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भारतीय अर्थव्यवस्था में वैश्वीकरण के परिणामस्वरूप औपचारिक क्षेत्र में रोज़गार कैसे कम हुए? क्या बढ़ती हुई अनौपचारिकता देश के विकास के लिए हानिकारक है? (200 words) [UPSC 2016]
वैश्वीकरण के परिणामस्वरूप औपचारिक क्षेत्र में रोजगार की कमी औपचारिक क्षेत्र में रोजगार की कमी: प्रतिस्पर्धा में वृद्धि: वैश्वीकरण ने अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा को जन्म दिया है, जिससे घरेलू कंपनियों को लागत घटाने के लिए कर्मचारी छंटनी और संरचनात्मक पुनर्गठन करना पड़ा। उदाहरण के लिए,Read more
वैश्वीकरण के परिणामस्वरूप औपचारिक क्षेत्र में रोजगार की कमी
औपचारिक क्षेत्र में रोजगार की कमी:
बढ़ती हुई अनौपचारिकता के प्रभाव:
निष्कर्ष:
वैश्वीकरण के परिणामस्वरूप औपचारिक क्षेत्र में रोजगार में कमी आई है, जिससे अनौपचारिक कार्य की वृद्धि हुई है। यह स्थिति सामाजिक सुरक्षा की कमी, कर राजस्व में कमी और उत्पादकता में गिरावट का कारण बनती है, जो देश के विकास के लिए हानिकारक है। इस समस्या के समाधान के लिए नीतियों की आवश्यकता है जो औपचारिक रोजगार को बढ़ावा दें और अनौपचारिक श्रमिकों की स्थितियों को सुधारें।
See lessलागत प्रभावी छोटी प्रक्रमण इकाई की अल्प स्वीकारिता के क्या कारण हैं? खाद्य प्रक्रमण इकाई गरीब किसानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को ऊपर उठाने में किस प्रकार सहायक होगी ? (150 words) [UPSC 2017]
लागत प्रभावी छोटी प्रक्रमण इकाई की अल्प स्वीकारिता के कारण: **1. आधारभूत संरचना की कमी: सीमित सुविधाएँ: छोटी प्रक्रमण इकाइयों को अक्सर आधारभूत संरचना की कमी का सामना करना पड़ता है, जैसे कि ठंडा भंडारण और आधुनिक प्रक्रमण तकनीक। उदाहरण के लिए, कई छोटे यूनिट्स में उचित ठंडा भंडारण की सुविधा नहीं होती,Read more
लागत प्रभावी छोटी प्रक्रमण इकाई की अल्प स्वीकारिता के कारण:
**1. आधारभूत संरचना की कमी:
**2. उच्च प्रारंभिक निवेश:
**3. बाजार पहुँच की समस्याएँ:
**4. नियमिती समस्याएँ:
खाद्य प्रक्रमण इकाई से गरीब किसानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार:
**1. मूल्य वृद्धि और आय में वृद्धि:
**2. रोजगार सृजन:
**3. पश्चात-फसल क्षति में कमी:
**4. ग्रामीण विकास:
इस प्रकार, लागत प्रभावी छोटी प्रक्रमण इकाइयाँ वित्तीय, बुनियादी ढाँचे, और नियामक चुनौतियों का सामना करती हैं, लेकिन ये किसानों की आय बढ़ाने, रोजगार सृजन, और ग्रामीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
See lessसार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) माडल के अधीन संयुक्त उपक्रमों के माध्यम से भारत में विमानपत्तनों के विकास का परीक्षण कीजिए। इस संबंध में प्राधिकरणों के समक्ष कौन सी चुनौतियां हैं ? (150 words) [UPSC 2017]
भारत में पीपीपी मॉडल के अधीन विमानपत्तनों के विकास: **1. पीपीपी के माध्यम से विकास: सफल परियोजनाएँ: भारत ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत कई विमानपत्तनों के विकास में सफलता देखी है। इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय विमानपत्तन (दिल्ली) और राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय विमानपत्तन (हैदराबाद) इसकRead more
भारत में पीपीपी मॉडल के अधीन विमानपत्तनों के विकास:
**1. पीपीपी के माध्यम से विकास:
**2. चुनौतियाँ:
**1. भूमि अधिग्रहण की समस्याएँ:
**2. नियमिती बाधाएँ:
**3. आर्थिक स्थिरता:
**4. ऑपरेशनल दक्षता:
इस प्रकार, पीपीपी मॉडल ने भारत में विमानपत्तन विकास को आगे बढ़ाया है, लेकिन भूमि अधिग्रहण, नियामक बाधाएँ, वित्तीय स्थिरता, और ऑपरेशनल दक्षता जैसी चुनौतियों का समाधान आवश्यक है।
See lessश्रम-प्रधान निर्यातों के लक्ष्य को प्राप्त करने में विनिर्माण क्षेत्रक की विफलता के कारण बताइए । पूंजी-प्रधान निर्यातों की अपेक्षा अधिक श्रम-प्रधान निर्यातों के लिए, उपायों को सुझाइए । (150 words) [UPSC 2017]
