवाह तन्त्र की विवेचना हिमालय पर्वत श्रेणी, जो कि एशिया के सबसे प्रमुख पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है, का अपवाह तन्त्र (drainage system) अत्यंत जटिल और विविध है। इस तन्त्र में कई प्रमुख नदियाँ और जलग्रहण क्षेत्र शामिल हैं, जो विभिन्न भागों से उत्पन्न होती हैं और दक्षिणी एशिया के जलवायु औरRead more
हिमालय के अपवाह तन्त्र की विवेचना
हिमालय पर्वत श्रेणी, जो कि एशिया के सबसे प्रमुख पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है, का अपवाह तन्त्र (drainage system) अत्यंत जटिल और विविध है। इस तन्त्र में कई प्रमुख नदियाँ और जलग्रहण क्षेत्र शामिल हैं, जो विभिन्न भागों से उत्पन्न होती हैं और दक्षिणी एशिया के जलवायु और पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करती हैं। यहाँ हिमालय के अपवाह तन्त्र का विस्तार से विवेचन किया गया है:
1. गंगा (गंगा) बेसिन:
परिभाषा: गंगा बेसिन में गंगा नदी और उसकी प्रमुख उपनदियाँ शामिल हैं, जो हिमालय की उत्तरी ढलानों से निकलती हैं और भारत के उत्तरी हिस्से से बहकर बंगाल की खाड़ी में समाहित होती हैं।
उदाहरण:
2. सिंधु (इंडस) बेसिन:
परिभाषा: सिंधु बेसिन में सिंधु नदी और इसकी प्रमुख उपनदियाँ शामिल हैं, जो हिमालय की पश्चिमी ढलानों से निकलती हैं और पाकिस्तान के थार रेगिस्तान की ओर बहती हैं।
उदाहरण:
3. ब्रह्मपुत्र बेसिन:
परिभाषा: ब्रह्मपुत्र बेसिन में ब्रह्मपुत्र नदी और इसकी उपनदियाँ शामिल हैं, जो हिमालय की पूर्वी ढलानों से निकलती हैं और बांग्लादेश की ओर बहती हैं।
उदाहरण:
4. पश्चिमी हिमालय के अपवाह तन्त्र:
परिभाषा: पश्चिमी हिमालय के अपवाह तन्त्र में नदियाँ शामिल हैं जो पश्चिम की ओर बहती हैं और अरब सागर की ओर जा मिलती हैं।
उदाहरण:
5. ग्लेशियरी और स्नोमल्ट प्रभाव:
परिभाषा: हिमालय में कई नदियाँ ग्लेशियरी पिघलन और स्नोमल्ट से भरी जाती हैं, जो उनके बहाव और मौसमी बदलावों को प्रभावित करती हैं।
उदाहरण:
निष्कर्ष
हिमालय का अपवाह तन्त्र एक जटिल और विविध प्रणाली है जिसमें विभिन्न प्रमुख नदियाँ और जलग्रहण क्षेत्र शामिल हैं। हाल के वर्षों में जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और जलविवाद जैसे मुद्दे इस तन्त्र को प्रभावित कर रहे हैं, और इन समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी प्रबंधन और संरक्षण की आवश्यकता है।
See less