विनिर्माण क्षेत्र की श्रम-प्रधान निर्यातों के लक्ष्य में विफलता के कारण: **1. अपर्याप्त अवसंरचना और प्रौद्योगिकी: आधुनिकता की कमी: कई विनिर्माण इकाइयों में आधुनिक प्रौद्योगिकी और अवसंरचना की कमी है, जो श्रम-प्रधान उद्योगों की उत्पादकता को प्रभावित करती है। उदाहरण के लिए, भारतीय वस्त्र उद्योग पुरानेRead more
विनिर्माण क्षेत्र की श्रम-प्रधान निर्यातों के लक्ष्य में विफलता के कारण:
**1. अपर्याप्त अवसंरचना और प्रौद्योगिकी:
**2. उच्च उत्पादन लागत:
**3. सीमित कौशल विकास:
श्रम-प्रधान निर्यातों को प्रोत्साहित करने के उपाय:
**1. आधारभूत संरचना में सुधार:
**2. कौशल विकास में सुधार:
**3. नीति समर्थन और प्रोत्साहन:
**4. नवाचार और डिज़ाइन पर ध्यान:
इन उपायों को अपनाकर भारत श्रम-प्रधान निर्यातों को बढ़ावा दे सकता है और इस क्षेत्र में बेहतर विकास हासिल कर सकता है।
See lessभारत की संभाव्य संवृद्धि के अनेक कारको में बचत दर, सर्वाधिक प्रभावी है। क्या आप इससे सहमत हैं ? संवृद्धि संभाव्यता के अन्य कौन से कारक उपलब्ध हैं ? (150 words) [UPSC 2017]
भारत की संभाव्य संवृद्धि में बचत दर की भूमिका: 1. बचत दर का महत्व: पूंजी निर्माण: उच्च बचत दर पूंजी निर्माण को बढ़ावा देती है, जो आधारभूत संरचना, तकनीकी उन्नति, और उद्योगों में निवेश के लिए आवश्यक है। हाल के वर्षों में, भारत की सकल घरेलू बचत दर लगभग 30% रही है, जो आर्थिक विकास को समर्थन प्रदान करतीRead more
भारत की संभाव्य संवृद्धि में बचत दर की भूमिका:
1. बचत दर का महत्व:
2. संवृद्धि संभाव्यता के अन्य कारक:
**1. मानव संसाधन विकास:
**2. आधारभूत संरचना विकास:
**3. प्रौद्योगिकी और नवाचार:
**4. आर्थिक सुधार:
इस प्रकार, जबकि बचत दर आर्थिक स्थिरता और पूंजी निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है, मानव संसाधन विकास, आधारभूत संरचना, प्रौद्योगिकी और आर्थिक सुधार भी भारत की संवृद्धि संभाव्यता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
See lessऊर्जा की बढ़ती हुई जरूरतों के परिप्रेक्ष्य में क्या भारत को अपने नाभिकीय ऊर्जा कार्यक्रम का विस्तार करना जारी रखना चाहिए? नाभिकीय ऊर्जा से संबंधित तथ्यों एवं भयों की विवेचना कीजिए। (250 words) [UPSC 2018]
भारत में नाभिकीय ऊर्जा कार्यक्रम का विस्तार: तथ्यों और भयों की विवेचना 1. नाभिकीय ऊर्जा का महत्व: ऊर्जा की बढ़ती मांग: भारत की तेजी से बढ़ती जनसंख्या और औद्योगिकीकरण के चलते, ऊर्जा की मांग में लगातार वृद्धि हो रही है। नाभिकीय ऊर्जा एक स्थिर और उच्च उत्पादन क्षमता वाली ऊर्जा स्रोत है, जो ऊर्जा की कमीRead more
भारत में नाभिकीय ऊर्जा कार्यक्रम का विस्तार: तथ्यों और भयों की विवेचना
1. नाभिकीय ऊर्जा का महत्व:
2. नाभिकीय ऊर्जा से संबंधित तथ्यों:
3. नाभिकीय ऊर्जा से संबंधित भयों:
4. निष्कर्ष: भारत को अपनी नाभिकीय ऊर्जा कार्यक्रम का विस्तार जारी रखना चाहिए, क्योंकि यह ऊर्जा सुरक्षा और वातावरणीय स्थिरता के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। हालांकि, सुरक्षा संबंधी चिंताओं और न्यूक्लियर वेस्ट के प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए, सतर्कता और सुरक्षित नीतियों को अपनाना आवश्यक है। यह सुनिश्चित करना होगा कि नाभिकीय ऊर्जा का विकास सतत और सुरक्षित तरीके से हो, ताकि इसके लाभ को जोखिम से बचाया जा सके।
See lessगत वर्षों में कुछ विशेष फसलों पर जोर ने सस्पन पैटनों में किस प्रकार परिवर्तन ला दिए हैं? मोटे अनाजों (मिलटों) के उत्पादन और उपभोग पर बल को विस्तारपूर्वक स्पष्ट कीजिए। (250 words) [UPSC 2018]
विशेष फसलों पर जोर और सस्पन पैटनों में परिवर्तन 1. विशेष फसलों पर जोर: सरकार की नीतियाँ: हाल के वर्षों में, सरकार ने विशेष फसलों जैसे धान और गेंहू पर जोर देने के साथ-साथ मोटे अनाज (मिलट्स) जैसे बाजरा, रागी, और कोदो की ओर भी ध्यान केंद्रित किया है। यह बदलाव सार्वजनिक वितरण प्रणाली और फसल विविधता के सRead more
विशेष फसलों पर जोर और सस्पन पैटनों में परिवर्तन
1. विशेष फसलों पर जोर:
2. मोटे अनाजों (मिलट्स) का महत्व:
3. हालिया पहलें:
4. सस्पन पैटनों में बदलाव:
5. निष्कर्ष: विशेष फसलों पर जोर ने सस्पन पैटनों में परिवर्तन लाया है। सरकार की नीतियों के तहत मोटे अनाजों के उत्पादन और उपभोग को बढ़ावा देने के प्रयास ने न केवल किसानों के लिए फसल विविधता बढ़ाई है, बल्कि स्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्थिरता में भी योगदान दिया है। यह बदलाव भारत के कृषि क्षेत्र की सततता और विकास के लिए सकारात्मक संकेत है।
See lessन्यूनतम समर्थन मूल्य (एम० एस० पी०) से आप क्या समझते हैं? न्यूनतम समर्थन मूल्य कृषकों का निम्न आय फंदे से किस प्रकार बचाव करेगा? (150 words) [UPSC 2018]
न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी): परिभाषा: न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) एक सरकारी निर्धारित मूल्य है, जिसके तहत सरकार कुछ विशिष्ट फसलों के लिए किसानों से खरीद सुनिश्चित करती है। यह मूल्य किसानों को कृषि उत्पादों की बिक्री पर न्यूनतम आय की गारंटी देता है, भले ही बाजार मूल्य घट जाए। कृषकों का निम्न आय फंदेRead more
न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी):
परिभाषा:
कृषकों का निम्न आय फंदे से बचाव:
MSP के माध्यम से किसानों को वित्तीय स्थिरता और निवेश के लिए प्रोत्साहन मिलता है, जिससे वे निम्न आय फंदे से सुरक्षित रहते हैं।
See lessकेन्द्रीय बजट, 2018-2019 में दीर्घकालिक पूँजी अभिलाभ कर (एल० सी० जी० टी०) तथा लाभांश वितरण कर (डी० डी० टी०) के संबंध में प्रारंभ किए गए महत्त्वपूर्ण परिवर्तनों पर टिप्पणी कीजिए। (150 words) [UPSC 2018]
केन्द्रीय बजट 2018-2019 में एलसीजीटी और डीवीटी के संबंध में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन 1. दीर्घकालिक पूँजी अभिलाभ कर (एलसीजीटी): कर की पुनः शुरूआत: 2018-2019 के बजट में ₹1 लाख से अधिक की दीर्घकालिक पूँजी अभिलाभ पर 10% कर लगाने की घोषणा की गई। यह कर सूचीबद्ध प्रतिभूतियों, इक्विटी-उन्मुख म्यूचुअल फंड्स, औरRead more
केन्द्रीय बजट 2018-2019 में एलसीजीटी और डीवीटी के संबंध में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन
1. दीर्घकालिक पूँजी अभिलाभ कर (एलसीजीटी):
2. लाभांश वितरण कर (डीडीटी):
ये परिवर्तन कर प्रणाली में पारदर्शिता और न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम थे, और उन्होंने निवेशकों और कंपनियों दोनों पर प्रभाव डाला।
See lessफार्मास्युटिकल्स कंपनियों के द्वारा आयुर्विज्ञान के पारंपरिक ज्ञान को पेटेंट कराने से भारत सरकार किस प्रकार रक्षा कर रही है? (250 words) [UPSC 2019]
भारत सरकार द्वारा पारंपरिक आयुर्विज्ञान ज्ञान की रक्षा के उपाय 1. पेटेंट कानूनों में संशोधन: संविधानिक उपाय: भारत ने पेटेंट अधिनियम, 1970 में संशोधन कर पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक वस्त्रों की रक्षा के लिए प्रावधान किए हैं। प्राकृतिक पदार्थों और पारंपरिक ज्ञान को पेटेंट की रक्षा में अधिकार नहीं मिलRead more
भारत सरकार द्वारा पारंपरिक आयुर्विज्ञान ज्ञान की रक्षा के उपाय
1. पेटेंट कानूनों में संशोधन:
2. खगोलिय डेटाबेस और दस्तावेज़ीकरण:
3. अंतरराष्ट्रीय सहयोग और समझौते:
4. आयुष मंत्रालय और अनुसंधान:
5. प्रवर्तन और निगरानी:
निष्कर्ष: भारत सरकार ने पारंपरिक आयुर्विज्ञान के ज्ञान को पेटेंटिंग से बचाने के लिए कानूनी, डॉक्यूमेंटेशन, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, और अनुसंधान उपाय अपनाए हैं। ये कदम पारंपरिक ज्ञान की रक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर इसके प्रवर्तन और सुरक्षा को भी सक्षम बनाते हैं.
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